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Wednesday, 28 May 2025

दुनिया कैसे चलती है

डोरीलाल से बंदे ने पूछा कि ये दुनिया कैसे चलती है। मैंने कहा - ये प्रश्न है या परीक्षा ? इसका उत्तर देना खतरे से खाली नहीं है। कुछ भी हो सकता है। मान लो मैं कह दूं कि तुम सही सोच रहे हो। दुनिया को वही चलाते हैं जिनकी रगों में वो नहीं बहता जो सेना के जवानों की रगों में बहता है। सिन्दूरररररररररररररररररर

बंदे ने आश्वस्त किया कि आप यदि अपने मन की बात बोलेंगे तो आपके ऊपर कोई एक्शन नहीं होगा। मैंने कहा कि मुझे अब भी तुम्हारे ऊपर शक है, तुम रिपोर्ट कर सकते हो। क्योंकि मेरे पास दिमाग है। मैं सोच सकता हूं। मैं मन की नहीं दिमाग की बात बोलूंगा। मैं सच बोलूंगा। उसने कहा सच बोलने वालों को कोई सत्ता, कोई राजा कभी पसंद नहीं करता। क्योंकि दुनिया सच बोलने वालों के चलाए नहीं चलती। 

मैंने झपटकर पूछा जब तुम्हें मालूम है तो फिर तुमने मुझसे क्यों पूछा कि दुनिया कैसे चलती है ? उसने कहा कि जो जिस सवाल का जवाब दे सकता है उसी से पूछा जा सकता है। बात समझो डोरीलाल जी। गली गली में प्रवचन हो रहे हैं। यज्ञ हो रहे हैं। भागवत हो रही है। मंदिरों का निर्माण हो रहा है। नए नए लोकों का निर्माण हो रहा है। हजारों करोड़ रूपये इन पर खर्च हो रहे हैं। शहरों महानगरों में प्रवचन हो रहे हैं। चारों ओर भक्ति का समुद्र ठांठें मार रहा है। दीवाली दशहरे पर लाखों दीपक जलाने का कीर्तिमान बनाया जा रहा है। हर तरफ धर्माचार्यों की चरण वंदना हो रही है और उनके आशीर्वादों, उनके शापों से धरा आप्लावित है। जब इतना कुछ हो रहा है तो मनुष्य सुखी क्यों नहीं है ? इतना अनाचार, अत्याचार भ्रष्टाचार क्यों हो रहा है ? इसलिए मैंने आपसे पूछा कि बताओ डोरीलाल इस दुनिया को कौन चला रहा है ? इतनी सी बात है। एक पीड़ित की जिज्ञासा है। 

डोरीलाल ने कहा कि इस दुनिया को काम करने वाले चलाते हैं। दो तरह के लोग हैं - काम करने वाले और काम करवाने वाले। काम करने वाले लगातार काम करते हैं। यदि उन्हें जीवित रहना है तो काम करना ही है। इसलिए छोटे छोटे बच्चे काम करते दिखते हैं। औरतें मर्द काम करते दिखते हैं। और अस्सी साल का बुजुर्ग भी काम करता दिखता है। काम करे बिना पेट नहीं भरेगा। बिना खाये जियेगा कैसे ? तो डोरीलाल के हिसाब से दुनिया चल रही है क्योंकि काम करने वाले काम कर रहे हैं। समझो यात्रियों से भरी एक ट्रेन है। इंजन चालू है। मगर आगे नहीं बढ़ रही है। क्यों ? क्योंकि ड्राइवर नहीं है। यानी काम करने वाला नहीं है। ट्रेन, हवाई जहाज, मोटर गाड़ी, बैंक, दुकान, शो रूम, दफतर, कारखाना, अस्पताल, घर हर किसी को चलाने के लिए काम करने वाला जरूरी होता है। 

काम करवाने वाले, काम करने वालों से काम लेते हैं और उनकी मेहनत से कमाई करते हैं। उनका यही काम है। धूमिल की प्रसिद्ध कविता है - एक आदमी/ रोटी बेलता है/एक आदमी रोटी खाता है/ एक तीसरा आदमी भी है/जो न रोटी बेलता है, न रोटी खाता है, वो सिर्फ रोटी से खेलता है/मैं पूछता हूं-/ये तीसरा आदमी कौन है,/मेरे देश की संसद मौन है/ तो जो तीसरा आदमी रोटी से खेलता है उसकी ताकत और उसके पैसे के आगे सब झुकते हैं। वही दुनिया चलाते हैं। देश, दुनिया, युद्ध, शांति सुख दुख जीवन मरण सब उनके हाथ में है। वो सर्वशक्तिमान हैं। दुनिया उनसे चलती है।

तो उस बड़े आदमी के पास कितना पैसा होगा ? बड़े भालेपन से उसने पूछा। डोरीलाल ने कहा कि जिनकी बात में कर रहा हूं वो कोई एक आदमी नहीं है। वो एक वर्ग है। उनके पास पैसा नहीं पूरी सत्ता होती है, ताकत होती है। जो तुम पूछ रहे हो न कि दुनिया कैसे चलती है। तो समझो कि दुनिया यही लोग चलाते हैं। काम करने वाले अपनी मेहनत का पूरा पैसा चाहते हैं। और काम लेने वाले कम से कम देकर अपने मुनाफे को बढ़ाना चाहते हैं। सारा झगड़ा यहीं हैं। पैसे वाले चाहते हैं कि इस पृथ्वी पर जो लोग हैं वो उनके लिए मुनाफा कमा कर दें नहीं तो मर जाएं। मेहनत करने वाले अपनी मेहनत का पैसा मांगते हैं। अच्छा जीवन जीने का अधिकार मांगते हैं। तो वो जब तब उठ खड़े होते हैं। लड़ते हैं, हारते हैं। हर हार के बाद वो कुछ आगे बढ़ जाते हैं। ये लड़ाई चलती रहती है। और दुनिया भी चलती रहती है। 

आजकल ये लोकतंत्र के राजा हैं। तुम इनकी प्रजा हो। राजा प्रजा के वोट से बनते हैं। प्रजा को भ्रम होता है कि उसने राजा चुना है। 

बंदा भड़क गया। मैं आपके पास ज्ञान लेने आया था और आप मुझे ये राजा प्रजा क्या क्या बता रहे हैं? आप मुझे बेवकूफ समझते हैं ? दिन रात खटकर मेहनत करने के बाद हम बस केवल जिन्दा हैं। हमारे हाथ में क्या है बताओ ? हम किसे चुनें ?

डोरीलाल को अच्छा लगा। बहुत दिनों बाद किसी को गुस्सा होते देखा। मैंने कहा ये गुस्सा बनाए रखो। प्रजा पहले अपना दुश्मन तो पहचान ले। तुम भूल जाओ कि राजा तुम चुनते हो, वो तुम्हारा भला करेगा। प्रजा अपना राजा चुने उसके पहले एक और चुनाव होता है जिसमें अमीर लोग एक आदमी चुनते हैं जो प्रजा के लिए राजा बने और उनका मुनाफा बढ़ाये। जो राजा होने का बढ़िया अभिनय करता है, तरह तरह के कपड़े पहनकर दिखाता है, तरह तरह के मेकअप करता है, बढ़िया डायलॉग बोलता है। बोलते बोलते रो पड़ता है। झूठ आत्मविश्वास से बोलता है। अपनी बातों में लोगों को बहा ले जाता है और महाबली होने का भ्रम देता है। ऐसे सिद्ध अभिनेता को मैदान में उतारा जाता है। तुम उसे चुन लेते हो। 

अब समझ में आया दुनिया कैसे चलती है ?

डोरीलाल दुनियाप्रेमी

25 05 2025

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