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Thursday, 30 April 2026

लोकतंत्र को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि

           डोरीलाल जी सात लोग आम से खास हो गए। आपको पता चला ? बिलकुल पता चला। इस देश में अब यही तो समाचार है। मुख्यधारा में शामिल होना ही आज की धारा है। पर आपको ये पता नहीं होगा कि जो सात राज्यसभा सांसद लोग आम आदमी पार्टी से खास आदमी पार्टी में गए हैं उनकी हैसियत क्या है ? उनकी हैसियत ये है कि वो अमीर लोग हैं। ये कुकर्म अमीरों को ही शोभा देता है।

            कितने अमीर ?

             ये नहीं मालूम भाई पर अमीर तो होंगे। तभी तो अमीरों की पार्टी में गए हैं। नाम भले ही आम आदमी पार्टी हो मगर उसका सांसद तो अमीर ही होगा। गरीब आदमी को, पढ़े लिखे को कोई क्यों सांसद बनाएगा ? उससे पार्टी को क्या फायदा ? नमूने के लिए कुछ गरीब सांसद बनाना पड़ते हैं। तो बनाते हैं। वो रिंग मास्टर के कहने पर मेज थपथपाते हैं और साहब के सामने कोर्निश बजाते हैं। अमीर आदमी अमीर आदमी होता है। वो मंहगे में बिकता है या फोकट में बिकता है। सस्ते में नहीं बिकता। जब फोकट में बिकता है तो डर के मारे बिकता है।

           कांग्रेस के प्रवक्ता ने अपनी प्रेस कान्फ्रेंस करके बताया है कि इन सातों की औसत कुल सम्पत्ति ( एवरेज नैट वर्थ) 818 (आठ सौ अठारह) करोड़ रूपया है। ये आम आदमी के सांसद थे। ये व्यापारी हैं, खिलाड़ी हैं, प्रोफेशनल हैं। पंजाब के आम आदमी पार्टी के 90 विधायकों ने यदि इन्हें न चुना होता तो ये सांसद न होते। इन्हें अपनी पार्टी से दगा करते शर्म न आई। 

            डोरीलाल जी ये बताइये कि इन लोगों ने पार्टी बदल ली इससे आपको क्या शिक्षा मिलती है ? 

            खूब पढ़ा लिखा होने से, अच्छी अंग्रेजी बोलने से, गौर वर्ण होने से, ऊंची जाति का होने से और खूब पैसे वाला हो जाने से आदमी ऊंचा नहीं हो जाता है। उसके कर्मों से वह उसकी उच्चता या नीचता तय होती है। जिनने उसे चुना, उंचाई तक पंहुचाया, उनसे जिसने दगाबाजी की वो नीच ही कहलाएगा।

            देश में अमृतकाल चल रहा है। सब कुछ खुल्लमखुल्ला हो रहा है। सबके पूरे कपड़े उतर चुके हैं। पूर्ण दिगंबर अवस्था। सत्ता के साथ सब हैं। जनता के साथ कोई नहीं है। न्याय की मूर्तियां भग्नावस्था में पड़ी हैं। न्याय की मूर्तियों को अन्याय करते हुए बिलकुल शर्म नहीं आती। वकील तर्क देकर थक चुके हैं, वकालत छोड़ रहे हैं। अदालत में केस लगते ही पता चल जाता है कि जज कौन होगा और निर्णय क्या होगा ? जज अपने खिलाफ मुकदमा खुद सुनते हैं और अपने को निर्दोष मुक्त करते हैं। अब राजतंत्र वापस आ गया है। पूरा देश छोटे छोटे राजाओं के सूबों मंे बदल गया है। हर सूबे के राजा की अपनी सेना है। चाहे जब एक राजा की सेना दूसरे राजा के प्रदेश में घुसकर छापा मारती है और नागरिक को रातोंरात अगवा कर अपने राजा के सामने पेश कर देती है।

            अब दिल्ली का बादशाह तय करता है कि उसे कौन सा राज्य जीतना है। वो अपनी अक्षौहणी सेना लेकर टूट पड़ता है। वो फतह करके ही लौटता है। इस बार बंगाल राज्य जीतना तय किया गया है। सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग, हाई कोर्ट पूरे देश की पुलिस, तरह तरह की अर्ध सैनिक बल, एनआईए, सीआरपीएफ, बीएसएफ बख्तरबंद गाड़ियों और मशीनगनों, एके 47 आदि से लैस कर बंगाल के सूबे पर हमला किया गया है। पता नहीं क्यांे टैंक और फाइटर जैट का उपयोग नहीं किया गया। बंगाल तो समुद्र किनारे है। वहां तो नौसेना ही नहीं बल्कि अमेरिका के जार्ज वाशिंगटन, अब्राहम लिंकन जैसे जहाजों को भी लगाया जा सकता है। वोटिंग होना है। कोई मजाक है ? पूरे देश से छंटे हुए पुलिस अधिकारी, आई ए एस बुलाए गए। लाखों वर्दी धारी पूरे प्रदेश में गांव गांव तक छा गए। पूरा प्रदेश छावनी बना दिया गया। चारों ओर वोटरों को दौड़ा दौड़ा कर, लाठियों से पीट पीट कर शांतिपूर्ण मतदान करवाया गया। लुंगी और पेंट से पहचान की गई। 

            तृणमूल की चुनाव सलाहकार कंपनी आईपैक के यहां छापा मारा गया। न्यायमूर्तियां अभी भी रेशा रेशा अलग कर रही हैं कि ममता बनर्जी ने ईडी की चाल क्यों फेल की ? उन्हें क्या हक ? उसी कंपनी के संस्थापक को चुनाव से पहले गिरफ्तार कर लिया गया और चुनाव खत्म होते ही सुबह बिना किसी विरोध के निचली अदालत ने ही छोड़ दिया। शाम को मजिस्ट्रेट को आत्मज्ञान हुआ। उसने कहा गलती से छोड़ दिया। अंदर करो। धन्य है न्याय की देवी। 90 लाख वोटरों के नाम काट दिए गए। 27 लाख लोगों ने सारे कागज जमा कर दिए तो भी वोट देने के काबिल नहीं माने गए। बड़ी कोर्ट कहती है कि इस बार नहीं तो अगले बार वोट दे देना। फिर वोट की गिनती की भी क्या जरूरत ? फिर चुनाव की जरूरत ही क्या है ? जब 27 लाख वोटर वोट नहीं डाल सकते तो लाख पचास हजार की हार जीत का भी क्या मायने है। पहले वोटर सरकार चुनते थे। अब सरकार वोटर चुन रही है। पूरा चुनाव सत्ता का एक क्रूर हिंसक नग्न नृत्य है। 

            इस समय भाजपा का अश्वमेघ यज्ञ चल रहा है। पिछले दोे चुनावों से भाजपा का घोड़ा बंगाल में घुस रहा है। सब राज्यों ने घुटने टेक दिए। बचे हुए राज्य भी देर सबेर घुटने टेक देंगे। भाजपा के पास चुनाव जीतने का फार्मूला, पैसा और मशीनरी सब है। डोरीलाल की इच्छा है कि भाजपा ये सभी चुनाव जीत जाए। रोज रोज का टंटा खत्म हो। राजतंत्र में चुनाव की जरूरत क्या है। जब अंग्रेजों ने एक के बाद एक युद्ध जीतकर पूरे भारत पर कब्जा कर लिया उसके बाद आराम से दो सौ साल भारत को लूटा। आप लोग भी पूरा भारत जीत लें फिर आराम से लूटें। 

            वो देश का चुनाव जीत रहे हैं। मगर देश के साम्प्रदायिक बंटवारे और गरीबी से पूरा देश हार रहा है।

           आईये प्रार्थना सभा करें। लोकतंत्र को श्रद्धांजलि अर्पित करें। 

डोरीलाल चुनाव प्रेमी

30 04 2026



Tuesday, 14 April 2026

मदरलैंड, फादरलैंड

वो लगातार अपने आप को जूते मारे जा रहा था। कभी अपने मुंह पर मारता, कभी अपनी पीठ पर घुमा कर मारता। मारे ही जा रहा था। कभी पेट पर मारता। कभी पैरों पर दनादन जूते मारता। वो बड़बड़ा रहा था। ले और जूते खा। और खा। अब चैन पड़ा ? और खायेगा ?
उसकी बेचैनी देखकर डोरीलाल हतप्रभ रह गया। जूते खाने की ऐसी बेताबी देखकर डोरीलाल का मन विचलित हो गया। अरे भाई वाह। क्या बात है। मैंने उससे पूछा कि भई ये बताओ कि क्यों मार रहे हो अपने आपको जूते। उसने कहा तीन दिन हो गए मुझे जूते नहीं पड़े। हर रोज जूते खाते खाते ऐसी आदत पड़ गई है कि दो तीन दिन जूते न पड़ें तो एक भूख सी लग जाती है, एक प्यास सी लग जाती है लगता है कि कोई इस पीड़ा से मुक्ति दिला दे। 25-50 नहीं तो 2-4 ही मार दे मगर मार दे। ये भूख अब सही नहीं जाती। दिल बेताब हुआ पड़ा है। कोई तो मुझे जूते मारो।
मैंने उससे कहा कि तुम्हारी बात मुझे जंच नहीं रही है। ये बताओ कि कोई तुम्हें जूते क्यों मारेगा ? आखिर तुम भारतीय नागरिक हो। हमारा इतिहास धरती में होमो सेपियंस के आने से भी पुराना है। हम धरती पर विकसित नहीं हुए हैं हमने धरती पर सीधे अवतार लिया है। पूर्ण विकसित रूप में। हम डार्विन को नहीं मानते। हमें जूते कोई क्यों मारेगा ? बल्कि हम मारेंगे जूते। हमारी परंपरा बहुत पुरानी है। ये ऋषियों मुनियों की पावन भूमि है। हम उस देश के वासी हैं जिस देश में गंगा बहती हैं। हमारे देश में हर नदी पवित्र है। हर पहाड़ पवित्र है। हमारे यहां पवित्र से नीचे कुछ है ही नहीं। हमारे देश की परंपराएं महान हैं। हम स्वयं बहुत महान हैं। भारत वर्ष हमारी मातृभूमि है।
मातृभूमि ? यह सुनते ही वह फिर अपने आपको जूते मारने लगा। मातृभूमि का नाम नहीं लेना। पूरी दुनिया हम पर हंस रही है। पूरी दुनिया में हमें जूते पड़ रहे हैं। लोग न जाने भारत के बारे में क्या क्या कह रहे हैं ? डोरीलाल ने उसे बहुत मुश्किल से शांत कराया। उससे पूछा कि भाई बात क्या हो गई ? उसने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री इजरायल, ईरान, अमेरिका के युद्ध के पहले इजरायल गये थे। वहां की संसद में उनको एक मैडल देकर सम्मान किया गया। वो खास तौर पर उन्हीं के लिए बनवाया गया था। इजरायली संसद में हमारे प्रधानमंत्री ने भाषण दिया। खूब तालियां बजीं। खूब मेज थप थपायी गयीं। महामहिम जोश में आ गये। बोले इजरायल और भारत की दोस्ती अजर अमर है। हमें कोई अलग नहीं कर सकता। इंडिया इज अवर मदर लैंड एंड इजरायल इज अवर फादरलैंड। अब इजरायल हमारी पितृभूमि हो गई। ये आदमी हमें कहीं का नहीं छोड़ेगा। अब मैं अपने आपको जूते न मारूं तो क्या करूं ?
डोरीलाल ने उसे समझाया। देखो एहसान चुकाने के जोश में ऐसा हो जाता है। फिर तुम्हें सोचना चाहिए कि अभी तो साहब की सत्ता को बारह साल ही गुजरे हैं। अभी तो 2047 तक पच्चीस साल कैसे गुजरेंगे पता ही नहीं है। कुछ भी हो सकता है। हम लोग अभी अविकसित हैं। अभी तो पितृभूमि का पता चला है। अभी तो न जाने तुम्हारे कितने भाई बहन निकल आएंगे। वसुधैव कुटुम्बकम क्यों कहा जाता है ? पूरी पृथ्वी हमारा कुटुम्ब है। अब एक बार फादरलैंड का पता चल गया है तो अब भाई बहन, मामा, चाचा सब मिल जाएंगे।
इस बार वो गंभीर हो गया। वो बोला डोरीलाल न ये बात मजाक की है और न ये देश मजाक की चीज है। मगर भारतवासी पूरी दुनिया में मजाक की चीज बना दिए गए हैं। हमारी दौ कौड़ी की औकात कर दी है। देश में इतना हिन्दू मुस्लिम कर दिया गया है कि पचासों साल लग जाएंगे इस नफरत को मिटाने में। आज हमारे देश में हर त्यौहार हंसी खुशी की जगह एक खौफ़ और शक लेकर आता है। सचाई ये है कि एक करोड़ भारतीय मुस्लिम देशों में नौकरी कर रहे हैं। वहां वो अमन चैन से हैं। जब देश में हिन्दु मुस्लिम हिन्दु ईसाई होता है, जब देश में नफरत फैलाकर वोट की फसल काटी जाती है तो पूरी दुनिया में फैले भारतीय लोग मुसीबत में पड़ते हैं। उनको शक से देखा जाता है। उन पर हमले होते हैं।
ईरान इजरायल लड़ाई से पूरी दुनिया में नए संबंध बन रहे हैं। पुराने बदल रहे हैं। मगर हमारी कोई पूछ नहीं है। क्योंकि लड़ाई के पहले ही हम खुलकर इजरायल के साथ खड़े हैं। मेडल ले लिया। फादरलैंड बना लिया। हम हत्यारों के साथ खड़े हैं। पूरी दुनिया के लोगों की सहानुभूति ईरान के साथ है। भारतवासी ईरान के साथ हैं लेकिन माई फ्रेंड डोलांड ट्रम्प के चक्कर में हमारी हालत अमेरिका इजरायल के दरबान की हो गई है।
आजादी के बाद कितनी सरकारें आई गईं, मगर भारत की नीति आत्मसम्मान और गलत को गलत कहने की रही है। कभी समझौता नहीं किया। भारत विकासशील देश है। मगर उसने कभी विकसित देशों के सामने घुटने नहीं टेके और आज हालत ये है कि अमेरिका हमें एक महीने के लिए रूस से तेल खरीदने की ’परमीशन’ दे रहा है। यूरोप के सारे देश अमेरिका से अलग खड़े हो गए मगर हम तो ट्रेड डील करके बैठे हैं।
अचानक वो रूका और उसने कहा डोरीलाल अब मुझे तुम जूते मारने से मत रोकना। मैं अपने आपको ही तो जूते मार रहा हूं। मगर तुम बताओ कि इस देश के चुनाव आयोग के लिए मैं अपने आपको जूते मारूं या न मारूं। इस देश में न्याय व्यवस्था के लिए अपने आपको जूते मारूं या न मारूं। किसान बिल, लेबर कोड, नोटबंदी, पी एम केयर फंड वाली सरकार के लिए, अपने देश के मजदूरों किसानों के लिए अपने आपको जूते मारूं या न मारूं। बढ़ती मंहगाई, भयानक बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था के बावजूद चुप जनता के लिए अपने आपको जूते मारूं या न मारूं ?
मैंने कहा कि अभी जनता अयोध्या, वैष्णोदेवी, महाकाल, चारों धाम, बदरीनाथ केदारनाथ, सबरीमला, कामाख्या, के लिए चलाई गई स्पेशल ट्रेनों में घूम रही है। उसे मत छेड़ो। वो बहुत खुश है। वो अभी भी नशे में है।
मैं जानता था कि वो अपने को जूते मारता थक जाएगा। मगर कुछ नहीं बदलेगा। अब हमें जूते खाने की आदत हो गई है। अब हमें उसमें मजा आता है। गर्व होता है।
डोरीलाल जूता प्रेमी
14 04 2026

न्याय का बैडमिन्टन

डोरीलाल जी, बैडमिन्टन के खेल के बारे में कुछ प्रकाश डालिये।             बैडमिन्टन एक खेल है जिसमें एक कोर्ट होता है। एक या दो खिलाड़ी आमने स...