डोरीलाल को इस बात की प्रसन्नता है कि देश की न्यायव्यवस्था के प्रति सम्मान निरंतर बढ़ रहा है। यह विकसित देशों की श्रेणी में आने को एकदम लालायित है। अमेरिका में जज पार्टियों के होते हैं। रिपब्लिकन जज होते हैं। डेमोक्रेटिक जज होते हैं। जहां जिनका बहुमत होता है। उसी के अनुसार निर्णय हो जाता है। इतना साफ सुथरा काम हमारे देश में अभी तक स्थापित नहीं हो पाया है। अभी हम इस मामले में थोड़ा पीछे हैं। पर कोशिशें जारी हैं। जैसे वर्तमान हालात हैं उसमें लग रहा है कि बहुत शीघ्र हम लक्ष्य प्राप्त कर लेंगे। बहुत अच्छे संकेत मिल रहे हैं।
अभी न्यायिक सात्विकता की मिसाल हमें तब देखने को मिली जब चंडीगढ़ में मेयर का चुनाव होना था। कांग्रेस और आप के पास स्पष्ट बहुमत था। तो चुनाव अधिकारी बन गये भाजपा के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अनिल मसीह जी। उन्होंने अपने कर्तव्य का पालन किया और आप - कांग्रेस को हरा दिया। आठ वोट रद्द कर दिए। बिना एक क्षण की देरी किए भाजपा का मेयर गद्दीनशीन हो गया। पूरी वीडियो रिकॉडिंग है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में पूरी बात खुल गई। इस बीच आप के तीन पार्षदों का भाजपा पर दिल आ गया। अब देश में कानून व्यवस्था का इतना आदर बढ़ गया है कि कुछ भी हो जाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
दिल्ली में पी एच डी कर रहा एक युवक पिछले चार साल से जेल में है। उसका अपराध ये है कि वो सरकार की विरोधी विचारधारा का है और विधर्मी है। उसकी जमानत की अर्जी पर पिछले चार सालों में सुनवाई ही नहीं हुई। अंत में उसके वकील ने सर्वोच्च अदालत से दरखास्त की कि हमें जमानत की अर्जी वापस लेने की इजाजत दी जाए। तो इजाजत दे दी गई। न्याय पर इस तरह से विश्वास बढता जा रहा है। और उसके बाद वकील साहब ने कहा कि हम निचली अदालत में किस्मत आजमाएंगे। ये हास्य है या व्यंग्य ? अब अदालतों में न्याय मांगने की बजाए किस्मत आजमाई होने लगी है। यानी लाटरी है। किस्मत है तो खुल जाएगी वरना जेल में तो हैं ही।
सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि निचली अदालतें लोगों को जमानत देने से डरती हैं। इसलिए सुप्रीम कोर्ट में जमानत के केस बढ़ते जा रहे हैं। आखिर निचली अदालतें लोगों को जमानत देने में किससे डरती हैं ? निश्चित रूप से सरकार से डरती हैं। जब अदालत ही डरने लगे तो फिर न्याय की आशा किससे की जाए। अब अदालतें निर्णय देने में कतराती हैं या अगली अदालतों में मामला भेज देती हैं। जेलों में लाखों लोग ऐसे बंद हैं जिन पर बरसों से मुकदमे चल रहे हैं। उनको सजा नहीं हुई है लेकिन बिना सजा मिले सजा भोग रहे हैं। इनमें ऐसे लोग हैं जो जमानत करवाने के लिए वकील नहीं कर सकते। जमानत हो जाए तो जमानतदार नहीं ला सकते। न इनके पास कोई संपत्ति है। न इनकी कोई सुनवाई है। न इनका कोई वकील है। आदिवासियों के लिए लड़ने वाली सुधा भारद्वाज खुद कई साल जेल में रहने के बाद एक तकनीकी कारण की बिना पर जमानत पा सकी हैं तो आदिवासियों की जमानत कौन करवायेगा।
जिन आदिवासियों, दलितों और पिछडों की भलाई के लिए सभी सरकारें और दल काम कर रहे हैं। जेलों में बंद अधिकांश लोग इसी प्रजाति के हैं। भारत की प्रथम आदिवासी महिला राष्ट्रपति ने भी इस बात को जजों के सामने उठाया था कि भारत की गरीब जनता-आदिवासियों के साथ अदालतों में न्याय हो।
ये बात बार बार कही जाती है कि जमानत देना नियम है और न देना अपवाद है। पर आज हालत ये है कि अपवाद ही नियम हो गया है। अब पुलिस सीबीआई ईडी सभी का लक्ष्य है व्यक्ति को सीधे जेल में डाल देना। कुछ दिन बाद केस की बात बंद हो जाती है केवल जमानत की अर्जी पर सुनवाई और उसके खारिज होने की खबरें ही आती रहती हैं। अब लगभग ये बात तय हो चुकी है कि जिस भी राजनीतिज्ञ को किसी भी अपराध में गिरफ्तार किया जाएगा उसे जमानत नहीं मिलेगी। कारण चाहे जो भी बताया जाए। इसलिए पिछले दिनों जमानत की अर्जी वापस मांग ली गई। न्याय की उम्मीद अदालतों और न्यायाधीशों से बनी रहे इसके लिए अब अदालतों और न्यायाधीशों को स्वयं कुछ करना होगा। वरना किसी दिन बाबा भारती के घोड़े की कहानी दोहराई जाने की नौबत आ जाएगी।
न्याय की कितनी इज्जत आजकल हो रही है इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि चुनाव आयुक्त का चयन प्रधानमंत्री, विरोधी दल का नेता और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश करेंगे। सरकार ने फैसला पलट दिया और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की जगह प्रधानमंत्री द्वारा चयनित केन्द्रीय मंत्री को रख दिया। सरकार ने नए कानून बनाए उनको पास करवाने से पहले संसद के 149 सांसदों को निलंबित कर दिया और बिल पास कर दिए। जय हो ऐसी संसद की और ऐसे कानूनों की।
भारत सरकार ने फ्रांस सरकार से रफाल लड़ाकू विमान खरीदे। विपक्ष ने कहा कि इसमें भ्रष्टाचार हुआ है। विमान बहुत मंहगे खरीदे गये हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को क्लीन चिट दे दी। मामला खत्म कहलाया। अब मुश्किल ये है कि फ्रांस में सौदे की जांच चलती रही और भारत को रिश्वत देने के लिए फ्रांस में लोगों को सजा हो गई। देने वाले को सजा हो गई। और लेने वाले को भारत में क्लीन चिट मिल गई। बहुत मजा आ रहा है।
शायर परेशान होकर कहता है कि कैसे गज़ल कहें। डोरीलाल कहता है इतना नंगा सच देखने के बाद कैसे व्यंग्य करें।
डोरीलाल न्यायप्रेमी
20 02 2024
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