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Sunday, 14 December 2025

हैप्पी न्यू इयर सोनम वांगचुक

कल तुम्हारी पेशी है। तुम्हें भी मालूम है कि इस पेशी में क्या होगा ? पहले की पेशियों में जो हुआ है उससे समझ आ गया है कि ये पेशियां चलती रहेंगी। तुम्हारा हैप्पी न्यू इयर वहीं जोधपुर में ही होगा। जैसा कि इतिहास बता रहा है कि तुम अभी कई हैप्पी न्यू इयर वहीं जेल में बिताओगे। अस्सी दिन से ज्यादा हो चुके हैं। पिछली पेशी के बारे में अखबारों में ये खबर छपी कि सोनम वांगचुक को 72 दिन जेल में हो चुके हैं। अखबारों में इससे ज्यादा कुछ नहीं छपा। ये 72 या अब 82 दिन तो राष्ट्रीय शर्म के हैं। ये शब्द अब अपना महत्व खो चुका है। किसी को किसी बात से शर्म नहीं आती।

पिछली पेशी में सोनम वांगचुक के वकील ने मांग की कि हुजूर सोनम वांगचुक जोधपुर जेल में बंद हैं। एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये उन्हें अपनी बात कहने का अवसर दिया जाए। सरकारी वकील साहब ने कहा कि हुजूर इससे तो बहुत ही गलत परंपरा शुरू हो जाएगी। हर ऐरा गैरा अपराधी ये मांग करेगा। आप लोग कहां तक सुनेंगे। अखबारों में बस इतना छपा है। हुजूर ने क्या कहा ये नहीं छपा है। इसीलिए ये जघन्य अपराधी जिससे राष्ट्र की सुरक्षा को बड़ा खतरा है अपना पक्ष रख सकेगा, इसका खुलासा नहीं हो सका है। अगली पेशी की तारीख दे दी गई है। ऐरे गैरे अपराधी के साथ यही सलूक होना चाहिए। किसी को किसी बात से शर्म नहीं आती।

आजकल वीडियो में अदालत की कार्यवाही दिखाई देती है। एक विशाल कक्ष है जिसमें 2 कुर्सिंयों में एक ओर न्यायाधीश बैठे हैं। दूसरी ओर एक भीड़ है जिसमें वकील, सहायक वकील, और पीड़ित या उनके रिश्तेदार खड़े हैं। माइक लगे हैं जिसमें बारी बारी से वकील साहबान आकर अपने मुवक्किल का पक्ष रखते हैं। सोनम वांगचुक नाम के अपराधी का मुकदमा उसकी पत्नी गीतांजलि लड़ रही है। वो निरीह घबराई महिला कभी वकीलों को देख रही थी, कभी जज साहबान को। वो हतप्रभ थी। ये बात क्या चल रही है ? वो बहुत उम्मीद से आई थी। सोनम वांगचुक का मुकदमा इस देश के नागरिकों को लड़ना चाहिए। लेकिन लड़ रही है उसकी पत्नी, अकेली। किसी को किसी बात से शर्म नहीं आती।

दो तीन पेशियां तो मुकदमा स्वीकार करने में ही निकल गईं। फिर मांग उठी कि सोनम वांगचुक ने अपना बयान लिखा है वो उसे पेश करने नहीं दिया जा रहा। कहा गया कि कर लो पेश। फिर एक दो पेशी में सोनम वांगचुक की पत्नी ने बताया कि उसे जोधपुर में अपने पति से मिलने नहीं दिया जा रहा है। तो कहा गया कि अच्छा चलो मिल लो। ये भी बताया गया कि सोनम वांगचुक को एक अकेले कमरे में रखा गया है। जहां मनुष्य जाति से उसका संबंध समाप्त हो गया है। अदालत ने यह बात भी सुन ली। फिर गीतांजलि वांगचुक ने बताया कि उसके साथ जो लोग आए हैं उन्हें परेशान किया जा रहा है और उनके साथ मारपीट की जा रही है। उनका पीछा किया जा रहा है और उनका जीना हराम है। गीतांजलि जब जोधपुर में पति से मिलने गयी तो उसके चारों ओर पुलिस लगी थी और उसे सीधे जेल ले जाया गया जहां दो आदमी उनके सिर पर खड़े रहे जब वो वांगचुक से मिलीं। वहां से उन्हें सीधे पुलिस के घेरे में वापस ट्रेन में बैठा दिया गया। जोधपुर में नागरिकों से मिलने नहीं दिया गया। भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहां सब आजाद हैं। मगर किसी को किसी बात से शर्म नहीं आती।

सोनम वांगचुक का अपराध क्या है ? उसे क्या करना चाहिए था जो उसने नहीं किया। उसने लद्दाख के लोगों की मांग उठाई जो वर्तमान सत्ताधारी पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में उठाई थी। लद्दाख में छठवीं अनुसूची लागू हो। इससे लद्दाख के लोगों को स्वायत्तता मिलती है। इसका उद्देश्य अपनी अनूठी संस्कृति, पर्यावरण, जल जंगल जमीन(जैसे ग्लेशियर) व भूमि अधिकारों की रक्षा और स्वायत्त जिला परिषदों के माध्यम से कानूनी/आर्थिक शक्तियां प्राप्त करना है। इस मांग के लिए सोनम ने हर तरह से अपनी बात पंहुचाई। सबसे बड़ी बात कि सोनम वांगचुक वर्तमान सत्ता के साथ रहे। मगर जब छठवीं अनुसूची की मांग नहीं सुनी गई तो उन्होंने सैकड़ों लद्दाखियों के साथ लेह से दिल्ली तक पदयात्रा की। दिल्ली में उनसे कोई नहीं मिला। और वो सारे पदयात्री सड़कों पर पड़े रहे। और किसी को ज्ञापन सौंप कर वापस चले गए। फिर कुछ दिन इंतजार के बाद उन्होंने भूख हड़ताल शुरू की। खुले आसमान के नीचे गिरती बर्फ में पड़े रहे। कोई सुनवाई नहीं हुई। इस बीच लद्दाखियों ने हड़ताल और बंद का आव्हान किया। इसे सोनम वांगचुक ने नहीं किया था। इस आंदोलन में गोली चली। लोग मरे। सोनम वांगचुक ने बार बार शांति की अपील की। भटके नौजवानों को शांति मार्ग अपनाने का आव्हान किया।
इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो गया। इसलिए सोनम वांगचुक जेल में हैं। उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगा है। कई पेशी तो इसी में निकल गईं कि बताओ सोनम वांगचुक का अपराध क्या है ? उन पर आरोप क्या है ? सोनम वांगचुक जेल में है किसी को जल्दी नहीं है। न सरकार को, न अदालतों को। मगर वंदे मातरम पर बहस चल रही है। किसी को किसी बात से शर्म नहीं आती।

पेशियां चलती रहेंगी। गीतांजलि और उनके साथी दिल्ली की सड़कां पर लुटते पिटते रहेंगे। अब सत्ता को सब बातें पता चल गईं हैं। उसका स्कूल अवैध है। उसे विदेशी धन मिलता है। उसका पाकिस्तान से संबंध है। शायद बुलडोजर स्कूल के गेट पर खड़ा है। किसी को किसी बात से शर्म नहीं आती।

ये सोनम वांगचुक की परीक्षा नहीं है। ये देश की न्याय व्यवस्था की परीक्षा है। ये देश की सत्ता की परीक्षा है। और ये हम सब नागरिकों की परीक्षा है। हमारे चुप रहने की पराकाष्ठा की परीक्षा है।

डोरीलाल शर्म प्रेमी
13 12 2025

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