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Tuesday, 16 June 2026

न्याय का बैडमिन्टन

डोरीलाल जी, बैडमिन्टन के खेल के बारे में कुछ प्रकाश डालिये।

            बैडमिन्टन एक खेल है जिसमें एक कोर्ट होता है। एक या दो खिलाड़ी आमने सामने होते हैं। बीच में एक जाली लगी रहती है। इनके बीच में एक शटल काॅक (चिड़िया) होती है। दोनों तरफ से खिलाड़ी चिड़िया को अपने रैकेट से मारते हैं। शटल काॅक जमीन पर गिरना नहीं चाहिए, गिरी तो फाउल। इस तरह चिड़िया इस पार से उस पार आती जाती रहती है। खेल में एक रेफ्री होता है जो स्कोर, फाउल वगैरह बताता है। खेल में कई सैट होते हैं। जो ज्यादा सैट जीतता है वो जीत जाता है। बैडमिन्टन एक मनोरंजक खेल है। इसमें शटल काॅक के अलावा सभी को बहुत मजा आता है।

                  बैडमिन्टन के खेल का महत्व बैडमिन्टन का खेल केवल अमीर लोग खेलते हैं। गरीब लोग देखने की औकात भी नहीं रखते। जब कोई गरीब अमीर हो जाता है तो वह सबसे पहले बैडमिन्टन खेलता है। जब कोई डिप्टी कलेक्टर, कलेक्टर बनता है तो वो रैकेट खरीदता है और क्लब जाकर बैडमिन्टन खेलता है। बैडमिन्टन खेलने से पता चलता है कि खिलाड़ी का समाज में क्या स्टेटस है। आम लोग क्रिकेट, फुटबाल, कबड्डी, खो खो जैसे गरीबों के खेल खेलते हैं। अमीर लोग लाॅन टेनिस, गोल्फ और बैडमिन्टन खेलते हैं। कमरे में बैठ के ब्रिज खेलते हैं। जब तक देश परतंत्र था तब तक नंगे भूखे लोग राजनीति का खेल खेला करते थे मगर जबसे भारत विकसित हो गया है अब राजनीति भी अमीरों का खेल है। गरीब और पढ़े लिखे का तो पर्चा भरना भी मंजूर नहीं है। महिला का तो बिलकुल भी नहीं। रेफ्री और सत्ता का खिलाड़ी एक तरफ है। रेफ्री ने कह दिया फाउल है। गरीब खिलाड़ी ने बड़े रेफ्री की ओर देखा। बड़े रेफ्री को सांप सूंघ गया। अभी तक बेहोश है। सर्वोच्च कोर्ट ने कहा कि हम बैडमिन्टन कोर्ट के रेफ्री को कुछ नहीं बोल सकते। वो सुप्रीम हैं। वो आदरणीय है। हम उनके सामने कहां लगते हैं। आगे देखो बाबा।

             न्याय का बैडमिन्टन न्यायालय और बैडमिन्टन में समानता के कारण न्यायालय को कोर्ट कहा जाता है। कोर्ट में एक ओर जज साहब और दूसरी ओर वकील साहब होते हैं। कभी कभी कोर्ट में दो जज बैठते हैं। बैडमिन्टन में इसे मैन्स डबल्स कहा जाता है। जब महिला और पुरूष मिलकर खेलते हैं तो उसे मिक्सड डबल्स कहते हैं। केस की सुनवाई में जज साहब और वकील साहब के बीच शटल काॅक दोनों ओर से शाॅट खाती रहती है। खिलाड़ी उसे गिरने नहीं देते। शाम को शटल काॅक को सहेज कर आलमारी में रख दिया जाता है। सालों तक जब ये खेल चलता है तो फिर शटल काॅक अपनी मौत आप मर जाती है।

                शटल काॅक न्यायालय की आलमारी में करोड़ों शटल काॅक जमा हैं। अपने खेले जाने का इंतजार कर रही हैं। कोर्ट बदलते हैं। खिलाड़ी बदलते जाते हैं मगर शटल काॅक नहीं बदलती। वो कुटती रहती है। शटल काॅक की नियति यही है। वो कुटेगी। हर कोर्ट में कुटेगी और खिलाड़ी खेलते रहेंगे।

           डोरीलाल जी अब अपना व्यंग्य रखिये अपनी जेब में और बताइये कि भारत के हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के जज साहबान और बड़े बड़े वकील साहबान लंदन जाकर (कानून और न्याय मंत्रालय के प्रायोजित सरकारी पैसे से और कार्पोरेट पूंजीपतियों के प्राईवेट पैसे से) बैडमिन्टन खेल रहे हैं तो इसमें पाप क्या है ? क्या उन्हें अमीर होते हुए भी बैडमिन्टन खेलने का हक नहीं ?

                 डोरीलाल ने कहा कि सरकार ने कहा है कि हमारे मंत्री जिनका नाम चीफ जस्टिस के साथ मुख्य अतिथि और उद्घाटनकर्ता के रूप में छपा है वो उस दिन बीकानेर में थे। जो फोटो वीडियो वगैरह दिखाये जा रहे हैं वो हैं असली लेकिन पुराने इवेंट के हैं। लंदन में फोटो खींचने की मनाही कर दी गई है। इवेंट के पोस्टर में प्रायोजक के रूप में न्याय व कानून मंत्रालय और कई कार्पोरेट्स के नाम लिखे हैं। इससे इन्कार नहीं किया गया है। जिनका नमक खाया जाएगा उनका बजाया जाएगा। 

               


जज और वकील साहबान लंदन जाकर बैडमिन्टन खेल कर पुरानी पड़ चुकी परंपराओं और अंधविश्वासों को तोड़ देना चाहते हैं। ये अंधविश्वास है कि जज, वकील और वादी प्रतिवादी आपस में मिल बैठकर ले देकर मामला नहीं निपटा सकते। कानूनी बहसों और कानूनी धाराओं, दृष्टांतों का समय जा चुका है। ये मत भूलिये पूरे विपक्ष को सस्पेंड करके हमने कानून की किताबें निर्विरोध बदली हैं। आज इस हाथ दे और उस हाथ ले वाली प्रेक्टिकल एप्रोच अनिवार्य हो गई है। आज सरकार सबसे बड़ी मुकदमेबाज है, कार्पोरेट के अरबों खरबों के मामले फंसे हैं। यदि जज, सरकार, कार्पोरेट सब आमने सामने बैठ जाएं। वकील साहबान बिचैलिए हैं ही, तो सालों का काम मिनटों में निपट सकता है। आखिर आज भी हो तो यही रहा है। पर्दे के पीछे सरकार खड़े होकर निर्णय बता देती है और अदालत निर्णय की घोषणा कर देती है। न्यायाधीशों के निर्णय एक औपचारिकता हो गए हैं। लंदन बैडमिंटन टूर्नामेंट के बाद उम्मीद है कि अब वकील को जज को केवल इतना बताना होगा कि मीलार्ड कल रात बात हो गई। सौदा तय हो गया है या सरकार ने आपसे ये निर्णय देने को कहा है।

            काम, क्रोध, लोभ, मोह और भय ये मनुष्य जाति में नैसर्गिक हैं। न्यायाधीश भी मनुष्य हैं। उसी तरह जैसे संसद सदस्य और विधायक भी मनुष्य हैं। उन्हें समाज से अलग काट कर ईमानदार और निष्पक्ष होने की उम्मीद रखना पाप है। लंदन में सरकार -कार्पोरेट-वकील-न्यायाधीश टूर्नामेंट भारत में सुलभ न्याय की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

जो कुछ करो, पूरी बेशर्मी से करो, खुल्लमखुल्ला करो।

डोरीलाल बैडमिन्टन प्रेमी 15.06.2026 See less

Wednesday, 3 June 2026

आपका क्या होगा जनाबे आली ?

      अपनी तो जैसे तैसे, थोड़ी ऐसे या वैसे, कट जाएगी, आपका क्या होगा जनाबे आली ?

          वो नाचे जा रहा था। उसने डोरीलाल को भी साथ ले लिया। हम दोनों नाचने लगे। मुझे लगा कि अभी सीबीएसई का रिजल्ट आया है इसका पोता पास हो गया होगा इसलिए नाच रहा है। मुझे उसकी खुशी  में खुश होना चाहिए सो मैं भी नाचने लगा। 

         थक जाने के बाद मैंने उससे पूछा कि भाई इस खुशी का कारण ? उसने बताया कि डोरीलाल अपन तो अब सत्तर पार हैं। अपन तो विकसित भारत नहीं देखेंगे। मगर जो लोग इस भरम में हैं कि केवल 20 साल की बात है। फिर विकसित भारत और हम सब खुशहाल। मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती। उनके लिए विकसित भारत के नमूने दिन रात दिख रहे हैं। अभी 22 लाख बच्चों की नीट की परीक्षा एक बार फिर निपट गई। फिर सीबीएसई का रिजल्ट आया तो 18 लाख बच्चों को उसमें निपटा दिया गया। मगर कोई गुस्सा नहीं। चारों तरफ सन्नाटा है। मां बाप बेचारे डरे हुए हैं, किसी तरह अपना बच्चा भर पढ़ जाए, उसकी नौकरी भर लग जाए।  

       सरकार ने कह दिया नीट की परीक्षा फिर से करवा देते हैं। इस बार फिर गड़बड़ हो गई कोई बात नहीं। सीबीएससी के बच्चों की कापी फिर से जंचवा देते हैं कोई बात नहीं। ये अपराधी ये किस जेम्स बांड की औलाद हैं जो इतनी बड़ी सुरक्षा को भेद जाते हैं ? पता चलता है कि ये नामालूम लोग पेपर सैटर हैं। इतने योग्य लोग सैटर बनाए गए हैं। पुणे में तो तीन मनीषा मिल गईं। ये पेपर सैटर ही पेपर लीक करते हैं। और ये अपराधी सब राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली में ही मिलते हैं जहां डबल इंजन की सरकार हैं। एक 16 साल के बच्चे ने ट्विटर पर लिख दिया कि मुझे जो मेरी कापी दिखाई गई है वो मेरी नहीं है। तो उसका कनेक्शन पाकिस्तान से ढूंढ लिया गया। जाॅजे सोरोस से ढूंढ लिया गया। ये कैसा देश है जो अपने देश के नौजवानों से इतनी घृणा करता है। 

          इन जैसे तमाम बच्चों के मां बापों ने ये सरकार चुनी है। बार बार चुनी है। मुझे पूरा भरोसा है कि 2047 तक तो बराबर चुनते रहेंगे। क्योंकि मुसलमान, बकरा, गाय, नमाज, भगवान राम तो तब भी रहेंगे। वोट भी इसी आधार पर देते रहना है। 2047 के बाद 2057 आ जाएगा। पहली आजादी की लड़ाई के दो सौ साल पूरे। तो दस साल और। जिनने न पहली आजादी की लड़ाई लड़ी न दूसरी आजादी की, वो आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। सही है इनके लिए आजादी तो लूट का उत्सव ही है। 

        डोरीलाल ने पूछा कि भई तुम नाच क्यों रहे थे ? मुझे भी नचा लिया पर कारण तो बताओ। उसने कहा देखो भाई अपनी तो कट गई। जब तक हमारे बस में रहा हमने लोकतंत्र को बचाया। भाईचारे को बचाया। घर बनाया। धंधा किया। नौकरी की। बच्चों को पढ़ाया लिखाया। काबिल बनाया। अब हमारे बच्चे जिम्मेदार हो गए। अब उनको नौकरी धंधा परिवार पालना है। अब उनको अपने बाल बच्चों को जवाब देना है कि ये क्या देश है जिसमें हमें तुमने पैदा किया है। ये कैसी सरकार है ? ये कैसा शासन है ? ये कैसा देश है जिसमें हम अपने घर में सुरक्षित नहीं हैं। देश के वैज्ञानिक, बुद्धिजीवी जेल में हैं। व्यापारी जेल में हैं। हर काबिल आदमी विदेश में जा बसता है। 

        हमारे बच्चे हमसे नहीं कह सकते कि तुमने कैसा देश बनाया ? हमने तो देश को सम्हाल कर रखा। कारखाने बनाए। स्कूल काॅलेज बनाए। अस्पताल बनाए। घर बनाए। हंसी खुशी पूरा देश होली दीवाली ईद और क्रिसमस त्यौहार मनाता था। एक दूसरे को गले लगाता था। जनगणमन गाता था। रेडियो में मुहम्मद रफी और लता मंगेशकर के गाने सुनता था। मगर अब हमारे बच्चों के बच्चे अपने मां बाप से पूछ रहे हैं कि पापा मम्मी तुम लोगों ने देश का क्या हाल कर दिया है। ये कैसी सरकार बनाई है तुम लोगों ने जो तुम्हारी सुनती नहीं। हमारी परीक्षाएं नहीं हो रही हैं। पेपर आउट हो रहे हैं। हमें नौकरी नहीं मिल रहीं। सड़क पर हम सुरक्षित नहीं हैं। पूरे समय लड़ाई दंगे की बातें होती हैं। चारों तरफ नफरत ही नफरत है। हमें इस देश में क्यों पैदा किया गया है ? ये कैसी सरकार है जो हमें देश में पैदा होने के बावजूद नागरिक नहीं मानती ? 

        भारत की जनता धर्मप्राण है। इसे लूट लो। उफ नहीं करेगी। धीरे धीरे जनता को समझ आ गया है कि अब सरकार को जनता की जरूरत नहीं रही। सरकार ने अपनी जनता चुन ली है। अभी बड़े न्यायालय के बड़े न्यायाधीशों ने भी कह दिया कि भारत में सरकार को जनता चुनने का अधिकार है। बड़ी आस लगाए थे लोग कि बड़े न्यायाधीश तो मान जाएंगे कह देंगे कि जनता को सरकार चुनने का अधिकार है। अब मिल गया बाबाजी का ठुल्लू। अब ये तय हो गया है कि वही वोटर होगा जो सरकारी पार्टी को वोट देगा। बाकी को वोट देने का अधिकार खत्म। 

        हम जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं। हम जहरीला पानी पी रहे हैं। वो भी धरती से खत्म होता जा रहा है। हम जहरीली सब्जी और जहरीला अनाज खा रहे हैं। हम मंहगा इलाज करवा रहे हैं। हम मंहगा बीमा करवा रहे हैं। देश में नौकरी खत्म हो चुकी हैं। शिक्षा के लिए हर कोई विदेश भाग रहा है। अमीर गरीब के अंतर ने रिकाॅर्ड तोड़ दिया है। देश की सारी संपत्ति देश के कुछ अमीरों के पास जमा है। आम आदमी के लिए आमदनी घट रही है और मंहगाई बढ़ रही है। देश के अधिकांश लोग दस हजार रूपये कमाते हैं। 85 करोड़ मुफ्त का राशन पाते हैं। उनसे कहा गया है कि सोना मत खरीदना। हवाई जहाज में मत बैठना। 

      इस देश के नागरिक का कितना मजाक और बनाया जाएगा ?


डोरीलाल मजाक प्रेमी

31 05 2026

न्याय का बैडमिन्टन

डोरीलाल जी, बैडमिन्टन के खेल के बारे में कुछ प्रकाश डालिये।             बैडमिन्टन एक खेल है जिसमें एक कोर्ट होता है। एक या दो खिलाड़ी आमने स...