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Tuesday, 16 June 2026

न्याय का बैडमिन्टन

डोरीलाल जी, बैडमिन्टन के खेल के बारे में कुछ प्रकाश डालिये।

            बैडमिन्टन एक खेल है जिसमें एक कोर्ट होता है। एक या दो खिलाड़ी आमने सामने होते हैं। बीच में एक जाली लगी रहती है। इनके बीच में एक शटल काॅक (चिड़िया) होती है। दोनों तरफ से खिलाड़ी चिड़िया को अपने रैकेट से मारते हैं। शटल काॅक जमीन पर गिरना नहीं चाहिए, गिरी तो फाउल। इस तरह चिड़िया इस पार से उस पार आती जाती रहती है। खेल में एक रेफ्री होता है जो स्कोर, फाउल वगैरह बताता है। खेल में कई सैट होते हैं। जो ज्यादा सैट जीतता है वो जीत जाता है। बैडमिन्टन एक मनोरंजक खेल है। इसमें शटल काॅक के अलावा सभी को बहुत मजा आता है।

                  बैडमिन्टन के खेल का महत्व बैडमिन्टन का खेल केवल अमीर लोग खेलते हैं। गरीब लोग देखने की औकात भी नहीं रखते। जब कोई गरीब अमीर हो जाता है तो वह सबसे पहले बैडमिन्टन खेलता है। जब कोई डिप्टी कलेक्टर, कलेक्टर बनता है तो वो रैकेट खरीदता है और क्लब जाकर बैडमिन्टन खेलता है। बैडमिन्टन खेलने से पता चलता है कि खिलाड़ी का समाज में क्या स्टेटस है। आम लोग क्रिकेट, फुटबाल, कबड्डी, खो खो जैसे गरीबों के खेल खेलते हैं। अमीर लोग लाॅन टेनिस, गोल्फ और बैडमिन्टन खेलते हैं। कमरे में बैठ के ब्रिज खेलते हैं। जब तक देश परतंत्र था तब तक नंगे भूखे लोग राजनीति का खेल खेला करते थे मगर जबसे भारत विकसित हो गया है अब राजनीति भी अमीरों का खेल है। गरीब और पढ़े लिखे का तो पर्चा भरना भी मंजूर नहीं है। महिला का तो बिलकुल भी नहीं। रेफ्री और सत्ता का खिलाड़ी एक तरफ है। रेफ्री ने कह दिया फाउल है। गरीब खिलाड़ी ने बड़े रेफ्री की ओर देखा। बड़े रेफ्री को सांप सूंघ गया। अभी तक बेहोश है। सर्वोच्च कोर्ट ने कहा कि हम बैडमिन्टन कोर्ट के रेफ्री को कुछ नहीं बोल सकते। वो सुप्रीम हैं। वो आदरणीय है। हम उनके सामने कहां लगते हैं। आगे देखो बाबा।

             न्याय का बैडमिन्टन न्यायालय और बैडमिन्टन में समानता के कारण न्यायालय को कोर्ट कहा जाता है। कोर्ट में एक ओर जज साहब और दूसरी ओर वकील साहब होते हैं। कभी कभी कोर्ट में दो जज बैठते हैं। बैडमिन्टन में इसे मैन्स डबल्स कहा जाता है। जब महिला और पुरूष मिलकर खेलते हैं तो उसे मिक्सड डबल्स कहते हैं। केस की सुनवाई में जज साहब और वकील साहब के बीच शटल काॅक दोनों ओर से शाॅट खाती रहती है। खिलाड़ी उसे गिरने नहीं देते। शाम को शटल काॅक को सहेज कर आलमारी में रख दिया जाता है। सालों तक जब ये खेल चलता है तो फिर शटल काॅक अपनी मौत आप मर जाती है।

                शटल काॅक न्यायालय की आलमारी में करोड़ों शटल काॅक जमा हैं। अपने खेले जाने का इंतजार कर रही हैं। कोर्ट बदलते हैं। खिलाड़ी बदलते जाते हैं मगर शटल काॅक नहीं बदलती। वो कुटती रहती है। शटल काॅक की नियति यही है। वो कुटेगी। हर कोर्ट में कुटेगी और खिलाड़ी खेलते रहेंगे।

           डोरीलाल जी अब अपना व्यंग्य रखिये अपनी जेब में और बताइये कि भारत के हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के जज साहबान और बड़े बड़े वकील साहबान लंदन जाकर (कानून और न्याय मंत्रालय के प्रायोजित सरकारी पैसे से और कार्पोरेट पूंजीपतियों के प्राईवेट पैसे से) बैडमिन्टन खेल रहे हैं तो इसमें पाप क्या है ? क्या उन्हें अमीर होते हुए भी बैडमिन्टन खेलने का हक नहीं ?

                 डोरीलाल ने कहा कि सरकार ने कहा है कि हमारे मंत्री जिनका नाम चीफ जस्टिस के साथ मुख्य अतिथि और उद्घाटनकर्ता के रूप में छपा है वो उस दिन बीकानेर में थे। जो फोटो वीडियो वगैरह दिखाये जा रहे हैं वो हैं असली लेकिन पुराने इवेंट के हैं। लंदन में फोटो खींचने की मनाही कर दी गई है। इवेंट के पोस्टर में प्रायोजक के रूप में न्याय व कानून मंत्रालय और कई कार्पोरेट्स के नाम लिखे हैं। इससे इन्कार नहीं किया गया है। जिनका नमक खाया जाएगा उनका बजाया जाएगा। 

               


जज और वकील साहबान लंदन जाकर बैडमिन्टन खेल कर पुरानी पड़ चुकी परंपराओं और अंधविश्वासों को तोड़ देना चाहते हैं। ये अंधविश्वास है कि जज, वकील और वादी प्रतिवादी आपस में मिल बैठकर ले देकर मामला नहीं निपटा सकते। कानूनी बहसों और कानूनी धाराओं, दृष्टांतों का समय जा चुका है। ये मत भूलिये पूरे विपक्ष को सस्पेंड करके हमने कानून की किताबें निर्विरोध बदली हैं। आज इस हाथ दे और उस हाथ ले वाली प्रेक्टिकल एप्रोच अनिवार्य हो गई है। आज सरकार सबसे बड़ी मुकदमेबाज है, कार्पोरेट के अरबों खरबों के मामले फंसे हैं। यदि जज, सरकार, कार्पोरेट सब आमने सामने बैठ जाएं। वकील साहबान बिचैलिए हैं ही, तो सालों का काम मिनटों में निपट सकता है। आखिर आज भी हो तो यही रहा है। पर्दे के पीछे सरकार खड़े होकर निर्णय बता देती है और अदालत निर्णय की घोषणा कर देती है। न्यायाधीशों के निर्णय एक औपचारिकता हो गए हैं। लंदन बैडमिंटन टूर्नामेंट के बाद उम्मीद है कि अब वकील को जज को केवल इतना बताना होगा कि मीलार्ड कल रात बात हो गई। सौदा तय हो गया है या सरकार ने आपसे ये निर्णय देने को कहा है।

            काम, क्रोध, लोभ, मोह और भय ये मनुष्य जाति में नैसर्गिक हैं। न्यायाधीश भी मनुष्य हैं। उसी तरह जैसे संसद सदस्य और विधायक भी मनुष्य हैं। उन्हें समाज से अलग काट कर ईमानदार और निष्पक्ष होने की उम्मीद रखना पाप है। लंदन में सरकार -कार्पोरेट-वकील-न्यायाधीश टूर्नामेंट भारत में सुलभ न्याय की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

जो कुछ करो, पूरी बेशर्मी से करो, खुल्लमखुल्ला करो।

डोरीलाल बैडमिन्टन प्रेमी 15.06.2026 See less

Wednesday, 3 June 2026

आपका क्या होगा जनाबे आली ?

      अपनी तो जैसे तैसे, थोड़ी ऐसे या वैसे, कट जाएगी, आपका क्या होगा जनाबे आली ?

          वो नाचे जा रहा था। उसने डोरीलाल को भी साथ ले लिया। हम दोनों नाचने लगे। मुझे लगा कि अभी सीबीएसई का रिजल्ट आया है इसका पोता पास हो गया होगा इसलिए नाच रहा है। मुझे उसकी खुशी  में खुश होना चाहिए सो मैं भी नाचने लगा। 

         थक जाने के बाद मैंने उससे पूछा कि भाई इस खुशी का कारण ? उसने बताया कि डोरीलाल अपन तो अब सत्तर पार हैं। अपन तो विकसित भारत नहीं देखेंगे। मगर जो लोग इस भरम में हैं कि केवल 20 साल की बात है। फिर विकसित भारत और हम सब खुशहाल। मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती। उनके लिए विकसित भारत के नमूने दिन रात दिख रहे हैं। अभी 22 लाख बच्चों की नीट की परीक्षा एक बार फिर निपट गई। फिर सीबीएसई का रिजल्ट आया तो 18 लाख बच्चों को उसमें निपटा दिया गया। मगर कोई गुस्सा नहीं। चारों तरफ सन्नाटा है। मां बाप बेचारे डरे हुए हैं, किसी तरह अपना बच्चा भर पढ़ जाए, उसकी नौकरी भर लग जाए।  

       सरकार ने कह दिया नीट की परीक्षा फिर से करवा देते हैं। इस बार फिर गड़बड़ हो गई कोई बात नहीं। सीबीएससी के बच्चों की कापी फिर से जंचवा देते हैं कोई बात नहीं। ये अपराधी ये किस जेम्स बांड की औलाद हैं जो इतनी बड़ी सुरक्षा को भेद जाते हैं ? पता चलता है कि ये नामालूम लोग पेपर सैटर हैं। इतने योग्य लोग सैटर बनाए गए हैं। पुणे में तो तीन मनीषा मिल गईं। ये पेपर सैटर ही पेपर लीक करते हैं। और ये अपराधी सब राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली में ही मिलते हैं जहां डबल इंजन की सरकार हैं। एक 16 साल के बच्चे ने ट्विटर पर लिख दिया कि मुझे जो मेरी कापी दिखाई गई है वो मेरी नहीं है। तो उसका कनेक्शन पाकिस्तान से ढूंढ लिया गया। जाॅजे सोरोस से ढूंढ लिया गया। ये कैसा देश है जो अपने देश के नौजवानों से इतनी घृणा करता है। 

          इन जैसे तमाम बच्चों के मां बापों ने ये सरकार चुनी है। बार बार चुनी है। मुझे पूरा भरोसा है कि 2047 तक तो बराबर चुनते रहेंगे। क्योंकि मुसलमान, बकरा, गाय, नमाज, भगवान राम तो तब भी रहेंगे। वोट भी इसी आधार पर देते रहना है। 2047 के बाद 2057 आ जाएगा। पहली आजादी की लड़ाई के दो सौ साल पूरे। तो दस साल और। जिनने न पहली आजादी की लड़ाई लड़ी न दूसरी आजादी की, वो आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। सही है इनके लिए आजादी तो लूट का उत्सव ही है। 

        डोरीलाल ने पूछा कि भई तुम नाच क्यों रहे थे ? मुझे भी नचा लिया पर कारण तो बताओ। उसने कहा देखो भाई अपनी तो कट गई। जब तक हमारे बस में रहा हमने लोकतंत्र को बचाया। भाईचारे को बचाया। घर बनाया। धंधा किया। नौकरी की। बच्चों को पढ़ाया लिखाया। काबिल बनाया। अब हमारे बच्चे जिम्मेदार हो गए। अब उनको नौकरी धंधा परिवार पालना है। अब उनको अपने बाल बच्चों को जवाब देना है कि ये क्या देश है जिसमें हमें तुमने पैदा किया है। ये कैसी सरकार है ? ये कैसा शासन है ? ये कैसा देश है जिसमें हम अपने घर में सुरक्षित नहीं हैं। देश के वैज्ञानिक, बुद्धिजीवी जेल में हैं। व्यापारी जेल में हैं। हर काबिल आदमी विदेश में जा बसता है। 

        हमारे बच्चे हमसे नहीं कह सकते कि तुमने कैसा देश बनाया ? हमने तो देश को सम्हाल कर रखा। कारखाने बनाए। स्कूल काॅलेज बनाए। अस्पताल बनाए। घर बनाए। हंसी खुशी पूरा देश होली दीवाली ईद और क्रिसमस त्यौहार मनाता था। एक दूसरे को गले लगाता था। जनगणमन गाता था। रेडियो में मुहम्मद रफी और लता मंगेशकर के गाने सुनता था। मगर अब हमारे बच्चों के बच्चे अपने मां बाप से पूछ रहे हैं कि पापा मम्मी तुम लोगों ने देश का क्या हाल कर दिया है। ये कैसी सरकार बनाई है तुम लोगों ने जो तुम्हारी सुनती नहीं। हमारी परीक्षाएं नहीं हो रही हैं। पेपर आउट हो रहे हैं। हमें नौकरी नहीं मिल रहीं। सड़क पर हम सुरक्षित नहीं हैं। पूरे समय लड़ाई दंगे की बातें होती हैं। चारों तरफ नफरत ही नफरत है। हमें इस देश में क्यों पैदा किया गया है ? ये कैसी सरकार है जो हमें देश में पैदा होने के बावजूद नागरिक नहीं मानती ? 

        भारत की जनता धर्मप्राण है। इसे लूट लो। उफ नहीं करेगी। धीरे धीरे जनता को समझ आ गया है कि अब सरकार को जनता की जरूरत नहीं रही। सरकार ने अपनी जनता चुन ली है। अभी बड़े न्यायालय के बड़े न्यायाधीशों ने भी कह दिया कि भारत में सरकार को जनता चुनने का अधिकार है। बड़ी आस लगाए थे लोग कि बड़े न्यायाधीश तो मान जाएंगे कह देंगे कि जनता को सरकार चुनने का अधिकार है। अब मिल गया बाबाजी का ठुल्लू। अब ये तय हो गया है कि वही वोटर होगा जो सरकारी पार्टी को वोट देगा। बाकी को वोट देने का अधिकार खत्म। 

        हम जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं। हम जहरीला पानी पी रहे हैं। वो भी धरती से खत्म होता जा रहा है। हम जहरीली सब्जी और जहरीला अनाज खा रहे हैं। हम मंहगा इलाज करवा रहे हैं। हम मंहगा बीमा करवा रहे हैं। देश में नौकरी खत्म हो चुकी हैं। शिक्षा के लिए हर कोई विदेश भाग रहा है। अमीर गरीब के अंतर ने रिकाॅर्ड तोड़ दिया है। देश की सारी संपत्ति देश के कुछ अमीरों के पास जमा है। आम आदमी के लिए आमदनी घट रही है और मंहगाई बढ़ रही है। देश के अधिकांश लोग दस हजार रूपये कमाते हैं। 85 करोड़ मुफ्त का राशन पाते हैं। उनसे कहा गया है कि सोना मत खरीदना। हवाई जहाज में मत बैठना। 

      इस देश के नागरिक का कितना मजाक और बनाया जाएगा ?


डोरीलाल मजाक प्रेमी

31 05 2026

Thursday, 21 May 2026

परीक्षा पर चर्चा

 


छात्र बहुत गुस्से में था। बोला बताइये डोरीलाल जी परीक्षा पर चर्चा क्यों नहीं हो रही ?

मैंने कहा कि ये तुम कैसी बात कर रहे हो ? आजकल परीक्षा पर ही चर्चा हो रही है। 22 लाख छात्रों की परीक्षा पर चर्चा हो रही है। तुम्हें पता नहीं चल रहा क्योंकि भारत एक आध्यात्मिक देश है। हमें इस जन्म की चिन्ता है ही नहीं। हमें इस जीवन से मुक्ति चाहिए। हमें स्वर्ग में जाना है। भगवान कृष्ण ने गीता में कहा है ....

देखिये मि डोरीलाल ये झांसा देने बंद कीजिए। मेरे एक हाथ में जूता भी है। और वो चल भी सकता है। मुझे ये बताइये कि नीट की परीक्षा का पेपर लीक कैसे हुआ ? बिल्कुल यहां वहां की न बताइयेगा ? मेरे से कुछ गलत हो जाएगा फिर मत कहियेगा।

मैंने उसे समझाया कि नीट का पेपर कोई पहली बार लीक नहीं हुआ है। बार बार हुआ है। और भविष्य में भी होगा। संसद में नेता प्रतिपक्ष ने पेपर लीक का मामला उठाया है। 90 बार पेपर लीक हो चुके हैं। पेपर लीक से परेशान छात्र और उनके मां बाप सब दुखी हैं। पर कोई गुस्सा नहीं है। कुछ लोग पकड़े गए हैं। वो सत्ताधारी दल से जुड़े हैं ये खबर हैै। आंदोलन कांग्रेस के लोग कर रहे हैं। मगर बाकी कोई नहीं कर रहा है। खुद जो बच्चे और उनके मां बाप सीधे प्रभावित हैं चुप हैं। इसलिए अभी जूता नहीं चलेगा। तुम अपना जूता पहन लो।

इस देश की विडंबना ये है कि अनपढ़ आदमी बच्चों को शिक्षा देता है कि परीक्षा कैसे दें। परीक्षा पर चर्चा करता है। शिक्षा मंत्री कहता है उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं। एक देश एक परीक्षा के नाम पर एनटीए नेशनल टेस्ट एजेंसी बनाई है। ये सरकार ने बनाई है। जिसमें कोई परमानेंट कर्मचारी नहीं है। इसमें पेपर कौन बनाता है उसकी योग्यता क्या है किसी को नहीं मालूम। अब ये सच सामने आया है कि जो पेपर बनाता है वही पेपर लीक करता है। इतने योग्य लोग नीट का भार सम्हाले हैं। इनकी यही योग्यता है। एन टी ए ने पिछले साल साढ़े चार सौ करोड़ का मुनाफा कमाया है। यह एक रजिस्टर्ड सोसायटी है जिसकी किसी के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं है। ये अजब सरकार देश चला रही है जो ऐसी एजेंसी बनाती है जो सरकार, जनता, अदालत किसी के प्रति जिम्मेदार नहीं है। ये नीट की परीक्षा ले रही है। इंस्टाग्राम पर विज्ञापन दे रही थी जैसे साबुन बेच रही हो। फिर पेपर हो गया। फिर पेपर लीक की खबर आ गई। फिर पेपर रद्द हो गया। अब 21 जून को पेपर होगा।

एनटीए के अध्यक्ष प्रदीप कुमार जोशी हैं। इन पर लगातार सरकार की कृपा बरस रही है। ये म प्र पी एस सी के चेयरमैन रहे। यूपीएससी के चेयरमैन रहे। अब एनटीए के चेयरमैन हैं। इनकी एकमात्र योग्यता यह है कि ये नागपुर से सर्टिफाइड हैं। इसलिए छुट्टा घूम रहे हैं। इनका बाल बांका नहीं होगा। अंधेर नगरी चैपट राजा।

22 लाख बच्चे ये चाहते हैं कि वो डाक्टर बनें। उसके लिए वो लाखों रूपये कोचिंग में खर्च करते हैं। मेडिकल काॅलेज में भर्ती हो जाने पर लाखों रूपये हर साल फीस भरते हैं। करोड़ों रूपये डोनेशन में देते हैं। पैसे वाले प्राइवेट मेडिकल काॅलेज में बच्चों को पढ़ाते हैं। जब करोड़ों रूपये खर्च करके बच्चा डाक्टर बनेगा तो वो अपनी लागत वसूलेगा कि इलाज करेगा ? और करे भी क्यों ? हर धंधे में आदमी पैसा इसलिए लगाता है कि मुनाफा कमाया जाएगा। लाखों रूपये में लीक पेपर कौन खरीदता है ? वही जो करोड़ों रूपये की लागत लगाने को तैयार होता है। आज की तारीख में किसी गरीब का बच्चा डाक्टर नहीं बन सकता।

कितनी आसानी से बोल दिया कि परीक्षा रद्द की जाती है। अगली डेट 21 जून रहेगी। बच्चों एक बार फिर तैयारी में जुट जाओ। दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा। पेपर लीक पूरी तरह से सनातन धर्म का मामला रहा। एक भी विधर्मी शामिल नहीं है। पाकिस्तान कनेक्शन नहीं है। रोज मास्टर माइंड पकड़े जा रहे हैं। सब तिलक टीका लगाए हैं। आजकल ये संकेत है कि समझ लो हम कौन हैं। किस पार्टी के हैं। हमसे उलझे तो निपटा दिए जाओगे। कितने आसानी से चुपचाप पकड़े जा रहे हैं। न कोई साइरन बज रहा है न पुलिस के जत्थे और न माननीय आरोपी जी कहीं कोर्ट के अंदर दौड़ रहे हैं। पूरे देश में अपूर्व शांति और ठंडक है।

डोरीलाल के मन में एक प्रश्न है। क्या नीट का पेपर फिर एक बार लीक होना और 22 लाख बच्चों के जीवन से खेलना कोई ऐसा मुद्दा नहीं है जिसमें सत्ताधारी पार्टी के नेता कार्यकर्ता कुछ बोलें। नागपुर हेडक्वार्टर से कुछ कहा जाए। चलो केवल हिन्दुओं के लिए ही कुछ कह दो। चलो कांग्रेस को दोषी बता दो। चलो राहुल गांधी को भला बुरा कह दो। कुछ तो करो। 21 राज्यों और केन्द्र में चतुर्दिक तुम्हारी पताका लहरा रही है। पुतला दहन करो। पेपर लीक करने वालों को, जूता मारो सालों को जैसा कुछ नारा लगाओ। कहीं बुलडोजर चलवा दो। किसी को पीट दो। किसी के मुंह में कालिख पोत दें। महात्मा लोग और धर्माचार्य लोग दोषियों को श्राप दें। उन्हें अपनी क्रोधाग्नि से भस्म कर दें। यज्ञ हवन कर दें। ज्योतिषी बता दें कि ये 22 लाख लोगों की ग्रह दशा में कौन सा अमंगल आ गया कि दी हुई परीक्षा रद्द हो गई। अब क्या उपचार करें ? काली गाय को उड़द की दाल मंगलवार को खिलायें ताकि इस बार पेपर लीक न हो।

अंत में डोरीलाल की भुक्तभोगियों से प्रार्थना है कुछ तो बोलो। परीक्षा देने वाले बच्चों समझो तो कि तुम्हारे भविष्य से कौन खिलवाड़ कर रहा है ? ऐसी पढाई करके कैसे इंसान बनोगे जब तुम्हारे जीवन को नष्ट करने वालों को ही पहचान न पाओगे ? बच्चों और बच्चों के मां बापों तुम तो वोटर भी हो। जो अन्याय का विरोध नहीं करता वो पापी होता है याद रखो। कम से कम अपने दुश्मन को पहचानना तो सीखो। यदि तुम चुप हो। यदि तुम पेपर लीक करने वालों और उसके पीछे छिपे राजनीतिज्ञों को नहीं पहचान पा रहे हो तो फिर तुम इसी लायक हो। तुम्हारे साथ हमेशा यही होगा।

डाक्टर चाहे जैसा बन जाए, इंसान वो कैसा बनेगा सवाल तो ये है।

डोरीलाल परीक्षाप्रेमी 

20 05 2026 

Thursday, 30 April 2026

लोकतंत्र को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि

           डोरीलाल जी सात लोग आम से खास हो गए। आपको पता चला ? बिलकुल पता चला। इस देश में अब यही तो समाचार है। मुख्यधारा में शामिल होना ही आज की धारा है। पर आपको ये पता नहीं होगा कि जो सात राज्यसभा सांसद लोग आम आदमी पार्टी से खास आदमी पार्टी में गए हैं उनकी हैसियत क्या है ? उनकी हैसियत ये है कि वो अमीर लोग हैं। ये कुकर्म अमीरों को ही शोभा देता है।

            कितने अमीर ?

             ये नहीं मालूम भाई पर अमीर तो होंगे। तभी तो अमीरों की पार्टी में गए हैं। नाम भले ही आम आदमी पार्टी हो मगर उसका सांसद तो अमीर ही होगा। गरीब आदमी को, पढ़े लिखे को कोई क्यों सांसद बनाएगा ? उससे पार्टी को क्या फायदा ? नमूने के लिए कुछ गरीब सांसद बनाना पड़ते हैं। तो बनाते हैं। वो रिंग मास्टर के कहने पर मेज थपथपाते हैं और साहब के सामने कोर्निश बजाते हैं। अमीर आदमी अमीर आदमी होता है। वो मंहगे में बिकता है या फोकट में बिकता है। सस्ते में नहीं बिकता। जब फोकट में बिकता है तो डर के मारे बिकता है।

           कांग्रेस के प्रवक्ता ने अपनी प्रेस कान्फ्रेंस करके बताया है कि इन सातों की औसत कुल सम्पत्ति ( एवरेज नैट वर्थ) 818 (आठ सौ अठारह) करोड़ रूपया है। ये आम आदमी के सांसद थे। ये व्यापारी हैं, खिलाड़ी हैं, प्रोफेशनल हैं। पंजाब के आम आदमी पार्टी के 90 विधायकों ने यदि इन्हें न चुना होता तो ये सांसद न होते। इन्हें अपनी पार्टी से दगा करते शर्म न आई। 

            डोरीलाल जी ये बताइये कि इन लोगों ने पार्टी बदल ली इससे आपको क्या शिक्षा मिलती है ? 

            खूब पढ़ा लिखा होने से, अच्छी अंग्रेजी बोलने से, गौर वर्ण होने से, ऊंची जाति का होने से और खूब पैसे वाला हो जाने से आदमी ऊंचा नहीं हो जाता है। उसके कर्मों से वह उसकी उच्चता या नीचता तय होती है। जिनने उसे चुना, उंचाई तक पंहुचाया, उनसे जिसने दगाबाजी की वो नीच ही कहलाएगा।

            देश में अमृतकाल चल रहा है। सब कुछ खुल्लमखुल्ला हो रहा है। सबके पूरे कपड़े उतर चुके हैं। पूर्ण दिगंबर अवस्था। सत्ता के साथ सब हैं। जनता के साथ कोई नहीं है। न्याय की मूर्तियां भग्नावस्था में पड़ी हैं। न्याय की मूर्तियों को अन्याय करते हुए बिलकुल शर्म नहीं आती। वकील तर्क देकर थक चुके हैं, वकालत छोड़ रहे हैं। अदालत में केस लगते ही पता चल जाता है कि जज कौन होगा और निर्णय क्या होगा ? जज अपने खिलाफ मुकदमा खुद सुनते हैं और अपने को निर्दोष मुक्त करते हैं। अब राजतंत्र वापस आ गया है। पूरा देश छोटे छोटे राजाओं के सूबों मंे बदल गया है। हर सूबे के राजा की अपनी सेना है। चाहे जब एक राजा की सेना दूसरे राजा के प्रदेश में घुसकर छापा मारती है और नागरिक को रातोंरात अगवा कर अपने राजा के सामने पेश कर देती है।

            अब दिल्ली का बादशाह तय करता है कि उसे कौन सा राज्य जीतना है। वो अपनी अक्षौहणी सेना लेकर टूट पड़ता है। वो फतह करके ही लौटता है। इस बार बंगाल राज्य जीतना तय किया गया है। सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग, हाई कोर्ट पूरे देश की पुलिस, तरह तरह की अर्ध सैनिक बल, एनआईए, सीआरपीएफ, बीएसएफ बख्तरबंद गाड़ियों और मशीनगनों, एके 47 आदि से लैस कर बंगाल के सूबे पर हमला किया गया है। पता नहीं क्यांे टैंक और फाइटर जैट का उपयोग नहीं किया गया। बंगाल तो समुद्र किनारे है। वहां तो नौसेना ही नहीं बल्कि अमेरिका के जार्ज वाशिंगटन, अब्राहम लिंकन जैसे जहाजों को भी लगाया जा सकता है। वोटिंग होना है। कोई मजाक है ? पूरे देश से छंटे हुए पुलिस अधिकारी, आई ए एस बुलाए गए। लाखों वर्दी धारी पूरे प्रदेश में गांव गांव तक छा गए। पूरा प्रदेश छावनी बना दिया गया। चारों ओर वोटरों को दौड़ा दौड़ा कर, लाठियों से पीट पीट कर शांतिपूर्ण मतदान करवाया गया। लुंगी और पेंट से पहचान की गई। 

            तृणमूल की चुनाव सलाहकार कंपनी आईपैक के यहां छापा मारा गया। न्यायमूर्तियां अभी भी रेशा रेशा अलग कर रही हैं कि ममता बनर्जी ने ईडी की चाल क्यों फेल की ? उन्हें क्या हक ? उसी कंपनी के संस्थापक को चुनाव से पहले गिरफ्तार कर लिया गया और चुनाव खत्म होते ही सुबह बिना किसी विरोध के निचली अदालत ने ही छोड़ दिया। शाम को मजिस्ट्रेट को आत्मज्ञान हुआ। उसने कहा गलती से छोड़ दिया। अंदर करो। धन्य है न्याय की देवी। 90 लाख वोटरों के नाम काट दिए गए। 27 लाख लोगों ने सारे कागज जमा कर दिए तो भी वोट देने के काबिल नहीं माने गए। बड़ी कोर्ट कहती है कि इस बार नहीं तो अगले बार वोट दे देना। फिर वोट की गिनती की भी क्या जरूरत ? फिर चुनाव की जरूरत ही क्या है ? जब 27 लाख वोटर वोट नहीं डाल सकते तो लाख पचास हजार की हार जीत का भी क्या मायने है। पहले वोटर सरकार चुनते थे। अब सरकार वोटर चुन रही है। पूरा चुनाव सत्ता का एक क्रूर हिंसक नग्न नृत्य है। 

            इस समय भाजपा का अश्वमेघ यज्ञ चल रहा है। पिछले दोे चुनावों से भाजपा का घोड़ा बंगाल में घुस रहा है। सब राज्यों ने घुटने टेक दिए। बचे हुए राज्य भी देर सबेर घुटने टेक देंगे। भाजपा के पास चुनाव जीतने का फार्मूला, पैसा और मशीनरी सब है। डोरीलाल की इच्छा है कि भाजपा ये सभी चुनाव जीत जाए। रोज रोज का टंटा खत्म हो। राजतंत्र में चुनाव की जरूरत क्या है। जब अंग्रेजों ने एक के बाद एक युद्ध जीतकर पूरे भारत पर कब्जा कर लिया उसके बाद आराम से दो सौ साल भारत को लूटा। आप लोग भी पूरा भारत जीत लें फिर आराम से लूटें। 

            वो देश का चुनाव जीत रहे हैं। मगर देश के साम्प्रदायिक बंटवारे और गरीबी से पूरा देश हार रहा है।

           आईये प्रार्थना सभा करें। लोकतंत्र को श्रद्धांजलि अर्पित करें। 

डोरीलाल चुनाव प्रेमी

30 04 2026



Tuesday, 14 April 2026

मदरलैंड, फादरलैंड

वो लगातार अपने आप को जूते मारे जा रहा था। कभी अपने मुंह पर मारता, कभी अपनी पीठ पर घुमा कर मारता। मारे ही जा रहा था। कभी पेट पर मारता। कभी पैरों पर दनादन जूते मारता। वो बड़बड़ा रहा था। ले और जूते खा। और खा। अब चैन पड़ा ? और खायेगा ?
उसकी बेचैनी देखकर डोरीलाल हतप्रभ रह गया। जूते खाने की ऐसी बेताबी देखकर डोरीलाल का मन विचलित हो गया। अरे भाई वाह। क्या बात है। मैंने उससे पूछा कि भई ये बताओ कि क्यों मार रहे हो अपने आपको जूते। उसने कहा तीन दिन हो गए मुझे जूते नहीं पड़े। हर रोज जूते खाते खाते ऐसी आदत पड़ गई है कि दो तीन दिन जूते न पड़ें तो एक भूख सी लग जाती है, एक प्यास सी लग जाती है लगता है कि कोई इस पीड़ा से मुक्ति दिला दे। 25-50 नहीं तो 2-4 ही मार दे मगर मार दे। ये भूख अब सही नहीं जाती। दिल बेताब हुआ पड़ा है। कोई तो मुझे जूते मारो।
मैंने उससे कहा कि तुम्हारी बात मुझे जंच नहीं रही है। ये बताओ कि कोई तुम्हें जूते क्यों मारेगा ? आखिर तुम भारतीय नागरिक हो। हमारा इतिहास धरती में होमो सेपियंस के आने से भी पुराना है। हम धरती पर विकसित नहीं हुए हैं हमने धरती पर सीधे अवतार लिया है। पूर्ण विकसित रूप में। हम डार्विन को नहीं मानते। हमें जूते कोई क्यों मारेगा ? बल्कि हम मारेंगे जूते। हमारी परंपरा बहुत पुरानी है। ये ऋषियों मुनियों की पावन भूमि है। हम उस देश के वासी हैं जिस देश में गंगा बहती हैं। हमारे देश में हर नदी पवित्र है। हर पहाड़ पवित्र है। हमारे यहां पवित्र से नीचे कुछ है ही नहीं। हमारे देश की परंपराएं महान हैं। हम स्वयं बहुत महान हैं। भारत वर्ष हमारी मातृभूमि है।
मातृभूमि ? यह सुनते ही वह फिर अपने आपको जूते मारने लगा। मातृभूमि का नाम नहीं लेना। पूरी दुनिया हम पर हंस रही है। पूरी दुनिया में हमें जूते पड़ रहे हैं। लोग न जाने भारत के बारे में क्या क्या कह रहे हैं ? डोरीलाल ने उसे बहुत मुश्किल से शांत कराया। उससे पूछा कि भाई बात क्या हो गई ? उसने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री इजरायल, ईरान, अमेरिका के युद्ध के पहले इजरायल गये थे। वहां की संसद में उनको एक मैडल देकर सम्मान किया गया। वो खास तौर पर उन्हीं के लिए बनवाया गया था। इजरायली संसद में हमारे प्रधानमंत्री ने भाषण दिया। खूब तालियां बजीं। खूब मेज थप थपायी गयीं। महामहिम जोश में आ गये। बोले इजरायल और भारत की दोस्ती अजर अमर है। हमें कोई अलग नहीं कर सकता। इंडिया इज अवर मदर लैंड एंड इजरायल इज अवर फादरलैंड। अब इजरायल हमारी पितृभूमि हो गई। ये आदमी हमें कहीं का नहीं छोड़ेगा। अब मैं अपने आपको जूते न मारूं तो क्या करूं ?
डोरीलाल ने उसे समझाया। देखो एहसान चुकाने के जोश में ऐसा हो जाता है। फिर तुम्हें सोचना चाहिए कि अभी तो साहब की सत्ता को बारह साल ही गुजरे हैं। अभी तो 2047 तक पच्चीस साल कैसे गुजरेंगे पता ही नहीं है। कुछ भी हो सकता है। हम लोग अभी अविकसित हैं। अभी तो पितृभूमि का पता चला है। अभी तो न जाने तुम्हारे कितने भाई बहन निकल आएंगे। वसुधैव कुटुम्बकम क्यों कहा जाता है ? पूरी पृथ्वी हमारा कुटुम्ब है। अब एक बार फादरलैंड का पता चल गया है तो अब भाई बहन, मामा, चाचा सब मिल जाएंगे।
इस बार वो गंभीर हो गया। वो बोला डोरीलाल न ये बात मजाक की है और न ये देश मजाक की चीज है। मगर भारतवासी पूरी दुनिया में मजाक की चीज बना दिए गए हैं। हमारी दौ कौड़ी की औकात कर दी है। देश में इतना हिन्दू मुस्लिम कर दिया गया है कि पचासों साल लग जाएंगे इस नफरत को मिटाने में। आज हमारे देश में हर त्यौहार हंसी खुशी की जगह एक खौफ़ और शक लेकर आता है। सचाई ये है कि एक करोड़ भारतीय मुस्लिम देशों में नौकरी कर रहे हैं। वहां वो अमन चैन से हैं। जब देश में हिन्दु मुस्लिम हिन्दु ईसाई होता है, जब देश में नफरत फैलाकर वोट की फसल काटी जाती है तो पूरी दुनिया में फैले भारतीय लोग मुसीबत में पड़ते हैं। उनको शक से देखा जाता है। उन पर हमले होते हैं।
ईरान इजरायल लड़ाई से पूरी दुनिया में नए संबंध बन रहे हैं। पुराने बदल रहे हैं। मगर हमारी कोई पूछ नहीं है। क्योंकि लड़ाई के पहले ही हम खुलकर इजरायल के साथ खड़े हैं। मेडल ले लिया। फादरलैंड बना लिया। हम हत्यारों के साथ खड़े हैं। पूरी दुनिया के लोगों की सहानुभूति ईरान के साथ है। भारतवासी ईरान के साथ हैं लेकिन माई फ्रेंड डोलांड ट्रम्प के चक्कर में हमारी हालत अमेरिका इजरायल के दरबान की हो गई है।
आजादी के बाद कितनी सरकारें आई गईं, मगर भारत की नीति आत्मसम्मान और गलत को गलत कहने की रही है। कभी समझौता नहीं किया। भारत विकासशील देश है। मगर उसने कभी विकसित देशों के सामने घुटने नहीं टेके और आज हालत ये है कि अमेरिका हमें एक महीने के लिए रूस से तेल खरीदने की ’परमीशन’ दे रहा है। यूरोप के सारे देश अमेरिका से अलग खड़े हो गए मगर हम तो ट्रेड डील करके बैठे हैं।
अचानक वो रूका और उसने कहा डोरीलाल अब मुझे तुम जूते मारने से मत रोकना। मैं अपने आपको ही तो जूते मार रहा हूं। मगर तुम बताओ कि इस देश के चुनाव आयोग के लिए मैं अपने आपको जूते मारूं या न मारूं। इस देश में न्याय व्यवस्था के लिए अपने आपको जूते मारूं या न मारूं। किसान बिल, लेबर कोड, नोटबंदी, पी एम केयर फंड वाली सरकार के लिए, अपने देश के मजदूरों किसानों के लिए अपने आपको जूते मारूं या न मारूं। बढ़ती मंहगाई, भयानक बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था के बावजूद चुप जनता के लिए अपने आपको जूते मारूं या न मारूं ?
मैंने कहा कि अभी जनता अयोध्या, वैष्णोदेवी, महाकाल, चारों धाम, बदरीनाथ केदारनाथ, सबरीमला, कामाख्या, के लिए चलाई गई स्पेशल ट्रेनों में घूम रही है। उसे मत छेड़ो। वो बहुत खुश है। वो अभी भी नशे में है।
मैं जानता था कि वो अपने को जूते मारता थक जाएगा। मगर कुछ नहीं बदलेगा। अब हमें जूते खाने की आदत हो गई है। अब हमें उसमें मजा आता है। गर्व होता है।
डोरीलाल जूता प्रेमी
14 04 2026

Sunday, 15 March 2026

नंगत्व

  अब देश में सामान्य क्रिया कलाप संभव नहीं रहे। पूरे समय उत्तेजना जरूरी है। देश को आदत पड़ चुकी है। पेट की बात नहीं सुनेंगे मगर मन की बात सुनेंगे। सब कुछ मेगा चाहिए। अब आरती नहीं होती, महाआरती होती है। अन्तर्राट्रीय मेगा सम्मिट चाहिए। इस सम्मिट में 8-9 लड़कों ने शर्ट टी शर्ट उतारकर नारेबाजी कर दी। वो लोग इंडिया यूएस ट्रेड डील का विरोध कर रहे थे। पुलिस तत्काल एक्शन में आई और लड़कों को तरह तरह से पकड़ा गया। और प्रधानमंत्री ने अपने पद के अनुरूप एक भाषण इस विषय पर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेसी तो शुरू से ही नंगे हैं। शायद वे महात्मा गांधी पर व्यंग्य कर रहे थे। 

 

कांग्रेस के बारे में ऐसा खुलासा वो कर रहा है जो रोज दिन में तीन बार कपड़े बदलता है। जो अन्तर्राष्ट्रीय समिट में पूरा पंडाल खाली कराके अकेले अकड़ के साथ चलते हुए फोटो शूट कराता है। वो कांग्रेसियों को नंगा कहे इसमें कोई आश्चर्य नहीं। राजा में कुछ ज्यादा ही एहसासे कमतरी है। वो पढ़ा लिखा नहीं है तो वो सबसे ज्यादा पढ़ा लिखा विद्वान दिखना चाहता है। उसे असाधारण दिखने की बेताबी है। वो लाखों रूपये के चश्मे, पैन, घड़ी पहनता है। वो दस लाख का अपने नाम के कपड़े का सूट पहनता है। वो करोड़ों रूपये की कार में घूमता है। उसने हजारों करोड़ के विमान खरीदे हैं। उसने बताया कि कांग्रेसी नंगे हैं।

इस खुलासे से एक नई बहस छिड़ गई है। कौन कौन नंगा है। नंगपन आखिर होता क्या है ? निर्वस्त्र को नंगा कहना बहुत ही सतही बात है। नंगा होना एक भौतिक अवस्था मात्र नहीं है। नंगपन एक प्रवृत्ति का नाम भी तो है। नंगई करना हरेक के बस की बात नहीं है। नंगत्व में नंगई का पूरा दर्शन समाहित है। 

नंगा काफी नंगा टाइप का शब्द है। डोरीलाल को ऐसा शब्द मिला नहीं जो नंगपन की विराटता को पूरी तरह व्यक्त कर सके। नंगपन नंगपन ही है। न उससे ज्यादा न उससे कम। नंगपन मनुष्य का गुण है। जहां जहां आदमजात है वहां वहां नंगपन है। देश और दुनिया में नंगत्व का महत्व स्वीकार कर लिया गया है। हमारे देश में हमने नंगत्व के शिखर को छू लिया है। हम सर्वश्रेष्ठ हैं। हमारे यहां नग्नता की पूजा होती है। किसी भी नंगे को देखकर हम सहज ही प्रभावित हो जाते हैं। तत्काल उसके नारे लगाने लगते हैं। उसे देखने मात्र के लिए उमड़ पड़ते हैं। भगदड़ मच जाती है। नंगा - नंगा का शोर मच जाता है। नंगा दूसरों को नंगा कहता है। 

नंगत्व अब हमारी पहचान है। नंगापन अब हमारे समाज में दूध में पानी की तरह घुल गया है। नंगपन का असर अब हमारे सर चढ़ कर बोलने लगा है। नंगों से तो खुदा भी डरता है। आम आदमी हर जगह डरा हुआ है। देश की जनता को अब कपडे़ पहने आदमी में खोट दिखाई पड़ता है। वो नंगा क्यां नहीं है। फलां आदमी देश नहीं चला पायेगा। क्यों ? क्योंकि वो नंगा नहीं है। नंगा चाहे देश बेच दे, मगर राष्ट्र के लिए वही जरूरी है। वही राष्ट्र की सीमाओं को सुरक्षित रख सकता है। दुनिया में डंका बजा सकता है। देश को चलाने के लिए नंगत्व को अंगीकार करना ही होगा।

नंगपन इतना आदरणीय हो जाएगा यह कभी सोचा न था। अब नंगों का समाज में सम्मान है। वो समाज का नेतृत्व करते हैं। वो मार्गदर्शन करते हैं। वो राष्ट्र निर्माण में अपने योगदान की चर्चा करते हैं। कहते हैं उनके नंगपन के कारण ही आज देश और दुनिया यहां तक पंहुची है। यदि कोई नंगा किसी के कपड़े उतार दे तो ये नया नंगा उसका आभार व्यक्त करता है। बड़ी कृपा की प्रभु मुझे अपनी बिरादरी में शामिल कर लिया। नंगत्व ने देश में नंगों को ऐसा सुरक्षा कवच दिया है कि अब देश में कपड़े वाले दिखाई ही नहीं देते। चारों ओर नंगे ही नंगे। उन्हीं का राज दिखाई देता है। कपड़े पहने आदमी डरा हुआ है। कब कौन नंगा उसके कपड़े झपट ले। 

              नंगे अब सशस्त्र हैं। उनके शस्त्र हैं पुलिस, ईडी, सीबीआई, नारकोटिक्स, चुनाव आयोग, इन्कम टैक्स, जीएसटी और न्यायालय। इस नंगपन को देखकर एक बड़े वकील ने वकालत छोड़ दी। उसने कहा कि अब न्याय की कोई उम्मीद इस देश में नहीं की जा सकती। उसका प्रतिवाद किसी नंगे ने नहीं किया। पुल गिर रहे हैं, घरों को बुलडोजर से गिराया जा रहा है, सालों तक निर्दाष लोगों को जेल में रखा जा रहा है न सजा दी जा रही है न मुकदमा चल रहा है और न जमानत दी जा रही है। 20-25 सालों जेल में रखने के बाद निर्दोष बरी कर दिया जाता है। चाहे जिस राजनेता को निराधार आरोपों में जेल में डाल दिया जाता है। झूठे मुकदमे लगाए जा रहे हैं। अपराधी आजाद है और पीड़ित जेल में है। पत्रकारों को जेल में डाला जा रहा है। कोई सुनवाई नहीं। जज का नाम पढ़कर मुकदमे का निर्णय बताया जा रहा है। 

                 चुनाव में वोटर वोट चाहे जिसको दे जीतेगा नंगा ही। इतनी अच्छी तकनीक विकसित कर ली गई है। पूरे नंगपन से बिहार में दस दस हजार चुनाव के दिन खातों में डालकर वोट खरीदे गए और सब चुप हैं। कपड़े पहने लोगों को चुप रहने की आदत पड़ गई है। अखबार पढ़ने का कोई माइने नहीं रहा। उसमें खबर गायब है। केवल स्तुति है। जिन्होंने आजादी की लड़ाई लड़ी, जेल गए, देश को आजाद कराया, संविधान बनाया, संवैधानिक परंपराएं बनाईं वो आज अपराधी बना दिए गए हैं। लाखों पेड़ काटकर नंगे मां के नाम का एक पौधा लगा रहे हैं। 

                 अन्तर्राष्ट्रीय नंगपन का स्केल अलग है। एपस्टीन फाइल ने बताया कि मनुष्य कितना नंगा हो सकता है और वो कितना नीच हो सकता है। पूरी दुनिया में नंगों का सशक्त गिरोह है। सम्पूर्ण मनुष्य जाति का भूत भविष्य वर्तमान नंगों के हाथों में है। 

                   देश में करोड़ों लोग रोटी, कपड़ा मकान से महरूम हैं मगर लोगों का पेट भरने, रोजगार देने की जगह ये लोग इस बहस में लगे हैं कि नंगा कौन है ? 
क्या नंगई है।

डोरीलाल नंगत्व प्रेमी
14 03 2026

Sunday, 15 February 2026

जेबकतरा

 

डोरीलाल से एक व्यक्ति मिला। वो बहुत प्रसन्न था। उसने बताया कि अभी अभी उसकी जेब कट गई है। इसलिए बहुत खुश है। उसने बताया कि उसकी रोज जेब कटती है। आज सुबह से नहीं कटी थी तो वह बहुत चिन्तित था मगर दोपहर तक कट गई तो अब उसने चैन की सांस ली है। उसने बताया कि पिछले कई वर्षों से उसे जेब कटवाने की आदत पड़ गई है और जिस दिन जेब नहीं कटती वो बैचेन हो उठता है। उसके अच्छे स्वास्थ्य और खुश रहने का राज है रोज जेब कटवाना। उसकी जेबकतरे से लगन लग गई है।

  डोरीलाल को भरोसा नहीं हुआ। मैंने पूछा कि ये क्या बात हुई ? ऐसा कैसे हो सकता है। जिस बात पर तुम्हें गुस्सा आना चाहिए, उस पर तुम खुश हो रहे हो ? उसने कहा शास्त्रों में कहा गया है कि क्रोध पाप का मूल है और पाप मूल अभिमान। तो मुझे किसी बात पर गुस्सा नहीं आता। अब वैसे भी मेरी चिन्ता जीवन जीना नहीं है। जीवन से पीछा छुड़ाना है। मुझे मोक्ष चाहिए। मुझे मुक्ति चाहिए। मैं ऐसी जगह जाना चाहता हूं जहां कोई जेबकतरा न हो। 

मैंने कहा कि तुमने अपने रोग की पहचान में गलती की है। तुम अपने को दोषी मान रहे हो जबकि तुम्हारी इस हालत का जिम्मेदार तो जेबकतरा है। तुम जेबकतरे की गर्दन नापने के बजाए अपनी गर्दन नापने की सोच रहे हो। ये ठीक नहीं है। क्या तुम जेबकतरे को पहचानते हो ?

उसने कहा - बिल्कुल पहचानता हूं। मैं ही क्या हर कोई उसे पहचानता है। वो खुद भी अपनी पहचान बताने में कभी संकोच नहीं करता। उसकी फोटो हर जरूरी और गैर जरूरी जगह पर लगी है। उसने खुद लगवाई है। उसे बड़ा शौक है। अपनी फोटो लगवाने का।

  मैं समझ गया कि यह आदमी भगवान से खार खाये बैठा है। इसलिए सर्वशक्तिमान परम पिता परमेश्वर की बात इस तरह से कर रहा है। मैंने कहा देखो भाई ईश्वर के मामले में इस तरह की बातें उचित नहीं हैं। धार्मिक मामला अलग है। भगवान की फोटो श्रद्धावश लोग जहां तहां लगा देते हैं। जेबकटी के मामले में भगवान को बीच में लाने की जरूरत नहीं है। आज देश में कई लोग जेब कतरने जैसे छोटे छोटे उद्योग व्यवसाय में लगे हैं। वे प्रभावशाली हैं। उनमें से कोई तुम्हारी भी जेब काट रहा है। तुम्हारी शिकायत वाजिब है। मगर डोरीलाल को ये बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगा कि तुम इस छिछोरे जेबकतरे की बराबरी ईश्वर से करो। 

अब उसे गुस्सा आया। उसने कहा मि. डोरीलाल मैं भी यही कह रहा हूं कि भगवान और उस जेबकतरे को एक न समझो। वो कोई भगवान नहीं है। वो छिछोरा जेबकतरा ही है। मैं भी जानता हूं और मेरे जैसे सारे लोग जानते हैं। जैसे नशेबाज को नशे में कोई बुराई नहीं दिखती। जैसे शराबी को शराब में कोई बुराई नहीं दिखती वैसे ही रोज हमारी जेबकटती है मगर हमें जेबकतरे में कोई बुराई नहीं दिखती। हम जेब कतरे के भक्त हो गए हैं। अब बात काफी आगे बढ़ गई है। अब तो हमें जेब कटवाने में तरह तरह के फायदे दिखाई देने लगे हैं।

जेब कटवाना अब एक सामाजिक राजनैतिक प्रतिष्ठा का प्रश्न है। बड़े बड़े वकील, जज, डाक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, अधिकारी, व्यापारी सब कूद कूद कर जेब कटवाते हैं। जो खुद दूसरों की जेब काटते हैं वो भी उस जेबकतरे से जेब कटवाते हैं। जिसकी नहीं कटती वो अपने को कमतर समझने लगता है। उसे लगता है कि कल तक वो निपट जाएगा। वो दौड़कर जेबकतरे के पास जाकर गिड़गिड़ाता है मेरी जेब काट लो। जब तक कट नहीं जाती पैरों से लिपटा रहता है।

जेबकतरा परेशान है। आज देश में हर कोई जेब कटवाने के लिए तैयार खड़ा है। जेब न कटे तो लड़ाईयां हो जाती हैं। कटवाने की ऐसी होड़ लगी है कोई छूटना नहीं चाहता। सब चाहते हैं जेब कट जाए। इसीलिए गांव गांव शहर शहर महानगर चंहुओर विराट सामूहिक जेबकट सम्मेलन आयोजित होते हैं। उसमें हजारों लाखों लोग जाकर अपनी जेब कटवाते हैं। गांव गांव में पुड़ी भाजी के पैकेट के साथ मुफ्त बसों में भरकर जेब कटवाने वालों को सम्मेलन में लाया जाता है। जेब कटने के बाद सब लोग खुशी खुशी जेबकतरे की फोटो वाला झोला लेकर अपने अपने घरों को जाते हैं। इस अद्भुत दृश्य को देखकर देवगण ऊपर से ईर्ष्या के फूल बरसाते हैं। उन्होंने जिस सृष्टि का सृजन किया उसमें एक जेबकतरे के प्रति अगाध श्रद्धा देखकर देवगण जलभुनकर राख हो जाते हैं। बहुत सारे छुटभैइये जेबकतरे गुरूपूर्णिमा के अवसर पर अपने आराध्य जेबकतरे का पूजन करते हैं और अपनी ’मेहनत’ की कमाई का अंश उन्हें गुरू दक्षिणा के रूप में श्रद्धापूर्वक चढ़ाते हैं। 

डोरीलाल ने पूछा कि जेबकतरे को पहचान लेने के बाद भी जेब कटवाते रहते हो, रोज कटवाते हो, तुम आदमी हो या कीट पतंगा ? तुम्हारी मेहनत की कमाई कोई लूट रहा है और तुम मजे कर रहे हो ? तुम विरोध क्यों नहीं करते ? इंकार कर दो हम नहीं कटवायेंगे जेब। कोई जबरदस्ती है ? 

डोरीलाल जी, हम लोग छोटे लोग हैं। हम क्या विरोध करेंगे। जेबकतरे के पास पुलिस, अदालत, वकील, जज, बड़े बड़े अधिकारी व्यापारी हैं। हमारे लिए बोलने वाला कौन है ? जो लोग बोल सकते हैं वो खुद लपक लपक कर जेब कटवा रहे हैं। हम इसी लायक हैं कि ठगे जाएं। जेब कटवाना ही हमारा भाग्य है। कम से कम हमें इस लायक तो समझा गया है कि हमारी जेब काटी जाए। उल्टे हमें तो डर लगा रहता है कि जेबकतरा कहीं गुस्सा होकर हमारी जेब काटना बंद न कर दे। हम तो कहीं के न रहेंगे। 

हमारे पास कोई काम नहीं है। बचा है तो केवल एक काम - जेब कटवाना।


डोरीलाल ’जेबकतरा प्रेमी’ 

14 02 2026

न्याय का बैडमिन्टन

डोरीलाल जी, बैडमिन्टन के खेल के बारे में कुछ प्रकाश डालिये।             बैडमिन्टन एक खेल है जिसमें एक कोर्ट होता है। एक या दो खिलाड़ी आमने स...