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Wednesday, 14 May 2025

भरोसे की दीवार तेज हवा में गिर गई

               जबलपुर शहर में दो काम एक साथ हुए। रानीताल में नई बनी दीवार गिर गई और मुख्यमंत्री जबलपुर आए, उन्होंने प्रबुद्धजनों से संवाद किया। 

               देश में 200 शहरों में स्मार्ट सिटी बन रही है। इसे स्मार्टसिटी लि द्वारा बनाया जा रहा है। यह एक कंपनी है। यह गवनमेंट आफ द पीपुल, बाय द पीपुल, फार द पीपुल की तर्ज पर है यानी अफसरों के द्वारा, अफसरों के लिए और अफसरों की है। यह मालूम नहीं कि यह किस के प्रति उत्तरदायी है। कम से कम जनता के प्रति तो नहीं है। इसे केन्द्र और राज्य से सीधे पैसा मिलता है जिसे खर्च करना ही है। इसमें जनता यानी जनप्रतिनिधियों का प्रवेश निषेध है। कोई कुछ नहीं बोलेगा।

                 तो जबलपुर में भी स्मार्ट सिटी लि है। इसने जबलपुर शहर की जनता की भलाई के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। भलाई पर भलाई किए जा रही है। एक भलाई पूरी नहीं होती कि दूसरी भलाई चालू हो जाती है। पूरे शहर में इसके द्वारा की गई भलाईयां फैली हुई हैं। कुछ भलाईयां तो हुईं और फिर खत्म भी हो गईं। तब तक नई भलाईयां चालू हो गईं। इन्हीं में से एक भलाई रानीताल की भी है। इसमें 18 करोड़ रूपये से जनता की भलाई की जा रही है। जबलपुर शहर में कुछ तालाब बच गए हैं। वो आंख की किरकिरी बने हुए हैं। उन्हें निपटाना है। इसी योजना के अन्तर्गत अब रानीताल का विकास हो रहा है। जब भी विकास होता है तो इसका मतलब करोड़ों का निर्माण कार्य होता है। भई विकास में पैसा तो खर्च होगा ही, वाजिब बात है। विकास में सबसे पहले या सबसे जरूरी बात यह होती है कि विकास किए जाने वाले घटना स्थल को चारों ओर बाउंड्री वाल से घेर दिया जाए और एक भव्य गेट बना दिया जाए। कुछ तो पैसा खर्च हो। तो रानीताल के विकास की शुरूआती काम में जो दीवार बनाई गई थी वो गिर गई। कुछ बची है वो भी गिरने पर उतारू है। जिम्मेदार अधिकारी ने बताया है कि दीवार बिल्कुल सही बनी थी गिर गई है तो जांच की जाएगी कि क्यों गिरी। बल्कि अधिकारियों को स्वयं जाकर दीवार से ही पूछ लेना चाहिए कि बाई तू क्यों गिरी। गिरना तो सबको है पर तू इतनी जल्दी क्यों गिरी। एक आध साल बाद गिरती तो क्या गजब हो जाता। बिल्कुल वाजिब बात। 

                      कहावत है कि ज्यादा रसोइये होते हैं तो खाना बिगड़ जाता है टू मैनी कुक्स स्पॉइल द फुड। इसलिए स्मार्टसिटी लिमिटेड है। ज्यादा लोगों को शामिल करने का नईं। इसलिए स्मार्ट सिटी के काम में पैसा जनता का लगता है पर जनता से पूछा नहीं जाता कि तुम्हें क्या चाहिए। मान लिया जाता है कि जनता बटर चिकन खायेगी लौकी नहीं खायेगी। तो एक के बाद एक 100-200 करोड़ के काम ऐसे हो रहे हैं जैसे दस बीस हजार के काम हैं। कन्वेंशन सेंटर क्या है और किसके लिए है और कब बन पायेगा और किसके उपयोग में आएगा ये एक रहस्य है। कल्चरल स्ट्रीट में जो संस्कृति थियेटर है उसकी लागत 14.51 करोड़ है। हे भगवान। हैरीटेज होटल गोकुलदास धर्मशाला बनकर तैयार है कोई लेनेवाला नहीं। राइटटाउन स्टेडियम में करोड़ों के निर्माण हो चुके हैं। उदास खड़े हैं। खिलाड़ियों के लिए बने हैं पर खिलाड़ियों को घुसने की इजाजत नहीं है। हरि अनंत हरि कथा अनंता। 

                 मुख्यमंत्री आए और उन्होंने प्रबुद्धजनों से संवाद किया। इस बहाने यह भी तय हुआ कि प्रबुद्धजन कौन हैं। बहुत से लोग शहर में निराश घूम रहे हैं। जाहिर है कि संवाद में विकास की कथा कही गई। सबने कही। पर डोरीलाल ये पूछने से वंचित रह गये कि रानीताल की दीवार क्यां गिरी। ये ईंट गारे की नहीं भरोसे की दीवार थी। गिर गई। हम सबको मालूम है कि भूकंप आया नहीं। तो अच्छी भली मजबूत दीवार कैसे गिरी। हां कुछ आंधी पानी जरूर हुआ था। शायद तेज हवा सह न पाई हो। 

जबलपुर में भरोसे की खूब दीवारें गिर रही हैं। मगर करदाता जनता उदार है। वो चुप रहती है। जनता धर्मप्राण है। उसे दुनिया के इन छलप्रपंचों से मतलब नहीं। इनके बोलने पर पाबंदी नहीं है मगर इन्होंने खुद ही चुप लगा रखी है। 

              दिनकर कहते हैं - 

                    समर शेष है नहीं पाप का भागी केवल व्याध

                    जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनके भी अपराध 


डोरीलाल दीवारप्रेमी

10 04 2023

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