Search This Blog

Wednesday, 14 May 2025

मामा शराब पीने दे अहाते में बैठकर

                                 मामा शराब पीने दे अहाते में बैठकर

या वो जगह बता दे जहां पर पुलिस न हो

मध्यप्रदेश सरकार ने नई शराब नीति की घोषणा कर दी है। इसके अंतर्गत अहाते बंद कर दिए जाएंगे। आप लोगों को मालूम ही होगा कि मध्यप्रदेश में एक अनोखी सुविधा थी। आप शराब दुकान से पदार्थ खरीदिये और सामने आपको बोर्ड दिखेगा ’बैठकर पीने की उत्तम व्यवस्था’। इस व्यवस्था का लाभ उठाइये। यह व्यवस्था मध्यप्रदेश में बीसों साल से है और इसकी जनक वर्तमान विरोधी पार्टी है। पर उस पर दोषारोपण न करके वर्तमान सत्ता ने जिस सौजन्यता और सहिष्णुता का परिचय दिया है उसके लिये मध्यप्रदेश के सभी मदहोश उनका शुक्रिया अदा करते हैं। 

मध्यप्रदेश में मद्यपान सस्ता है, सुलभ है, जन जन के बीच व्याप्त है। सुबह जब दूधवाले दूध बेचना शुरू करते हैं तभी से मद्य की बिक्री भी प्रारंभ हो जाती है। मतलब जनता के सामने स्पष्ट विकल्प सुबह से ही मौजूद रहते हैं। दूध में नशा नहीं है। शराब में है। दूध की बिक्री थोड़े समय बाद बंद हो जाती है मगर उसकी अहर्निश चालू रहती है। 

मध्यप्रदेश सरकार ने गरीबों और अमीरों के बीच खाई मिटाने के लिए अनेक कार्य किए हैं। इसी के तहत अब देशी शराब पीने वालों को किसी हीन भावना का शिकार होने की जरूरत नहीं रही है। देशी विदेशी का अन्यायपूर्ण भेदभाव खत्म कर दिया गया है। अब देशी विदेशी का काउंटर मध्यप्रदेश में एक ही है। इससे जहां विदेशी शराब दुकानों का जो शो रूम टाइप का अभिजात्यपना था वो मिट्टी में मिल गया। आप कितनी मंहगी कार में आकर कितनी ही मंहगी शराब खरीदें आपको वहीं से खरीदना है जहां से मंहगू पौव्वा खरीद रहा है।  

मध्यप्रदेश में और अब तो पूरे देश में सरकार के द्वारा उठाये गये कदमों के स्वागत में अभियान चलाने की परंपरा बन गई है। उधर नई नीति इधर नीति के लिए अभियान। तो नई शराब नीति के समर्थन में भी अभियान चलाया जा रहा है। ये नई शराब नीति का उद्देश्य नई चुनाव नीति है। कुछ समय पूर्व भूतपूर्व महिला मुख्यमंत्री शराब दुकानों पर पत्थर फेंक रही थीं। इस संविधान सम्मत कार्य से वर्तमान मुख्यमंत्री को प्रेरणा मिली कि कुछ किया जाए। चुनाव सिर पर हैं। हर तरह के विरोधी की काट निकालना है। 

सवाल ये है कि आदमी पिये कहां ? दुकान है वहां से खरीद ली। अहाता बंद है। अब जाएं तो जाएं कहां, समझेगा कौन यहां दर्द भरे दिल की जुबां। जेब में कागज में लिपटी शीशी रखी है। सामने ठेला खड़ा है चना चबेना बिक रहा है। मगर पी नहीं सकते। यदि पी तो कानून टूटेगा। डोरीलाल ने पता किया कि शराब बेचना और खरीदना जुर्म नहीं है तो पीना जुर्म कैसे है ? यदि सड़क पार्क आदि सार्वजनिक स्थान पर पीते हैं तो जुर्म है। हां आप बढ़िया घर में पियो तो कोई जुर्म नहीं। घर के बाहर दूसरे के घर में पी सकते हो लेकिन पीकर गाड़ी नहीं चला सकते वो जुर्म है। 

हमारे देश में शराब पीना बुरा माना जाता है। मगर ये बुरा काम खूब होता है। शराब पीने वाले के मन में ये बैठा रहता है कि वो एक बुरा काम कर रहा है। प्रसिद्ध गायक श्री गुलाम अली इसी संदर्भ में कहते हैं कि 

हंगामा है क्यों बरपा थोड़ी सी जो पी ली है 

डाका तो नहीं डाला, चोरी तो नहीं की है

शराब की बिक्री से सरकार को आय होती है। शराब पीने के बाद शराबी के कार्यां से पुलिस को आय होती है। अधिक शराब पीने वालों से डाक्टरों और स्वास्थ्य विभाग को भी लाभ होता है। सरकार द्वारा शराब की बुराई पर नुक्कड़ नाटक करवाये जाते हैं इससे कलाकारों को लाभ होता है। समाज कल्याण विभाग द्वारा नशा मुक्ति केन्द्र चलाए जाते हैं। अर्थात् शराब व्यापार समाज के लिए लाभदायक है। 

उदारीकरण के कारण हमारे समाज में अनेक परिवर्तन आए हैं। नए नए नशों का ईजाद हुआ है। घर घर में नशा पंहुचा है। घर में जो देखते हैं उससे प्रेरणा लेकर बच्चे भी शराब दुकानों में बियर से शुरूआत करते हैं। नशा नशा होता है। यही कुछ दिनों में आगे बढ़कर फुल नशे में तब्दील हो जाता है। मध्यवर्ग के पास जब पैसा आता है तो उसे ’ऐश’ करने की सूझती है। फिर शराब पी जाती है और बटर चिकन खाया जाता है। 

उपसंहार

डोरीलाल का यह निबंध यहां समाप्त होता है। अब हर मध्यप्रदेशवासी का कर्तव्य है कि वो नई शराब नीति को सफल बनाये। चाहे देशी हो या विदेशी अधिकृत दुकान से खरीदे और अपने अधिकृत घर में ही पिये। कानून का पालन करे नहीं तो आप जानें आपका काम जानें। अगली नई शराब नीति अगले चुनाव के निपट जाने पर ही आएगी। तब तक अहाते के बारे में न सोचें। सब्र रखें। 


डोरीलाल ’शराबप्रेमी’

27 02 2023

No comments:

Post a Comment

न्याय का बैडमिन्टन

डोरीलाल जी, बैडमिन्टन के खेल के बारे में कुछ प्रकाश डालिये।             बैडमिन्टन एक खेल है जिसमें एक कोर्ट होता है। एक या दो खिलाड़ी आमने स...