डोरीलाल के पास एक तोता था। उसके लिए एक बढ़िया चमकदार पिंजरा था। उसमें वो रहता था। दिन भर खूब बात करता था। खूब बढिया पढता था। जब कोई घर आता तो आवाज देकर बुलाता। घर के हर सदस्य की आहट पहचानता था। फिर मैं उसे पिंजरे से बाहर निकाल देता था। वो पूरे घर में उड़ता रहता था। मगर कभी भी घर से बाहर न जाता था। हम लोग भी यही चाहते थे। बाहर जाए और कोई बिल्ली कुत्ता उसे पकड़ ले इससे अच्छा है कि वो घर के अंदर अपने पिंजरे में रहे। उसे भी अपना पिंजरा बहुत प्यारा था। वो पिंजरे में ही रहता। थोड़ी देर घूमता फिर वापस पिंजरे में आ जाता। उसे जो पसंद था वो खाना और फल उसे मिल जाते थे। वो अपने जीवन से संतुष्ट था। उसे अपने मालिक से कोई शिकायत नहीं थी।
चे ग्चारा का कथन है कि आजादी का सबसे बड़ा दुश्मन संतुष्ट गुलाम है। जब वो अपने पिंजरे में संतुष्ट है तो आप उससे क्या आजादी की बात करोगे और क्या क्रांति की बात करोगे। वो जाकर अपने मालिक को बताएगा कि एक दुष्ट मुझे आपके खिलाफ भड़का रहा था मगर मैं नहीं भड़का मालिक। मालिक उसे पुचकार कर उसके बाड़े के अंदर भेज देगा। जिसे आजादी की चाहत ही न हो वो आजादी के लिए क्यों लड़े। आजादी की लड़ाई भले ही गुलामी से मुक्ति के लिए लड़ी जाती है मगर उसके पहले लंबे समय तक जमीन तैयार करना होती है। तब कहीं जाकर गुलामों को आजादी का मतलब समझ आता है। तब उनमें से कुछ आजादी के लिए लड़ने को तैयार होते हैं।
इसलिए आजादी की लड़ाई कई स्तरों पर लड़ी जाती है। पहले तो गुलामों को बताना कि आजादी क्या है ? फिर उन्हें संगठित करना और लड़ाई शुरू करना। सदियों की गुलामी से ऐसा मानस बन जाता है कि गुलाम गुलामी को गुलामी ही नहीं मानता। झुके झुके वो भूल जाता है कि वो खड़ा हो सकता है। परसाई जी ने लिखा है कि लाखों साल के इतिहास में केंचुएं को यह समझ आया कि रीढ़ की हड्डी नहीं होना चाहिए। इसलिए गुलामी के खिलाफ लड़ाई लंबी चलती है। आजादी की लड़ाई केवल अत्याचारी के खिलाफ नहीं लड़ी जाती। आजादी की लड़ाई उन गुलामों के खिलाफ भी लड़ी जाती है जो अत्याचारी के साथ खड़े रहते हैं और आजादी के विरूद्ध लड़ते हैं।
भारत यदि आजाद हुआ तो उसकी लड़ाई तब ही चालू हो गई थी जब अंग्रेजों ने अपना प्रसार शुरू किया था। उस समय बहुत से राजाओं ने अंग्रेजों से संधि नहीं की और लड़कर मर गये। अंग्रेजी साम्राज्य ने धीरे धीरे करके एक एक विरोधी को खत्म करते हुए पूरे देश पर कब्जा किया। यह केवल भारत के साथ नहीं हुआ था। ये दुनिया भर में हुआ। इग्लेंड, फ्रांस, जर्मनी, हालेंड, स्पेन जैसे देशों ने जा जाकर पूरे अफ्रीका और एशिया को गुलाम बना लिया। अमेरिका जाकर वहां के मूल निवासी रेड इंडियंस को खत्म कर पूरे देश पर अपना राज्य कायम कर लिया। फिर अफ्रीका से जहाजां में भर भर कर लाखों लोगों को लाकर अमेरिका में मजदूरी के लिए बसा लिया।
भारत में उस समय प्रमुख काम खेती था। घरेलू उद्योग धंधे थे। खूब व्यापार होता था। भारत से व्यापारी पूरी दुनिया में जाते थे और खूब पैसा कमाते थे। उस समय पैसा लाने का सबसे अच्छा साधन सोना था। पूरी दुनिया से भारतीय सोना भारत लाये। उस समय भारत सोने की चिड़िया कहलाया था। इतिहास बताता है कि जहांगीर के समय भारत सोने की चिड़िया कहलाता था। अंग्रेजों के भारत पर पूर्ण कब्जा करने तक भारत की ’जीडीपी’ दुनिया में शायद सबसे ज्यादा थी। इतिहास इसलिए भी पढ़ा जाना चाहिए कि राजाओं और रानियों की कहानी इतिहास नहीं है, उस समय के व्यापार, शिक्षा, कानून व्यवस्था किसानां और आम जनों की हालत ये सब भी इतिहास में दर्ज है और सभी कुछ बहुत सुनहरा नहीं है। बहुत कुछ काला भी है।
अंग्रेजों ने भारत पर कब्जा करके यहां के उद्योग धंधे चौपट किए और अपने देश का सामान भारत में बेचना शुरू किया। किसान देश का सबसे बड़ा उत्पादक होता है और वही सबसे ज्यादा शोषित होता है। वही पैदा करता है और वही भूखों मरता है। इसी की जब अति हो गई तब 1857 का विद्रोह हुआ। विद्रोह दबाने के बाद अंग्रेजों ने जो हत्याकांड मचाया है उससे खुद अंग्रेज भी हिल गये। ये बात उठाई गई कि आखिर हम लाखों लोगों का संहार क्यों कर रहे हैं ? ये भी इतिहास का एक दर्दनाक पन्ना है। भारत में आजादी की लड़ाई में अहिंसा और सत्याग्रह की गांधी की रणनीति इसीलिए जरूरी हुई कि करोड़ों लोगों को अंग्रेजी अत्याचार से लड़ने के लिए तैयार करना था। साम्राज्य और पूंजी के प्रसार में मानव जाति और मानव जीवन की कोई कीमत नहीं होती है। यदि करोड़ों लोगों को मारे जाने की जरूरत होगी तो मारे जाएंगे। प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध में जो करोड़ों लोग मारे गये उन्हें नहीं मालूम था कि वो किसके लिए लड़ रहे हैं और क्यों मारे जा रहे हैं।
जो लोग आजादी के लिए लड़ते हैं वो सत्ताधारी के सबसे पहले शिकार होते हैं। आजादी के लिए लड़ने वालों को हर कुर्बानी देना होती है और उसके बाद भी वो जीतें यह जरूरी नहीं है। दुनिया का इतिहास आजादी के लिए और गरीबों किसानों मजदूरों के लिए लड़ने वालों के हारने और अत्याचारियों की विजय से भरा हुआ है। फिर भी कुछ लड़ाईयां इसलिए लड़ी जाती हैं कि कुछ दीवाने थे जो जानते थे कि उन्हें हारना है फिर भी उन्होंने अन्याय और अत्याचार का विरोध किया।
डोरी लाल न्याय प्रेमी
06 12 2023
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