डोरीलाल राजकीय यात्रा पर पुणे पंहुचे। स्टेशन पर उनका भव्य स्वागत उनके सुयोग्य पुत्र ने किया। स्टेशन पर रैड कार्पेट बिछा हुआ था परंतु अत्यंत भीड़ के कारण दिखाई नहीं पड़ रहा था। स्टेशन पर तिल धरने को जगह नहीं थी। पुणे के लिए साधारण रेलगाड़ी नहीं है। स्पेशल ट्रेन हैं। सप्ताह में एक बार चलती है। इनमें किराया दुगना है। ट्रेन के डिब्बे पर लिखा था मरता क्या न करता। डोरीलाल के सौभाग्य से ट्रेन 5 घंटे लेट पंहुची। वैसे ये आठ दस घंटे लेट आती है।
राजकीय आवास पंहुचने के बाद डोरीलाल जी ने विश्राम किया। संध्या समय डोरीलाल जी ने राजकीय अतिथि के रूप में पुणे के राष्ट्राध्यक्ष से शिष्टाचार भेंट की। उनके समक्ष लोकनृत्य पेश किए गए। पुणे के कनिष्ठ अधिकारियों से जबलपुर के कनिष्ठ अधिकारियों ने द्विपक्षीय समझौतों पर चर्चा की। उन लोगों ने सुस्वादु भोजन किया और उन्हें जबलपुर आने का न्यौता दिया। चर्चा के दौरान पाया गया कि पुणे को महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी कहा जाता है। इस पर उन्हें गर्व है। जबलपुर को संस्कारधानी कहा जाता है। इस पर हमें गर्व है। हमें इस बात पर भी गर्व है कि जबलपुर के पचासों हजार लोग पुणे में रहते हैं परंतु पुणे जबलपुर के बीच न ट्रेन है न हवाई जहाज। हमें भी गर्व है कि सरकार के पास कोई हवाई जहाज और हवाई अड्डा नहीं है मगर कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री हैं। सरकार का निजी कंपनियां पर, हवाई किराये पर, यहां तक कि हवाई अड्डे के चाय बेचने वाले और कार टैक्सी स्टैंड वाले पर भी कोई नियंत्रण नहीं है मगर मंत्री गण हैं और उनका राजपाट है।
दोनों शहरों के प्रतिनिधियों ने आपसी चर्चा में पाया कि दोनों के बीच व्यापार की अच्छी संभावनाएं हैं। पुणे की ओर से वड़ा पाव, मिसल पाव, भेल, थालीपीट, भाकरी लाडू आदि के निर्यात का प्रस्ताव दिया गया। जबलपुर की ओर से खोवे की जलेबी, बंगाली मिठाई, समोसे, आलूबंडे, प्याज कचौरी, मुंगौड़े का प्रस्ताव दिया गया जिसे माना गया। बिरयानी, मटन और चिकिन के व्यंजनों पर भी चर्चा हुई जिससे चर्चाकारों के मुंह में पानी आ गया मगर इस बात पर सहमति हुई कि आयात निर्यात खूब हो पर इसे गुप्त रखा जाए जैसे भारत बीफ निर्यात का सिरमौर है पर चुप्पी रखी जाती है।
जबलपुर के प्रतिनिधि ने बताया कि हमारे यहां अस्त्र शस्त्र निर्माण का गृह उद्योग है। उसे हम विकसित करना चाहते हैं। हमारे यहां अच्छे किस्म के कट्टे, रामपुरी चाकू, बका, तलवार, और सुअरमार बमों का निर्यात संभव है। पुणे के प्रतिनिधियों ने कहा कि हमारे यहां भी तलवार, भाले, बरछी, त्रिशूल तमंचे का निर्माण आदिकाल से होता रहा है। दोनों ओर के प्रतिनिधियों ने इस क्षेत्र में सहयोग पर बहुत बल दिया।
प्रतिनिधियों ने युवकों के रोजगार पर चर्चा की। हमारे प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि जबलपुर में जिन्हें वास्तव में पढ़ना लिखना है वे दूसरे शहरों और खास तौर पर पूना चले जाते हैं। बाकी बचे लोग गणेशोत्सव, दुर्गा पूजा, नर्मदा जयंती, कांवड़ यात्रा, वैष्णोदेवी यात्रा, कुंभ, महाकुंभ, अर्धकुंभ, सिंहस्थ इत्यादि में व्यस्त रहते हैं। इस बीच पंचायत, नगरनिगम, विधानसभा लोकसभा चुनाव भी युवाओं को व्यस्त रखते हैं। कुछ नौजवान नेताओं के साथ उनकी फारचुनर में बैठने के काम आते हैं। ये भविष्य में ठेकेदार, रंगदार और नेता बनते हैं। जुआं सट्टा तो परंपरागत खेल हैं मगर आजकल आई पी एल सट्टा आदि अनेक नए खेल आ गए हैं इसलिए समय किसी के पास नहीं है। पुणे के प्रतिनिधियों ने सहमति व्यक्त की और कहा कि संस्कृति में पूरा भारत एक है हमारे यहां गणेशोत्सव, छत्रपति शिवाजी जयंती और चुनाव आदि में युवा व्यस्त रहते हैं। जिनके पास शर्म हया है, वे मेहनत मजूरी करके, छोटे छोटे व्यापार करके जीवन यापन करते हैं।
पुणे के प्रतिनिधियों ने कहा कि आपके यहां जो भवन पुल निर्माण हो उसके नामकरण में महाराष्ट्र के वीर पुरूषों का ध्यान रखा जाए क्योंकि जबलपुर पर काफी सालों तक मराठों का शासन रहा है। जबलपुर के प्रतिनिधियों ने कहा कि जैसे आपके यहां हर सड़क, पुल, भवन पर एक ही नाम है उसी तरह जबलपुर में हर निर्माण का नाम रानी दुर्गावती के नाम पर रखा जाता है। हम सौ सौ करोड़ की मूर्ति और स्मारक बना सकते हैं पर शिक्षा मंदिर, आरोग्य मंदिर, गं्रथालय और पुस्तकालय नहीं बना सकते। सिविल कंस्ट्रक्शन का काम हमारी मजबूरी है। कमाई उसी में है।
डोरीलाल ने यात्रा प्रारंभ होने से पहले ही पुणे के राजप्रमुख को बता दिया था कि डोरीलाल जहां जाते हैं वहां उनको वहां का सर्वोच्च सम्मान दिया जाना पहली शर्त है। तभी व्यापार समझौता होता है। नहीं तो काय का व्यापार और काहे की यात्रा। पूना के आलीशान होटल में डोरीलाल को पूना का सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया गया। जिसे डोरीलाल ने विनम्रता से स्वीकार किया। दोनों शहरों के कुछ चुनिंदा नुमाइंदों ने भोज इत्यादि किया। इस अवसर पर छंटे हुए कवियों ने काव्यपाठ किया।
अंत में दोनों शहरों के बीच करोड़ों रूपये के व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर की पुस्तिका तैयार हो गईं। डोरीलाल और पुणे के राजप्रमुख आकर बैठ गये। कैमरे की ओर देखते हुए दोनों पक्षों ने व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। चार पांच लोगों की भीड़ ने जमकर करतल ध्वनि की। इसके बाद प्रेस से मिलिये कार्यक्रम के लिए दोनों राजप्रमुख आगे बढ़े मगर डोरीलाल धीरे से कट लिए। मुंह सूख जाता है। कुछ का कुछ पूछ लेते हैं ये बाहर के पत्रकार।
यह पहला अवसर था कि जब सत्तर सालों में पहली बार जबलपुर के डोरीलाल जी ने स्पेशल ट्रेन से पूना की राजकीय यात्रा की। इसके पहले किसी ने यह पराक्रम भरा काम करने की हिम्मत नहीं दिखाई। बाहर खड़ी जबलपुर वासियों की भीड़ एक लय में चिल्ला रही थी डोरी डोरी डोरी डोरी।
डोरीलाल पुणे प्रेमी
31 03 2025
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