डोरीलाल जी खूब मजा आ रहा है। खूब कामेडी हो रही है। हमारी जनता को जो पसंद है। वो हो रहा है। नए नए रूपों में कामेडी हो रही है। सबसे अच्छी बात ये है कि जिन पर गंभीर रोल करने की जिम्मेदारी है वो ही कामेडी कर रहे हैं। आखिर इस देश में गंभीर रोल कौन करेगा ? सब कामेडी कर रहे हैं।
फ्रांस ने राफेल बेचे। भारत ने खरीदे। कहा गया कि भारत के दलालों ने दलाली खाई। भारत के सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। कहा एकदम झूठ। कोई दलाली नहीं खाई गई। उधर फ्रांस में, भारत को राफेल बेचने के लिए दलाली खिलाने के आरोप में कई लोगों को सजा हो गई। भारत में दलाली खाने वाले आजाद हैं। खूब कामेडी हो रही है।
अमेरिका में अडाणी पर मुकदमा चल रहा है। अमेरिकन इन्वेस्टर से धोखाधड़ी का आरोप है। भारत के अधिकारियों को अडानी व अन्य ने ठेका लेने के लिए 250 मिलियन डालर घूस खिलाई है। अडाणी कह रहे हैं सब झूठ है। पर अमेरिका में घूस खिलाने पर मुकदमा चल रहा है। भारत में जिन लोगों ने 250 मिलियन डालर की घूस खाई उन पर कोई दाग नहीं है। कोई मुकदमा नहीं। आखिर राष्ट्रीय आय में वृद्धि हुई है। खूब कामेडी हो रही है।
भारत ने पाकिस्तान को सबक सिखाया। कहा कि पीओके वापस लेकर रहेंगे। इस बार निपटा देंगे। भारत के न्यूज चैनलों ने पाकिस्तान पर कब्जा कर लिया। फिर अचानक सीज़फायर हो गया। उधर डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका की अदालत में हलफनाफा देकर कह रहे हैं कि मैंने दोनों देशों को व्यापार का वास्ता देकर सीज़फायर करवाया। 11 बार कह चुके हैं। भारत कह रहा है कि नहीं पाकिस्तान गिड़गिड़ाया कि हमका माफी दे दो हमसे भूल हो गई तब हमने सीज़ फायर किया। खूब कामेडी हो रही है।
अब आइये लेटेस्ट कामेडी पर। मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनाव हुए। तीनां जगह विपक्ष को उम्मीद थी कि हम जीतेंगे। मगर ऐसा हारे कि बुरी तरह हारे। अब सवाल ये है कि कैसे हारे ? क्यों हारे ? जीतते जीतते हार कैसे गये ? मध्यप्रदेश का मामला अच्छा रहा। यहां हारने वालों ने कहा कि बेईमानी हुई है मगर हम चुप रहेंगे। महाराष्ट्र हरियाणा में विपक्ष ने काफी रिसर्च कर ली। कहा कि ये सवाल हैं इनके जवाब दो। तो जवाब देने वालों ने कहा कि सबकुछ ईमानदारी से हुआ है। हम जवाब नहीं देंगे। ज्यादा है तो कोर्ट चले जाओ। उनको मालूम है कि कोर्ट में अभी भी कौरव पांडव अपनी फाइलें लिए वकीलों के पीछे घूम रहे हैं।
तो ताजा मसला ये है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने महाराष्ट्र चुनाव को लेकर लोकसभा में प्रश्न उठाया। फिर आम जनता के बीच उठाया। चुनाव आयोग को लिखा। पहले के चुनाव आयुक्त शेरो शायरी कहकर निकल जाते थे। इस बार जो बने हैं उन पर डबल जिम्मेदारी है। उनको पिछले का भी बचाव करना है और अपना भी बचाव करना है। वो शायरी करने लायक ढीठ भी नहीं हैं। वो चुप रहते हैं। उनका पक्ष तय है। उनको जिनने चुना है उनके लिए उन्हें निष्पक्ष रहना है।
भारत में अखबार अब सरकारी विज्ञप्ति, सरकारी लेख, सरकारी भाषण और सरकारी विज्ञापन छापने के लिए छापे जाते हैं। इसके बाद जो जगह बचती है उसमें सरकार के अधिकारियों और मंत्रियों की चरण वंदना होती है। संपादक निकाल दिए गए हैं। बिजिनेस मैनेजर अखबार चलाते हैं। अखबार में काम करने वाले लोग अभी भी पत्रकार कहलाते हैं। सैकड़ों टी वी चैनल हैं। चैनलों में तू तू मैं मैं के मैच आयोजित होते हैं। कोई भरोसे लायक नहीं है। जनता परेशान कि असली खबर कहां से मिले ?
अब असल बात सुनिये। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक लेख लिखा और उसमें महाराष्ट्र चुनाव में धांधली के मुद्दे उठाये। महाराष्ट्र के दो अखबारों में छपे। बाकी न किसी अखबार ने उन मुद्दों के बारे में लिखा और न किसी चैनल पर चर्चा हुई। पूरी तरह ब्लैकआउट। इन मुद्दों पर जवाब देना चाहिए चुनाव आयोग को तो जवाब दिया महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फड़नवीस ने। मगर ये सज्जन तो इस धांधली के लाभार्थी हैं। जवाब तो चुनाव आयोग को देना चाहिए।
तो कामेडी यहां से शुरू होती है। एक समाचार एजेन्सी है एएनआई। प्राइवेट है पर सरकार के भरोसे की है। इसने चुनाव आयोग का जवाब रिलीज कर दिया। मगर एएनआई ने जो खबर जारी की है वो सूत्रों के हवाले से की है। चुनाव आयोग का यह तथाकथित जवाब एक सादे पन्ने पर बिना पैड, सील सिक्के और दस्तखत के जारी किया गया है। ये जवाब किसके पास है नहीं मालूम। केंचुआ चुप है। उसकी वेबसाइट पर भी यह जवाब नहीं है। इससे भारत में एक नई परंपरा का जन्म हो रहा है। जवाब भी दे दिया। जवाबदारी भी न रही।
चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। सरकार को शक था कि कहीं ऐसा चुनाव आयुक्त न बन जाए जो निष्पक्ष हो तो उसने प्रक्रिया बदल दी। अब दो रैफ्री सरकार के और एक विपक्ष का। वैरी सिम्पल। कोई भेदभाव नहीं। एक और मजेदार बात। भारत के मुख्य न्यायाधीश ने यह व्यवस्था दी कि एक प्रधानमंत्री रहेंगे, एक मैं खुद रहूंगा और नेता प्रतिपक्ष रहेगा तीनों मिलकर चुनाव आयुक्त चुन लेंगे। तो सरकार ने एक कानून बनाकर मुख्य न्यायाधीश जी को हटा दिया। अपना एक मंत्री रख लिया। उनको बुरा नहीं लगा। उनके सामने अपील की गई। उस पर सुनवाई का टाइम नहीं मिला और वो रिटायर हो गए। अभी भी इस मामले की सुनवाई नहीं हुई है। टाइम कहां है। खूब कामेडी हो रही है।
तो डोरीलाल जी अब सड़क पर आपको कोई कागज मिल जाए, बच्चे खेलते खेलते आपके पास कागज का राकेट फेंक दें, जिसमें कुछ लिखा हो तो अब उस कागज को अब सीरियसली लेना। ये भारत सरकार की सबसे उच्च कोटी की संवैधानिक संस्था का कोई जवाब हो सकता है जिसे सूत्र उड़ा रहे हों। आप उसे मूत्र समझ कर नकार न देना। भारत के उच्च संवैधानिक मूल्यों का सवाल है। भारत देश संविधान से चलता है।
डोरीलाल जी बाबा साहब तो संविधान लिख कर चले गये। और यहां संविधान के साथ कामेडी हो रही है।
भारतवासियां ये कामेडी नहीं है। ये ट्रेजिडी है।
डोरीलाल कामेडी प्रेमी
11 06 2025
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