सभी खुश हैं। होली जल रही है। हुड़दंग चल रहा है। काहे की होली जल रही है ? क्यों जल रही है ? इसके पहले कब कब जली ऐसी होली ? इस होली में कौन जल रहा है ?
नाच चल रहा है। होली जल रही है। सभी झूम रहे हैं। मस्त हैं। डी जे की दिल दहलाती आवाज है। उसमें सबकुछ अनसुना है। कोई कितना भी चीख कर बोले - नहीं सुना जाएगा। केवल डी जे की आवाज सुनी जाएगी।
ये डी जे किसका है। ये डी जे एक नहीं है। डी जे अनेक हैं। पर उनकी आवाज एक है। अनेकता में एकता है। ऐसी एकता कभी नहीं देखी। सारे डी जे कह रहे हैं। होली है। तो होली है। हो ही रही है। आवाज इतनी तेज है कि कोई कहे कि नहीं ये होली नहीं है तो उसे सुनेगा कौन।
डी जे के सामने नाच जारी है। हजारों लाखों लोग डी जे की धुन पर नाच रहे हैं। सरकारी गैर सरकारी सब नाच रहे हैं। डंडा नाच रहा है। तोप नाच रही है। न्याय नाच रहा है। आयोग नाच रहे हैं। बुलडोजर नाच रहे हैं। होली है।
सौ भर्तियों के लिए दस लाख फार्म भरे जा रहे हैं। करोड़ों रूपये की फीस ली जा रही है। फिर पेपर आउट हो रहे हैं। नहीं हो रहे तो परीक्षा का परिणाम नहीं आ रहा। परिणाम आ रहा है तो इंटरव्यू नहीं हो रहा। इंटरव्यू हो गया तो चुने गये की ज्वाइनिंग नहीं हो रही। ज्वाइनिंग मांगो तो लाठियां पड़ रही हैं। नौजवान सिर फुड़वाकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। दचेड़ दचेड़ कर मारे जा रहे हैं। मगर होली हो रही है। सब नाच रहे हैं। डी जे बजे जा रहा है। बजे जा रहा है। नौजवान कह रहे हैं , भले ही हम भूखे मरें, नौकरी न मिले मगर डी जे अच्छा बज रहा है। ऐसा डी जे कभी नहीं बजा।
डाक्टर बनने की फीस, इंजीनियर बनने की फीस करोड़ों में पंहुच गई। मगर होली जल रही है। नौजवान और उनके मां बाप डी जे की धुन पर नाचे जा रहे हैं। कोई शिकायत नहीं -देश की सबसे बड़ी नौकरी डिलीवरी बॉय की है। डाक्टर इंजीनियर बनना सपना है। वो करोड़पतियों के लिए है। मगर कांवड़ यात्रा तो है। वो तुम्हारे लिए है। लो कांवड़ और निकल पड़ो और डी जे की जय बोलो।
करोड़ों खर्च करके बना डाक्टर करोड़ों नहीं कमायेगा तो क्या करेगा ? जब करोड़ों कमाना है तो डी जे की जय बोलेगा और डी जे की धुन पर नाचेगा। उसके करोड़ों कमाने की व्यवस्था डी जे करेगा। आयुष्मान भव। बीमार पड़ो, अस्पताल जाओ और बिल बनवाओ। हम देंगे पैसा। फिर डाक्टर मरीज सब कहेंगे। होली है। डी जे बजता रहेगा। सब नाचते रहेंगे।
दुकानों में यूरिया नहीं है। किसान परेशान है। यहां से वहां दौड़ रहा है। फसल आ गई तो दाम नहीं है। सब्जियां सड़कों पर फेंक रहा है। खेतों में सड़ा रहा है। मगर डी जे पर नाच रहा है। होली है। जब होली है तो नाचो फिर शिकायत कैसी ? और शिकायत है भी कहां ?
प्रदेश पर कर्ज बढ़ रहा है। देश पर कर्ज बढ़ रहा है। मगर देश शान से आगे बढ़ रहा है। कभी कभी तो दुनिया की सबसे बड़ी इकानामी बनने से दो कदम ही दूर बचता है। नौकरी नहीं है। व्यापार ठंडा है। मगर देश दुश्मन से सुरक्षित है। और दुश्मन देश की जनता भूखों मर रही है। हर्ष की लहर है। बजाओ रे डी जे बजाओ। नाचो रे होली है। ये कैसा नशा है।
मुफ्त मुफ्त मुफ्त, सब कुछ मुफ्त। खाना फ्री शादी फ्री। तीर्थयात्रा फ्री। सोने से मढ़े मंदिरों का तोहफा। हर प्रदेश हर शहर हर संभाग में फाइव स्टार मंदिर में सीधे ईश्वर से साक्षात होने की सुविधा। इतना सबकुछ हो तो फिर बजने दो डी जे। होली है।
कारखाने बंद। रोजगार बंद। छोटे व्यापार बंद। दो हजार के नोट गायब। कारें बन रही हैं। कारें बिक रही हैं। देश खुशहाल है। इससे बड़ा प्रमाण क्या है ? डी जे बजाओ। खूब नाचो गाओ। धर्मध्वजा लहराओ। त्रिशूल तमंचे लहराओ। मंदिर मस्जिद करो। डी जे बज रहा है। होली जल रही है।
मंहगाई है नहीं और है तो कितनी खूबसूरत है!
हवा प्रदूषित, पानी जहरीला, खाना मिलावटी, दवाएं नकली पर होली चल रही है।
रोजगार हमें चाहिए नहीं। हमें मंदिर चाहिए। हमारे डी जे भगवान हैं न।
उद्योग धंधे बंद हैं। उत्पादन घट गया है। निर्यात घट गया है। आयात बढ़ गया है। मगर देश तरक्की कर रहा है। देशवासी खुश हैं। व्यापारी खुश हैं। डी जे बज रहा है। होली चल रही है।
कवि सम्मेलन हो रहे हैं। संगीत संध्या हो रही हैं। नाटक हो रहे हैं। फिल्म बन रही हैं। हर जगह डी जे बज रहा है। होली खेली जा रही है। सभी रंगों में सराबोर हैं। रंगीन रंगीन टोपियां हैं। एकदूसरे को पहनाई जा रही हैं। सबके ऊपर डी जे बज रहा है।
सामान्य संगीत कभी बजेगा या सबकुछ डी जे में डूब जाएगा।
डोरीलाल 'DJप्रेमी’
13 03 2023
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