अब देश में सामान्य क्रिया कलाप संभव नहीं रहे। पूरे समय उत्तेजना जरूरी है। देश को आदत पड़ चुकी है। पेट की बात नहीं सुनेंगे मगर मन की बात सुनेंगे। सब कुछ मेगा चाहिए। अब आरती नहीं होती, महाआरती होती है। अन्तर्राट्रीय मेगा सम्मिट चाहिए। इस सम्मिट में 8-9 लड़कों ने शर्ट टी शर्ट उतारकर नारेबाजी कर दी। वो लोग इंडिया यूएस ट्रेड डील का विरोध कर रहे थे। पुलिस तत्काल एक्शन में आई और लड़कों को तरह तरह से पकड़ा गया। और प्रधानमंत्री ने अपने पद के अनुरूप एक भाषण इस विषय पर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेसी तो शुरू से ही नंगे हैं। शायद वे महात्मा गांधी पर व्यंग्य कर रहे थे।
कांग्रेस के बारे में ऐसा खुलासा वो कर रहा है जो रोज दिन में तीन बार कपड़े बदलता है। जो अन्तर्राष्ट्रीय समिट में पूरा पंडाल खाली कराके अकेले अकड़ के साथ चलते हुए फोटो शूट कराता है। वो कांग्रेसियों को नंगा कहे इसमें कोई आश्चर्य नहीं। राजा में कुछ ज्यादा ही एहसासे कमतरी है। वो पढ़ा लिखा नहीं है तो वो सबसे ज्यादा पढ़ा लिखा विद्वान दिखना चाहता है। उसे असाधारण दिखने की बेताबी है। वो लाखों रूपये के चश्मे, पैन, घड़ी पहनता है। वो दस लाख का अपने नाम के कपड़े का सूट पहनता है। वो करोड़ों रूपये की कार में घूमता है। उसने हजारों करोड़ के विमान खरीदे हैं। उसने बताया कि कांग्रेसी नंगे हैं।
इस खुलासे से एक नई बहस छिड़ गई है। कौन कौन नंगा है। नंगपन आखिर होता क्या है ? निर्वस्त्र को नंगा कहना बहुत ही सतही बात है। नंगा होना एक भौतिक अवस्था मात्र नहीं है। नंगपन एक प्रवृत्ति का नाम भी तो है। नंगई करना हरेक के बस की बात नहीं है। नंगत्व में नंगई का पूरा दर्शन समाहित है।
नंगा काफी नंगा टाइप का शब्द है। डोरीलाल को ऐसा शब्द मिला नहीं जो नंगपन की विराटता को पूरी तरह व्यक्त कर सके। नंगपन नंगपन ही है। न उससे ज्यादा न उससे कम। नंगपन मनुष्य का गुण है। जहां जहां आदमजात है वहां वहां नंगपन है। देश और दुनिया में नंगत्व का महत्व स्वीकार कर लिया गया है। हमारे देश में हमने नंगत्व के शिखर को छू लिया है। हम सर्वश्रेष्ठ हैं। हमारे यहां नग्नता की पूजा होती है। किसी भी नंगे को देखकर हम सहज ही प्रभावित हो जाते हैं। तत्काल उसके नारे लगाने लगते हैं। उसे देखने मात्र के लिए उमड़ पड़ते हैं। भगदड़ मच जाती है। नंगा - नंगा का शोर मच जाता है। नंगा दूसरों को नंगा कहता है।
नंगत्व अब हमारी पहचान है। नंगापन अब हमारे समाज में दूध में पानी की तरह घुल गया है। नंगपन का असर अब हमारे सर चढ़ कर बोलने लगा है। नंगों से तो खुदा भी डरता है। आम आदमी हर जगह डरा हुआ है। देश की जनता को अब कपडे़ पहने आदमी में खोट दिखाई पड़ता है। वो नंगा क्यां नहीं है। फलां आदमी देश नहीं चला पायेगा। क्यों ? क्योंकि वो नंगा नहीं है। नंगा चाहे देश बेच दे, मगर राष्ट्र के लिए वही जरूरी है। वही राष्ट्र की सीमाओं को सुरक्षित रख सकता है। दुनिया में डंका बजा सकता है। देश को चलाने के लिए नंगत्व को अंगीकार करना ही होगा।
नंगपन इतना आदरणीय हो जाएगा यह कभी सोचा न था। अब नंगों का समाज में सम्मान है। वो समाज का नेतृत्व करते हैं। वो मार्गदर्शन करते हैं। वो राष्ट्र निर्माण में अपने योगदान की चर्चा करते हैं। कहते हैं उनके नंगपन के कारण ही आज देश और दुनिया यहां तक पंहुची है। यदि कोई नंगा किसी के कपड़े उतार दे तो ये नया नंगा उसका आभार व्यक्त करता है। बड़ी कृपा की प्रभु मुझे अपनी बिरादरी में शामिल कर लिया। नंगत्व ने देश में नंगों को ऐसा सुरक्षा कवच दिया है कि अब देश में कपड़े वाले दिखाई ही नहीं देते। चारों ओर नंगे ही नंगे। उन्हीं का राज दिखाई देता है। कपड़े पहने आदमी डरा हुआ है। कब कौन नंगा उसके कपड़े झपट ले।
नंगे अब सशस्त्र हैं। उनके शस्त्र हैं पुलिस, ईडी, सीबीआई, नारकोटिक्स, चुनाव आयोग, इन्कम टैक्स, जीएसटी और न्यायालय। इस नंगपन को देखकर एक बड़े वकील ने वकालत छोड़ दी। उसने कहा कि अब न्याय की कोई उम्मीद इस देश में नहीं की जा सकती। उसका प्रतिवाद किसी नंगे ने नहीं किया। पुल गिर रहे हैं, घरों को बुलडोजर से गिराया जा रहा है, सालों तक निर्दाष लोगों को जेल में रखा जा रहा है न सजा दी जा रही है न मुकदमा चल रहा है और न जमानत दी जा रही है। 20-25 सालों जेल में रखने के बाद निर्दोष बरी कर दिया जाता है। चाहे जिस राजनेता को निराधार आरोपों में जेल में डाल दिया जाता है। झूठे मुकदमे लगाए जा रहे हैं। अपराधी आजाद है और पीड़ित जेल में है। पत्रकारों को जेल में डाला जा रहा है। कोई सुनवाई नहीं। जज का नाम पढ़कर मुकदमे का निर्णय बताया जा रहा है।
चुनाव में वोटर वोट चाहे जिसको दे जीतेगा नंगा ही। इतनी अच्छी तकनीक विकसित कर ली गई है। पूरे नंगपन से बिहार में दस दस हजार चुनाव के दिन खातों में डालकर वोट खरीदे गए और सब चुप हैं। कपड़े पहने लोगों को चुप रहने की आदत पड़ गई है। अखबार पढ़ने का कोई माइने नहीं रहा। उसमें खबर गायब है। केवल स्तुति है। जिन्होंने आजादी की लड़ाई लड़ी, जेल गए, देश को आजाद कराया, संविधान बनाया, संवैधानिक परंपराएं बनाईं वो आज अपराधी बना दिए गए हैं। लाखों पेड़ काटकर नंगे मां के नाम का एक पौधा लगा रहे हैं।
अन्तर्राष्ट्रीय नंगपन का स्केल अलग है। एपस्टीन फाइल ने बताया कि मनुष्य कितना नंगा हो सकता है और वो कितना नीच हो सकता है। पूरी दुनिया में नंगों का सशक्त गिरोह है। सम्पूर्ण मनुष्य जाति का भूत भविष्य वर्तमान नंगों के हाथों में है।
देश में करोड़ों लोग रोटी, कपड़ा मकान से महरूम हैं मगर लोगों का पेट भरने, रोजगार देने की जगह ये लोग इस बहस में लगे हैं कि नंगा कौन है ?
क्या नंगई है।
डोरीलाल नंगत्व प्रेमी
14 03 2026
