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Wednesday, 14 May 2025

आत्मा-परमात्मा पर कुछ फुटकर विचार

डोरीलाल काफी फुरसतिया किस्म के आदमी हैं। फालतू घूमते रहते हैं। जहां चार लोग दिखे वहीं बैठ गये। और ज्ञान प्राप्त कर लिया। आजकल ज्ञान प्राप्त करना बहुत आसान हो गया है। एक तो ज्ञानियों की संख्या काफी बढ़ गई है। चारों ओर ज्ञान का विस्फोट हो रहा है। और दूसरा सुभीता यह है कि किसी भी ज्ञानी के पास जाओ ज्ञान की क्वालिटी में कोई फर्क नहीं है। सभी के पास एक जैसा ज्ञान है। बात ये है कि ये ज्ञानी लोग पुराने जमाने के ़ऋषि मुनियों से बहुत मिलते जुलते हैं। जैसे पुराने जमाने के गुरूकुलों में एक ही ऋषि सभी विषयों का ज्ञान दे देते थे वही बात इन आज के ज्ञानियों के पास भी है। ये फिल्म, विज्ञान, इतिहास, कला और कलाकार, दर्शन, शिक्षा व्यवस्था, डाक्टरी, कानून और वकालत, आजादी की लड़ाई, नेहरू, गांधी, पटैल, भारतीय संस्कृति, धर्म आध्यात्म किसी भी विषय में ज्ञान बांट सकते हैं और एकदम मुफ्त। हां आपके पास फालतू लोगों की फालतू बातों के लिए फालतू समय होना चाहिए। 

तो ऐसे ही एक दिन एक बड़े भारी पंडाल में डोरीलाल पंहुच गए। एक बड़ा सा मंच बना था। सामने करीब तीन एकड़ के मैदान में कुर्सियां लगी हुई थीं। बड़ा ही सात्विक माहौल था। सभी कोई एक दूसरे को सात्विक प्रणाम कर रहे थे। सभी कार्यकर्ता श्वेत शुभ्र वस्त्र धारण किए हुए थे। सभी बड़े पवित्र पवित्र से लग रहे थे। कोई बहुत पवित्र आत्मा आकर वहां ज्ञान का प्रसार करने आने वाली थी। हजारों लोग जमा थे। उनके अंदर कौतुहल था जिन्हें हम लोग इतने सालों से टी वी पर देखते आ रहे हैं वे साक्षात देखने में कैसे होंगे ? सामने की सीटों पर गणमान्य लोग बैठे थे। ये लोग अपने मंहगे वस्त्रों में मंहगी कारों में बैठकर आए थे। पीछे स्कूटरों और आटो वगैरह से आए लोग सामान्य कपड़ों में बैठे थे। 

यहां गणमान्य लोगों के अलावा राजनैतिज्ञ भी थे। जो सबसे  झुक झुककर नमस्कार कर रहे थे। अमीरों के अलावा सामान्य मध्यवर्गीय लोग भी आए थे। ये लोग भी हर प्रवचन के श्रोता होते हैं। ये हर यज्ञ में पंहुच जाते हैं। इन्हें लगता है कि इनकी जीवन की गाड़ी के पहिये का पंचर कोई तो सुधार दे। कोई रामबाण दवा बता दे। कोई चमत्कारी योग बता दे। तो ये लोग भी कुर्सियों में डटे थे। डोरीलाल ने अंदाज लगाया कि इन व्यवस्थाओं में कई लाख रूपये खर्च हुए होंगे। आखिर कार लोगों की भलाई के लिए ये लोग सब इतना खर्च क्यों कर रहे हैं। हो सकता है ये परोपकार भी कोई बिजिनेस हो जिसमें आज लगाने पर कल डबल मिलता होगा। 

फिर इंतजार की घडियां समाप्त हुईं। वो वक्ता आईं। बड़ी सरलता से उन्होंने बात शुरू की। बहुत देर तक उन्होंने अच्छी अच्छी बातें बताईं। डोरीलाल को ये अच्छी बातें पहले से मालूम थीं तो अपना तो रिवीजन हो गया। माता पिता की सेवा करना चाहिए। अच्छे संस्कारों का निर्माण करना चाहिए। आत्मा कैसी होती है इसका विस्तार से सरल भाषा में वर्णन किया गया। आत्मा के गुण भी बताए गए। फिर बात पंहुच गई पूर्व जन्म पर। बताया गया कि पिछले जन्म में जो बुरे काम करोगे उसके कारण इस जन्म में कष्ट भोगना पड़ेगा। तब अगला जन्म सुधर जाएगा। पर सबसे बड़ी बात जो डोरीलाल को पता चली वो ये थे कि आत्मा भी शुद्ध नहीं होती। आत्मा भी पूर्व जन्म के विकार लिए रहती है। जैसे इस जनम में कोई भूकंप से मर गया तो अगले जनम में उसकी आत्मा डरी हुई होगी। शरीर आत्मा की वेशभूषा है। शरीर रूपी कपड़े को आत्मा छोड़ कर नए शरीर में चली जाती है। एक परिवार के बच्चे अलग अलग क्यों होते हैं क्योंकि हर बच्चे में अलग अलग तरह की आत्माएं प्रवेश कर जाती हैं। जैसे एक बच्चे के शरीर में साधु की आत्मा घुस गई तो वो साधु टाइप की हरकत करेगा और दूसरे बच्चे के शरीर में शैतान की आत्मा घुस गई तो वो शैतान टाइप की हरकतें करेगा। त्रेता द्वापर कलयुग वगैरह के बारे में भी बताया गया पर डोरीलाल को समझ में नहीं आया। सवाल ये है कि ये युग हैं लाखों सालों के। और मनुष्य है धरती पर दो लाख साल से। मगर जब आत्मा परमात्मा की बातें चल रही हों तो तर्क और बुद्धि की बातें करने से पाप लगता है।

पर डोरीलाल के मन में प्रश्न उठने लगे थे। ये आत्मा जब शरीर छोड़ती हैं तो दूसरे शरीर में कितनी देर मे जाती हैं ? तब तक कहां रहती है ? क्या भारतीय आदमी की आत्मा पाकिस्तान या ईरान या अमेरिका के बच्चे के शरीर मे जा सकती है। क्या आत्मा का भी कोई धर्म फिक्स होता है या वो किसी भी धर्म के मानने वाले के शरीर में जा सकती है। आत्मा क्या देश बदल सकती है ?

क्या शरीर में आत्मा होना जरूरी है ? यदि किसी शरीर में आत्मा न घुसी तो उस शरीर का क्या होगा ? जो लोग आत्मा परमात्मा और पुनर्जन्म को नहीं मानते उनका क्या होता होगा। बुद्व तो नहीं मानते थे तो उनकी आत्मा थी या नहीं और निर्वाण के बाद उनकी आत्मा का क्या हुआ ? 

आत्मा परमात्मा पर दार्शनिक चिंतन सैकड़ों सालों से हो रहा है। हम भारत में रहते हैं तो हमें भारत के लोगों की आत्मा के बारे में ठोस जानकारी है। आत्मा के कुछ प्रकार जन जन के बीच व्याप्त हैं जैसे महात्मा, दुष्टात्मा, भटकती आत्मा, शुद्धात्मा। और माखनलाल चतुर्वेदी जी को कहा जाता है ’एक भारतीय आत्मा’। तो यहां पर डोरीलाल का आत्माचिंतन समाप्त होता है। सब लोगा अपने अपने घर जाओ और घरेलू आत्माओं से निपटो। 

डोरीलाल आत्माप्रेमी

22 10 2023

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