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Wednesday, 14 May 2025

चुप्पी की भाषा होती है

            शोर की भाषा होती है। बहस की भाषा होती है। उत्तेजना की भाषा होती है। गालियों की भाषा होती है। इन सबको सुनने वालों की भी भाषा होती है। चुप्पी की भाषा। चुप्पी का भी एक शोर होता है। चुप्पी की भाषा होती है। मौन की भाषा होती है। 

           इसलिए यदि झगड़े में एक पक्ष कुछ न बोले तो उसकी चुप्पी बहुत घातक हो जाती है। वो हमलावर को कातर भाव से देख सकता है। क्षमायाचना के भाव से देख सकता है। क्रोध के भाव से देख सकता है। याचक भाव से देख सकता है। दया की भीख मांगने के भाव से देख सकता है। मगर वो इस भाव से भी देख सकता है कि ठीक है तुम्हारे पास ताकत है तो तुम अपने मन की कर लो मगर मैं याद रखूंगा और मेरा भी समय आयेगा। 

            इस दुनिया में न्याय अन्याय में बदलता है और दुनिया का चक्र घूमता है और फिर अन्याय एक दिन पराजित होता है - न्याय में बदलता है क्योंकि हर रात की सुबह होती है। और इसी उम्मीद में आम आदमी मुसीबतों से लड़ता है। जिया उल हक ने पाकिस्तान में लोकतंत्र खत्म कर सत्ता हथियाई और उनके अत्याचार इस ऊंचाई पर पंहुचे कि उन्होंने चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बने जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी पर चढ़ा दिया। उन्होंने फैज अहमद फैज जैसे महान शायर को जेल मेंं डाल दिया। कलाओं और कलाकारों पर प्रतिबंध लगा दिया। साड़ी पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया। तब पाकिस्तान की मशहूर गायिका इकबाल बानो ने काली साड़ी पहनकर खुले मैदान में जिया उल हक को चुनौती दी। फैज अहमद फैज की प्रसिद्ध नज्म गाई ’’ हम देखेंगे लाजिम है कि हम भी देखेंगे’’, उस समय पचास हजार लोग तानाशाह को नकार कर, धता बता कर मैदान में खड़े थे। बाद में दुनिया ने देखा कि एक दिन जिया उल हक हवाई जहाज से आसमान में उड़़े और आज तक उड़ ही रहे हैं। उन्हें भी दो गज जमीन भी न मिली कूए यार में। 

               हिटलर के एक इशारे पर नाजियों ने अपने ही जर्मन भाइयों पर जुल्म ढाये। 30 लाख यहूदियों को सिर्फ इसलिए मार डाला गया कि वो यहूदी हैं। यहूदियों को यातना शिविरों में रखा गया। बच्चों महिलाओं बुजुर्गों किसी को नहीं छोड़ा। यहूदियों के खिलाफ नफरत का सैलाब आ गया था। उन्हें सड़कों पर मारा जाता। उनकी दुकानें लूट ली गईं। उनकी दुकानों के आगे नाजी स्वयंसेवक बोर्ड लेकर खड़े हो जाते कि इनकी दुकानों से सामान नहीं खरीदना है। जो खरीदेगा वो परिणाम भुगतेगा। वैज्ञानिक, लेखक कवि नाटककार या तो जेलों में डाल दिए गये, मार डाले गये या देश छोड़ने पर मजबूर कर दिए गए। इस माहौल में हजारों लाखों ने विरोध की सजा भुगती। और हजारों लाखों चुप बैठे रहे। लाखों जर्मन युवक हिटलर के उन्मादी राष्ट्रवाद का शिकार होकर सैनिक बने और युद्ध में मारे गये। हिटलर के कारण द्वितीय विश्वयुद्ध हुआ जिसमें दुनिया में दो करोड़ लोग मारे गये। यूरोप के हर घर से लोग मारे गये। एक दिन वो आया कि हिटलर ने तहखाने में खुद को गोली मार ली। चुप्पी की भाषा उसने नहीं सुनी। मुसोलिनी ने इटली में तानाशाही के विरोधियों पर अत्याचार और हत्याओं का कहर बरपाया। उसके विरोध में जो बोला मारा गया। मगर लाखों करोड़ों लोग चुप थे। और एक दिन वो आया कि अपने ही देश में वेश बदलकर कार में छुपकर भागते हुए देशवासियों ने पकड़ा और खंबे से लटकाकर फांसी दे दी। कई दिनों तक शव लटका रहा। स्पेन में फ्रेंको ने और पुर्तगाल में सालाज़ार ने 35-35 साल निरंकुश राज किया। लाखों विरोधियों को मौत के घाट उतार दिया पर आखिर एक दिन ताबूत के अंदर समा गये। कोई तानाशाह अमर नहीं है। न ईश्वर है। न देवता है। अभी अभी श्रीलंका में लाखों लोग राष्ट्रपति भवन में घुस गये और राष्ट्रपति राजपक्षे हवाई जहाज में बैठकर भागे। अनेक देशों ने उनके हवाई जहाज को अपने देश में उतरने नहीं दिया। सिंगापुर पंहुचकर स्तीफा दिया। 

           तभी शायर कहता है कि अत्याचारी तानाशाह के सामने डटे रहो क्योंकि सितम की स्याह रात एक दिन खत्म होगी। 

    सितम की राह पर रखते चलो सरों के चिराग

    कि जब तक सितम की स्याह रात चले

             निरंकुश राजा अपने को अमर मानता है और सत्ता के नशे में वो अपने को अपराजेय और भगवान मानने लगता है। उसे केवल अपनी जय जय कार ही सुनाई देती है। भक्तों के भजन सुनाई देते हैं।  

तुमसे पहले वो जो इक शख्स यहां तख्त-नशीं था 

उसको भी अपने खुदा होने पे इतना ही यकीं था

            डोरीलाल हुक्मरानों से कहना चाहते हैं कि गरीब मजलूम यदि चुप है तो ये तुम्हारे लिए चेतावनी है। चुप्पी की भाषा पढ़ो। गरीब निरीह कुछ बोलता नहीं मगर जब बोलता है तो धरती हिल जाती है और आसमान लाल हो जाता है। 


डोरीलाल ’गरीबप्रेमी’

21 03 2023

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