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Wednesday, 14 May 2025

अगले साल तक के लिए बजट को गुडबाई

भारत के मध्यवर्ग को तरह तरह के नशे की आदत है। क्रिकेट का नशा सबसे गहरा है। फिर फिल्म है और फिर धार्मिक समारोह हैं। इसमें डूबे डूबे वो पूरा साल ही नहीं पूरा जीवन निकाल देता है। जिस मध्यवर्ग की डोरीलाल बात कर रहे हैं उसे खाना, रोजगार, व्यापार और धन की कोई समस्या नहीं है। उसकी समस्या बी पी, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, घुटना, बायपास, नेचुरोपैथी, आत्मा की शांति, तरह तरह के बाबा, अंग्रेजी बोलने वाले बाबा, योग और योगनिद्रा कराने वाले, मार्निंग वॉक, धारा 370, कश्मीर, पाकिस्तान, रामदेव, और नरेन्द्र मोदी हैं। इस बीच में उसे छोटे छोटे नशे के डोज भी दिए जाते हैं। उनमें से एक है बजट। यह हर साल प्रायः एक फरवरी को आता है। बजट के पहले ही तरह तरह की संभावनाएं व्यक्त की जाती हैं। व्यापार प्रतिनिधि वित्त मंत्री से मिलते हैं। मगर मध्यवर्ग चाहे वो नौकरी पेशा हो या व्यापारी उसके लिए बजट मतलब इन्कम टैक्स। फिर ये बात हवाओं में तैरने लगती है कि इस बार स्लैब बदलने वाला है। बहुत फायदा होने वाला है। 

फिर एक दिन बजट पेश होता है। एक जमाने में मनमोहन सिंह ने एक बजट पेश किया था तो कहा गया था मनमोहन का मनमोहनी बजट। मगर मध्यवर्गीय आदमी केवल इन्कम टैक्स में राहत से मतलब रखता है। मध्यवर्ग पूरी जनसंख्या का सबसे छोटा वर्ग है। लगभग नगण्य मगर टी वी हो या अखबार सबमें वही छाया रहता है। 

इस बार के बजट से पहले ही अखबार नवीसों और टी वी वालों को तैयारी करा दी गई थी कि इन्कम टैक्स के बारे में ही बात होगी। तो भारत के सबसे बड़े अखबार ने हैडलाइन लगाई कि भारत के 90 प्रतिशत लोगों को अब टैक्स नहीं देना होगा। यह तारीफ थी कि विडंबना। यदि टैक्स नहीं होगा तो आय कहां से होगी ? भारत में 86 करोड़ लोगों को फोकट खाना खिलाया जा रहा है। भारत में अधिकांश लोगों की आय 10,000 रूपये नहीं है। भारत में जो व्यक्ति रू 25,000 कमाता है वो भारत के सबसे ज्यादा कमाने वालों के स्लैब में आता है। तो नब्बे प्रतिशत से ज्यादा तो वैसे भी टैक्स नहीं देते हैं। 

मगर डोरीलाल को इस बात की प्रसन्नता है कि भारत का मध्यवर्ग बजट के नशे में आज भी डूबा हुआ है। बजट प्रस्तुत हो गया लेकिन उसे मालूम नहीं कि पिछले साल के बजट में जो कहा गया था उसमें से कितना काम हुआ ? किस मद में कितना खर्च हुआ ? हमारा रक्षा बजट बढ़ा कि घटा, शिक्षा स्वास्थ्य, निर्माण में क्या हुआ और क्या होने वाला है। पहले बजट में बताया जाता था कि कितना पैसा आएगा और कहां कहां कितना खर्च होगा। इस बजट में क्या क्या मंहगा होगा और क्या क्या सस्ता होगा। देश में मंहगाई क्यों है और बेरोजगारी घटाने के लिए क्या किया जाएगा ?

इन बातों को सोचने और सवाल पूछने की जगह अब हम अपने मंदिरों को भव्य बनाने और उसमें लाखों दीपक जलाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने में लगे हैं जिसमें विश्व में हमें कोई चुनौती नहीं है। चलते चलते डोरीलाल आपसे एक बात पूछ रहे हैं। पहले एक रेल बजट था जो अलग से पेश होता था अब उसे मुख्य बजट में शामिल कर दिया गया है। क्या आपने रेल बजट के बारे में एक लाइन भी सुनी ?


डोरीलाल ’बजटप्रेमी’   

20 02 2023


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