डोरीलाल को यह जानकर अतीव प्रसन्नता हुई कि डुमना नेचर पार्क में बनाया जा रहा तितली पार्क अब नहीं बनेगा। उसके लिए 25 लाख रूपये की लागत से बाउन्ड्री वॉल बनाई जा चुकी है। अब कुछ खुशबुदार पौधे लगाना थे जिससे तितलियां वहां खुद ब खुद आकर तितली पार्क बना देतीं। पर हुक्मरानों का कहना था कि सिविल कंस्ट्रक्शन हो गया। मलाई खाई जा चुकी है। अब तितलियों को आना भी हो तो वो अपनी इच्छा से आएं। बाउन्ड्री वाल से वो आसानी से पहचान सकती है कि उन्हें कहां उड़ना है। यदि तितलियां आएंगी तो खुशबुदार फूल अपने आप उग आएंगे। पहले की योजना गलत थी कि पहले फूल फिर तितलियां। और फिर यह सरकार का काम नहीं है कि शेरों और चीतों के साथ अब तितलियों की भी चिन्ता करे। आगे अब चींटी और केंचुआ पार्क भी बनाएं क्या ? बनाना होगा तो चींटी और केंचुओं के लिए दो दो एकड़ के प्लाट पर एक एक बाउंड्री वाल बना देंगे। पैसा सेंक्शन हो तो देश विदेश के केंचुए लाए जा सकते हैं। चींटियां और केंचुए विदेशों में किस तरह के होते हैं इसके लिए एक अध्ययन दल भेजा जा सकता है। आखिर पशु पालन विभाग क्यों है। हमारा काम सिविल कंस्ट्रक्शन करना है वो हम हमेशा करने को तैयार हैं मगर ये तितलियां चीटिंयां और केंचुए इनसे मिलना क्या है यार ?
चारों तरफ सिविल कंस्ट्रक्शन की धूम है। गुलौआ ताल का विकास होकर उजड़ चुका है। अब रानीताल की बारी है। उसमें 18 करोड़ का धुंआ उड़ाने का लक्ष्य रखा गया है। तिलहरी में पूरा खेल परिसर तैयार है मगर कोई खेलने वाला नहीं है क्योंकि सिविल कंस्ट्रक्शन पूरा हो चुका है मलाई खाई जा चुकी है। आदिवासी छात्रों के लिए एक हॉस्टल बनाया गया नीमखेड़ा तरफ शायद मगर जब बना तो योजना खत्म हो गई। बिल्डिंग खड़ी है। वीरान। मलाई खाई जा चुकी है। संस्कृति थियेटर और राइट टाउन स्टेडियम बनकर तैयार हैं। कोई लेने वाला नहीं है। क्योंकि किसी ने मांगा तो था नहीं। मगर कोई चिन्ता नहीं। मलाई खाई जा चुकी है। सिविल कंस्ट्रक्शन हो चुका है। बाकी चूल्हे में जाए क्या करना है। जब तक जनता को अपनी जेब कटती नहीं दिखती तब तक हमारे पौ बारह हैं।
सामान्य मध्यमवर्गीय आदमी बड़े मॉल, मंहगी कारें, चमचमाती दुकानें, गगनचुंबी कंस्ट्रक्शन देखकर खुश रहता है, कहता है इनके जमाने में कितना विकास हो रहा है और एक सौ दस रूपये का पेट्रोल भराता रहता है।
डोरीलाल ’तितली प्रेमी’
22 01 2023
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