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Wednesday, 14 May 2025

देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान

ठंड आते ही अब उत्तर भारत में प्रदूषण की चिन्ता सताने लगती है। दक्षिण में ठंड नहीं पड़ती तो प्रदूषण की चिन्ता होती है या नहीं यह मालूम नहीं। क्योंकि हम भारत के लोगों को अब तयशुदा सूचनाएं दी जाती हैं। सरकार तय करती है कि देश के नागरिकों को ये खबरें दी जा सकती हैं। और किस समाचार को कैसे देना है। जैसे प्रदूषण की खबर दिल्ली से प्रसारित होती है। तो यह तय है कि यह दिल्ली सरकार के विरोध में हो। और हरियाणा के पक्ष में हो। और पंजाब के विरोध में हो। जाहिर है कि पर्यावरण एक जटिल प्रश्न है। ज्योंहि धुआं उठा त्यांहि अलग अलग सरकारें ये प्रश्न उठा देती हैं कि ये धुआं कहां से उठता है। दिल्ली की सरकार कह देती है कि ये धुआं हरियाणा से उठता है। हरियाणा सरकार कहती है कि खबरदार जो हरियाणा का नाम लिया। धुआं पंजाब से उठ रहा है और तुम लोग हरियाणा का नाम लगा रहे हो। शर्म नहीं आती। वो दिन दूर नहीं जब पाकिस्तान से धुआं आने लगेगा और हमारी प्रदेशों की सरकारें निश्चिंत होकर कह सकेंगी कि भैया हम क्या करें, पाकिस्तान दुश्मन देश है। वही धुआं फेंक रहा है। जो दिल्ली को प्रदूषित कर रहा है।

इसी बीच दीवाली आ जाती है। आजकल यह न्यायपालिका और कार्यपालिका दोनों का सिरदर्द है। दिवाली में दिये जलते हैं। उनसे कोई दिक्कत नहीं। आजकल विभिन्न धर्मतीर्थों में मुख्यमंत्री लोग लाखों दिए जलाने का कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। उनसे कोई धुआं नहीं निकलता। उनसे कोई तेल नहीं जलता। फटाकों से बहुत प्रदूषण होता है। धुएं का भी और शोर का भी। क्षमा कीजिएगा ध्वनि का भी। गलती से उर्दू शब्द आ गया। अनजाने ही पाप हो गया। अंग्रेजी का आ जाए तो चल जाता है। बल्कि गर्व होता है। तो दिल्ली के कुछ नागरिक और कुछ नागरिकों के बच्चे याचिका लेकर अदालत चले जाते हैं। मामला एकदम भावनात्मक हो जाता है। बच्चों की करूण पुकार पर आदेश जारी हो जाते हैं। अदालत उसी शहर में रहती है। उसी हवा को ग्रहण करती है मगर जब तक बच्चे गुहार नहीं लगाते तब तक अदालत को पता नहीं चलता कि शहर में प्रदूषण है। याचिका के बाद तरह तरह के निर्देश जारी होते हैं। बम नहीं फोडे़ जाएंगे। ग्रीन फटाके बनाए जाएं। फटाकों के कारखाने बंद कर दिए जाएं। अब पुलिस और बाबू लोग घूम घूम कर देखें कि कोई बम तो नहीं फोड़ रहा। पकड़ साले को। अरे वो देख वो बच्चा फुलझड़ी जला रहा है। रोक उसे। क्या पाखंड है ? इस तरह से प्रदूषण से निपटोगे ?

भारत में यदि दीवाली मनाई जाती है और बच्चों को अथाह खुशी मिलती है तो वो फटाकों से। यहां तक कि बड़ों को भी। साल भर इंतजार चलता है। फिर जैसे जैसे दीवाली पास आती है तो इंतजार होता है कि कब फटाके आएंगे। पहले धूप में सुखाएंगे। फिर बार बार उन्हें निहारेंगे। शाम होते होते फोड़ना शुरू हो जाता है। बिना फटाकों के बच्चों की दीवाली की कल्पना ही नहीं की जा सकती। 

हम जिस लोक में जी रहे हैं उसे क्या कहेंगे। इस पाखंड इस ढांग को क्या कहेंगे? करोड़ों पानी की बोतलें रोज कचड़े में फेंकी जाती हैं। इससे प्लास्टिक कचरा नहीं बनता ? करोड़ों गाड़ियां धुआं फेंकती घूम रही हैं और चौराहे में 200 रू में पीयूसी सर्टिफिकेट बन रहा है। यदि ये सर्टिफिकेट है तो आपकी गाड़ी आक्सीजन फेक रही है और नहीं है तो 500 रूपये जुर्माना दो और खूब धुआं उड़ाओ। हर कुछ दिनों में नकली दवाओं की फैक्ट्री पकड़ी जाती हैं। देश का नागरिक नकली दवाई खा रहा है। घटिया दवाई खा रहा है। अस्पतालों में नकली दवाएं दी जा रही हैं। इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। जो अनाज हम खा रहे हैं जो सब्जियां हम खा रहे हैं वो जहरीले कीट नाशकों से लबालब हैं। बचके कहां जाओगे ? जहरीली शराब से हर प्रदेश में हर साल सैकड़ों मर जाते हैं। मसाले नकली हैं खाये जा रहे हैं और बेचे जा रहे हैं। इनकी जांचों की बड़ी बड़ी प्रयोगशालाएं बनाईं गई हैं। वो जांचें किए जा रही हैं। मगर सब चल रहा है। 

एक चीज जिसमें कोई मिलावट नहीं है वो है गरीबी और बेबसी। वो एकदम प्योर है। शुद्ध। इसमें भी विकास हो रहा है। पहले केवल आर्थिक गरीबी हुआ करती थी। अब मानसिक गरीबी का आंकड़ा आसमान छू रहा है। मन के गरीबों का गुणधर्म है कि वो सवाल करने की क्षमता खो देते हैं। वो भक्ति में लीन हैं। चरण वंदन और महाआरती में दिन रात मगन हैं। यही चाहिए है। अभी एक उद्योगपति ने ज्ञान दिया है कि युवाओं, कोल्हू के बैल बनो। सप्ताह में 70 घंटे काम करो। तुम युवा हो। मेहनत करो। हमारे मुनाफे के लिए तुम अपना जीवन कुर्बान कर दो। कर भी रहे हैं। शादी के लिए भी छुट्टी नहीं मिलती।  

काफी साल पहले की बात है दिवाली का दिन था। हम दो दोस्त बाजार में खड़े थे। सड़क किनारे मिठाई की दुकान लगी थी। एक औरत और उसकी आठ दस साल की बच्ची आकर खड़े हो गए। औरत बहुत साधारण साड़ी पहने थी। अपने मुंह में साड़ी का कोना दबाकर मुंह छुपा रही थी। बच्ची एक गंदा सा फ्राक पहने थी। औरत बच्ची को धकेल रही थी दुकान की तरफ। बच्ची बहुत छोटी थी मगर समझ रही थी कि वो दोनों औकात से बाहर की खरीददारी करना चाह रही हैं। काफी उहापोह के बीच अंत में डरते डरते लड़की ने दुकानदार को सिक्का देते हुए कहा ’आठ आने की मिठाई दे दो’।


डोरीलाल पाखंडप्रेमी

29 10 2023

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