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Thursday, 15 May 2025

दस्ताने पहनने वाले, न पहनने वाले

डोरीलाल के यहां कचरा उठाने वाला आया था। नंगे हाथों से कचरा उठा रहा था। बाहर कचरा गाड़ी खड़ी थी। उसमें कचरे वाली गाड़ी में सब कचरा डालो जी का प्रेरणास्पद गीत जोर जोर से बज रहा था। मैंने कचरे वाले से पूछा कि तुम दस्ताने क्यों नहीं पहनते ? उसने कहा अभी तक सरकार ने दिया नहीं है। मैंने कहा दस्ताने से तुम्हारे हाथों की सुरक्षा होगी। तुम्हें पहनना चाहिए। तुम्हारे स्वास्थ्य का सवाल है। उसने कहा हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। 

मैं कचरा उठाने वाले की बेफिक्री से प्रभावित हुआ। उसको जब सरकार देगी तभी पहनेगा। वरना उसके हाथों की चाहे जैसी दुर्गति हो उसे मंजूर है। उसके लिए दस्ताना एक औपचारिकता है। एक चोंचला है। इससे उसके हाथों की स्वतंत्रता बाधित होती है। पहले पहनो फिर उतारो। यही करते रहेंगे क्या ? डोरीलाल ने कचरे वाले से दोबारा नहीं कहा। कोई मतलब नहीं। यदि आप स्वयं की चिंता नहीं करते तो कोई दूसरा आपको दस्ताने क्यों पहनाएगा। बिल्कुल नहीं। 

अभी तीन लोग बैठे थे। अमेरिका में। बात केवल इतनी थी। दस्ताने की। अमेरिका कहता था कि हमने तुम्हें दस्ताने दिए। वरना तुम तो कब के निपट गए थे। दस्ताने का इतना बिल हुआ। चुकाओ। यूक्रेन ने कहा कि हओ ठीक है। माना कि तुमने दस्ताने दिए। तुम्हारे दस्ताने के बिना हम तीन दिन भी नहीं लड़ सकते थे। मगर अमेरिका ने कहा कि देखो बातों बातों में हमारा कर्जा न भूलो। वो तो चुकाना पड़ेगा। तुम अपने घर के बर्तन भांडे हमें दो। तुम्हारे पास बहुत हैं। सब निकालो। हम कर्जा वसूलने बैठे तो तुम चुका नहीं पाओगे। चलो हमारे दस्ताने पहनो। यूक्रेन ने कहा कि तुम्हारे दस्ताने के एहसान का ये मतलब नहीं है कि हम भूखे मरने लगें। हम यूरोप के दस्ताने पहन लेंगे। 

यूरोप में सारे यूरोपियन इकठ्ठे हो गये। बोले तुम्हें डरने की जरूरत नहीं है बच्चा। चढ़ जा बेटा सूली पर भला करेंगे राम। तू तो लड़ हम लगातार दस्ताने देते रहेंगे। 

उधर रूस कह रहा है कि तू दुनिया भर से दस्ताने मांगता फिर रहा है। अरे सीधे हमारे दस्ताने पहन ले और शांति से रह। मगर जेलेन्सकी की मजबूरी है। वो रूस का दस्ताना नहीं पहन सकता। उसकी सारी राजनीति ही रूस के दस्ताने न पहनने पर टिकी हुई है। यूक्रेन रूस का पड़ोसी है। यूक्रेन सोवियत संघ का हिस्सा हुआ करता था। रूस के बाद यूक्रेन ही सबसे बड़ा राज्य था। खूब संपन्न। जब राष्ट्रवाद की लहर उठी और सारे राज्य अलग अलग राष्ट्र बन गये तब भी एक सहमति से चलते रहे। यूक्रेन में रूस से दोस्ताना संबंध रखने वाले राष्ट्रपति को भगा दिया गया। जेलेन्सकी रूस से घृणा के आधार पर ही राष्ट्रपति बने हैं। वो रूस के दुश्मनों को अपना घर किराये पर दे रहे हैं। रूस पहले ही कह चुका है कि ये नहीं चलेगा। ये किरायेदार तुम नहीं रख सकते। यदि तुमने रखा तो हम तुम्हारा घर गिरा देंगे। सारी लड़ाई अब किराये के घर को गिरा देने की चल रही है। 

दस्ताने पहनने पहनाने की लड़ाई में हजारों नागरिक, बच्चे बूढ़े महिलाएं मारे जा रहे हैं। अर्थव्यवस्था तबाह हो रही है। यूक्रेन जैसा अमीर राज्य आज अमेरिका के कर्ज तले दबा हुआ है और ट्रंप की डांट खा रहा है। इधर तरक्की करते बांगला देश में खूब जातीय उन्माद भड़काया गया और अब तो सब कुछ साफ हो गया है कि बांगला देश ने अमेरिका का दस्ताना पहन लिया है। 

इजरायल के पास अमेरिका का दस्ताना है। इजरायल और फिलस्तीन का झगड़ा शाश्वत है। हमेशा चलेगा। तब तक चलेगा जब तक फिलीस्तीन पूरी तरह मिट नहीं जाएगा। इसमें हमास जैसे फिलीस्तीनी संगठनों का भी हाथ रहेगा। अभी जो कुछ गाजा में हुआ वो हमास की मूर्खता से हुआ। हजारों फिलिस्तीनी मारे गये। पूरा गाजा तबाह हो गया। रहने को घर नहीं बचे। जैसे किसी पहलवान को कोई बच्चा गुलेल से पत्थर मार दे और फिर पहलवान बच्चे के परिवार को मारे और घर गिरा दे। ये बच्चे का भोलापन नहीं मूर्खता है। 

इस दुनिया की दिक्कत ये है कि बड़े देश बड़े इसलिए हैं कि उनके पास हथियार बनाने के बड़े बड़े कारखाने हैं। बड़े बड़े हथियार व्यापारी हैं। उनके लिए जरूरी है कि देशों के बीच युद्ध हो। देशों के अंदर युद्ध हो। वो सहायता के नाम पर हथियार उधार देते हैं और बड़ा व्याज वसूलते हैं। बहुत सारे देश तो केवल हथियार खरीदने और कर्जा चुकाने, ब्याज चुकाने के लिए ही अस्तित्व में हैं। 

ये दोस्तियां, ये यारियां, ये देशों के दौरे, ये मदद के आश्वासन, ये शांति की कोशिशें सब दस्ताने पहनने और पहनाने के लिए होती हैं। सीरिया, लेबनान जैसे देशों में केवल युद्ध ही चल रहा है। कौन किससे क्यों लड़ रहा है मालूम नहीं है। बेरूत एक जमाने में पश्चिम का पेरिस कहा जाता था। आज तबाह हो चुका है।

लड़ाईयां केवल शांति से जीती जा सकती हैं। जातीय हिंसा, साम्प्रदायिक तनाव केवल मुहब्बत और भाईचारे के प्रसार से खत्म हो सकता है। जब तक पूरा समाज एकता, भाईचारे और प्रेम से नहीं रहेगा सुखी नहीं रह सकता। तरक्की नहीं कर सकता। हां उन्माद और बंटवारे से चुनाव जीते जा सकते हैं - जीतिये।

डोरीलाल दस्ताने प्रेमी

03 03 2025

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