डोरीलाल जी सात लोग आम से खास हो गए। आपको पता चला ? बिलकुल पता चला। इस देश में अब यही तो समाचार है। मुख्यधारा में शामिल होना ही आज की धारा है। पर आपको ये पता नहीं होगा कि जो सात राज्यसभा सांसद लोग आम आदमी पार्टी से खास आदमी पार्टी में गए हैं उनकी हैसियत क्या है ? उनकी हैसियत ये है कि वो अमीर लोग हैं। ये कुकर्म अमीरों को ही शोभा देता है।
कितने अमीर ?
ये नहीं मालूम भाई पर अमीर तो होंगे। तभी तो अमीरों की पार्टी में गए हैं। नाम भले ही आम आदमी पार्टी हो मगर उसका सांसद तो अमीर ही होगा। गरीब आदमी को, पढ़े लिखे को कोई क्यों सांसद बनाएगा ? उससे पार्टी को क्या फायदा ? नमूने के लिए कुछ गरीब सांसद बनाना पड़ते हैं। तो बनाते हैं। वो रिंग मास्टर के कहने पर मेज थपथपाते हैं और साहब के सामने कोर्निश बजाते हैं। अमीर आदमी अमीर आदमी होता है। वो मंहगे में बिकता है या फोकट में बिकता है। सस्ते में नहीं बिकता। जब फोकट में बिकता है तो डर के मारे बिकता है।
कांग्रेस के प्रवक्ता ने अपनी प्रेस कान्फ्रेंस करके बताया है कि इन सातों की औसत कुल सम्पत्ति ( एवरेज नैट वर्थ) 818 (आठ सौ अठारह) करोड़ रूपया है। ये आम आदमी के सांसद थे। ये व्यापारी हैं, खिलाड़ी हैं, प्रोफेशनल हैं। पंजाब के आम आदमी पार्टी के 90 विधायकों ने यदि इन्हें न चुना होता तो ये सांसद न होते। इन्हें अपनी पार्टी से दगा करते शर्म न आई।
डोरीलाल जी ये बताइये कि इन लोगों ने पार्टी बदल ली इससे आपको क्या शिक्षा मिलती है ?
खूब पढ़ा लिखा होने से, अच्छी अंग्रेजी बोलने से, गौर वर्ण होने से, ऊंची जाति का होने से और खूब पैसे वाला हो जाने से आदमी ऊंचा नहीं हो जाता है। उसके कर्मों से वह उसकी उच्चता या नीचता तय होती है। जिनने उसे चुना, उंचाई तक पंहुचाया, उनसे जिसने दगाबाजी की वो नीच ही कहलाएगा।
देश में अमृतकाल चल रहा है। सब कुछ खुल्लमखुल्ला हो रहा है। सबके पूरे कपड़े उतर चुके हैं। पूर्ण दिगंबर अवस्था। सत्ता के साथ सब हैं। जनता के साथ कोई नहीं है। न्याय की मूर्तियां भग्नावस्था में पड़ी हैं। न्याय की मूर्तियों को अन्याय करते हुए बिलकुल शर्म नहीं आती। वकील तर्क देकर थक चुके हैं, वकालत छोड़ रहे हैं। अदालत में केस लगते ही पता चल जाता है कि जज कौन होगा और निर्णय क्या होगा ? जज अपने खिलाफ मुकदमा खुद सुनते हैं और अपने को निर्दोष मुक्त करते हैं। अब राजतंत्र वापस आ गया है। पूरा देश छोटे छोटे राजाओं के सूबों मंे बदल गया है। हर सूबे के राजा की अपनी सेना है। चाहे जब एक राजा की सेना दूसरे राजा के प्रदेश में घुसकर छापा मारती है और नागरिक को रातोंरात अगवा कर अपने राजा के सामने पेश कर देती है।
अब दिल्ली का बादशाह तय करता है कि उसे कौन सा राज्य जीतना है। वो अपनी अक्षौहणी सेना लेकर टूट पड़ता है। वो फतह करके ही लौटता है। इस बार बंगाल राज्य जीतना तय किया गया है। सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग, हाई कोर्ट पूरे देश की पुलिस, तरह तरह की अर्ध सैनिक बल, एनआईए, सीआरपीएफ, बीएसएफ बख्तरबंद गाड़ियों और मशीनगनों, एके 47 आदि से लैस कर बंगाल के सूबे पर हमला किया गया है। पता नहीं क्यांे टैंक और फाइटर जैट का उपयोग नहीं किया गया। बंगाल तो समुद्र किनारे है। वहां तो नौसेना ही नहीं बल्कि अमेरिका के जार्ज वाशिंगटन, अब्राहम लिंकन जैसे जहाजों को भी लगाया जा सकता है। वोटिंग होना है। कोई मजाक है ? पूरे देश से छंटे हुए पुलिस अधिकारी, आई ए एस बुलाए गए। लाखों वर्दी धारी पूरे प्रदेश में गांव गांव तक छा गए। पूरा प्रदेश छावनी बना दिया गया। चारों ओर वोटरों को दौड़ा दौड़ा कर, लाठियों से पीट पीट कर शांतिपूर्ण मतदान करवाया गया। लुंगी और पेंट से पहचान की गई।
तृणमूल की चुनाव सलाहकार कंपनी आईपैक के यहां छापा मारा गया। न्यायमूर्तियां अभी भी रेशा रेशा अलग कर रही हैं कि ममता बनर्जी ने ईडी की चाल क्यों फेल की ? उन्हें क्या हक ? उसी कंपनी के संस्थापक को चुनाव से पहले गिरफ्तार कर लिया गया और चुनाव खत्म होते ही सुबह बिना किसी विरोध के निचली अदालत ने ही छोड़ दिया। शाम को मजिस्ट्रेट को आत्मज्ञान हुआ। उसने कहा गलती से छोड़ दिया। अंदर करो। धन्य है न्याय की देवी। 90 लाख वोटरों के नाम काट दिए गए। 27 लाख लोगों ने सारे कागज जमा कर दिए तो भी वोट देने के काबिल नहीं माने गए। बड़ी कोर्ट कहती है कि इस बार नहीं तो अगले बार वोट दे देना। फिर वोट की गिनती की भी क्या जरूरत ? फिर चुनाव की जरूरत ही क्या है ? जब 27 लाख वोटर वोट नहीं डाल सकते तो लाख पचास हजार की हार जीत का भी क्या मायने है। पहले वोटर सरकार चुनते थे। अब सरकार वोटर चुन रही है। पूरा चुनाव सत्ता का एक क्रूर हिंसक नग्न नृत्य है।
इस समय भाजपा का अश्वमेघ यज्ञ चल रहा है। पिछले दोे चुनावों से भाजपा का घोड़ा बंगाल में घुस रहा है। सब राज्यों ने घुटने टेक दिए। बचे हुए राज्य भी देर सबेर घुटने टेक देंगे। भाजपा के पास चुनाव जीतने का फार्मूला, पैसा और मशीनरी सब है। डोरीलाल की इच्छा है कि भाजपा ये सभी चुनाव जीत जाए। रोज रोज का टंटा खत्म हो। राजतंत्र में चुनाव की जरूरत क्या है। जब अंग्रेजों ने एक के बाद एक युद्ध जीतकर पूरे भारत पर कब्जा कर लिया उसके बाद आराम से दो सौ साल भारत को लूटा। आप लोग भी पूरा भारत जीत लें फिर आराम से लूटें।
वो देश का चुनाव जीत रहे हैं। मगर देश के साम्प्रदायिक बंटवारे और गरीबी से पूरा देश हार रहा है।
आईये प्रार्थना सभा करें। लोकतंत्र को श्रद्धांजलि अर्पित करें।
डोरीलाल चुनाव प्रेमी
30 04 2026

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