डोरीलाल के विचारों से प्रभावित होकर भक्तजनों ने जलभुनकर पूछा कि आप पिछले जन्म में क्या थे ? मैंने उन्हें बताया कि कल ही मुझे पिछले जन्म के बारे में याद आया, मैं पिछले जन्म में जंगलों में रहता था और मैं एक पशु था। जंगल में तरह तरह के पशु पक्षी कीड़े मकोड़े आदि सभी प्रकार के जीव थे। जंगल में शेर, भालू, हाथी, नीलगाय, बायसन, हिरन, सियार, लकड़बघ्घे, लोमड़ी, कुत्ता, जंगली कुत्ता, सुअर, जंगली सुअर, खरगोश, बंदर और बाज, गिद्ध, चील, कौव्वे, तोते, मोर जैसे तरह तरह के उड़ने वाली पक्षी थे। पशु पक्षी कोई काम नहीं करते। ये दिन भर अपने खाने का जुगाड़ करते हैं और पानी पीते हैं। ये कोई व्यापार नहीं करते, नौकरी नहीं करते, टैक्स नहीं देते, बंगले नहीं बनाते, कपड़े नहीं पहनते। जंगल में पैदल चलते हैं, दौड़ते हैं। कोई जानवर किसी दूसरे की भाषा नहीं जानता। इसलिए वो न कोई भाषण देता है न सुनता है। उनके पास कोई मनोरंजन का साधन नहीं होता न किसी मनोरंजन की उन्हें जरूरत होती है। इन लोगों के बीच कोई झगड़ा नहीं होता। जो जिसका भोजन है उसको मारकर खा जाता है। किसी के पास कोई संपत्ति नहीं है। कोई पोलिस थाना नहीं है। कोई रिपोर्ट नहीं होती। कोई अदालत नहीं है। कोई जज वकील नहीं है। इसीलिए सभी सुखी हैं।
यहां सबकी अपनी अपनी जाति है। कोई किसी की जाति नहीं पूछता। सबका धर्म एक है जियो और जीने दो। कोई बिना भूख लगे किसी को मारता नहीं है। यहां कोई भी किसी का मटन खा सकता है। किसी भी तरह से खा सकता है। झटके से खा सकता है। धीरे धीरे रेत रेत के खा सकता है। यहां जंगल का राजा एक है। वो भी अपने खाने का जुगाड़ करता है। खाता है और सोता है। गुफा में रहता है। उसका कोई मंत्रिमंडल नहीं है। अकेले पूरी सरकार चलाता है। वो किसी से बात नहीं करता। कोई उससे बात नहीं करता। वो अपनी ताकत के दम पर राजा है। जब इकठ्ठे हो जाते हैं तो जंगली कुत्ते भी उसे दौड़ा दौड़ा कर मारते हैं। समय समय की बात है। राजा को नहीं मालूम की वो राजा है। प्रजा को भी नहीं मालूम की वो प्रजा है। कोई चुनाव नहीं होता। कोई चुनौती नहीं है। सब लोग सुखपूर्वक रहते हैं।
पशुओं, पक्षियों और कीड़े मकोड़ों में एक बात अच्छी है कि वो कोई बुरा काम नहीं करते। वो जन्म लेते हैं। जब तक जीवन चलता है जीते हैं फिर मर जाते हैं या मार दिए जाते हैं। मरने के बाद उन्हें सीधे मनुष्य योनि में भेज दिया जाता है। डोरीलाल को यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि ये सजा है या मुक्ति । जंगल में कोई शेर चीता गधा ऐसा नहीं है जो बताए कि अच्छे कर्म करो तो तुम्हें स्वर्ग मिलेगा। बुरे काम करोगे तो नर्क मिलेगा। स्वर्ग नरक का कोई चक्कर नहीं है। जैसा कि शास्त्रों में लिखा है कि पशु योनि के बाद मनुष्य योनि की टर्न आती है इसलिए मैं इस जन्म में मनुष्य हूं।
डोरीलाल अभी इस धरा पर मनुष्य रूप में विद्यमान हैं परंतु चिंता उन्हें अगले जन्म की सता रही है। कोई इस जन्म में सुखपूर्वक जीने की बात ही नहीं करता। जब तक पशु थे तब तक अगले जन्म की चिन्ता नहीं थी। मालूम था मनुष्य के रूप में जन्म लेंगे। जबसे मनुष्य योनि में आया हूं देख रहा हूं सब डरे हुए हैं कि अगले जन्म में क्या होगा ? मोक्ष मिलेगा कि नहीं ? स्वर्ग जाएंगे कि नरक। मैंने देखा कि मेरे साथ जंगल में जो कई सियार, लोमड़ियां थे वे इस जन्म में यहां मनुष्यों को स्वर्ग नर्क का आंखों देखा हाल बता रहे हैं। कई बता रहे हैं कि हमारे फार्मूले पर काम करो। मोक्ष मिल जाएगा। इस जनम में दुख सहोगे तो अगले जनम में सुख से रहोगे।
सियारों की तो इस योनि में बन आई है। पिछले जन्म के मेरे साथ के खरगोशों, कीडे़ मकोड़ों, कुत्ते बिल्लियों को इस जन्म में मनुष्य बनाया गया है लेकिन वो दिन रात मेहनत करते हैं और पिछली योनि वाला जीवन ही जीते हैं। पिछले जनम के सियार बड़े बड़े पंडाल लगाकर उन्हें प्रवचन देते हैं कि तुम्हें केवल कर्म करना है। फल की चिन्ता नहीं करना है। जैसे तुम कर्म करोगे वैसे ही तुम्हें फल मिलेगा। अच्छे कर्म करोगे तो तुम स्वर्ग में जाओगे। स्वर्ग मतलब काम नहीं करना, अप्सराओं के साथ मजे करना और पेल के खाना, मदिरा पीना और सोना। यानि इस जनम में जो तुम्हारे लिए सपना है वो स्वर्ग में तुम्हें मिल जाएगा। ये सियार कभी स्वर्ग नहीं जाएंगे क्योंकि इनका स्वर्ग यहीं है।
डोरीलाल को पिछले जन्म के बहुत से लकड़बघ्घे और भेड़िये दिखाई पड़ते हैं। कोई अफसर है तो कोई पुलिस में है तो कोई नेता हो गया है कोई वकील हो गया है तो कोई जज तो कोई ठेकेदार कोई सप्लायर। ये लोग सब हिलमिल कर रहते हैं। इनमें आपस में कोई झगड़ा नहीं है। ये इस योनि में भी छोटे मोटे लोगों को मार कर खाने से नहीं चूकते। इस योनि में इन्हें एक नई आदत लग गई है। ये पैसा खाते हैं। आपस में एक दूसरे को नहीं खाते। अच्छी बात है। पूरा शहर यही चलाते हैं।
डोरीलाल पूरे शहर में ढूंढ रहा था। जंगल में इतने शेर मरे ? गये कहां ? एक दिन देखा कि एक बारात जा रही है। एक भूतपूर्व सियार बघ्घी में बैठा हुआ है। सामने बैंड बज रहा था। देखा तो सारे शेर सूट बूट पहने, चश्मा लगाए, तरह तरह की दाढ़ी में संवरे हुए सियार की बारात में बैंड बजा रहे थे। देखा सारे भूतपूर्व लकड़बघ्घे, भेड़िये, गिद्ध, बाज, चील कौव्वे सूट बूट पहने, कुर्ता पाजामा पहने, बारात में चले जा रहे हैं। गलों में अलग अलग रंग के गमछे डले हैं। एक दूसरे के गले में हाथ डाले समूह नृत्य चल रहा है। सियारों, लोमड़ियों, भेड़ियां, लकड़बघ्घों का डांस चल रहा है। सीटियां बज रही हैं। हवा में फायर हो रहे हैं। आतिशबाजी हो रही है। अप्सराएं नाच रही हैं। जूते सैंडिलें थिरक रही हैं। पैरों के नीचे चीटियां, तितली, चिड़ियां, खरगोश, गिलहरी कुचले जा रहे हैं। पिछले जन्म के मेरे साथ के खरगोश, कीडे़ मकोडे़, कुत्ते बिल्लियां बिजली के लट्टू लिए बारात में रोशनी बिखेर रहे हैं।
नाच चल रहा है।
डोरीलाल पुनर्जन्म प्रेमी
28 04 2025
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