Search This Blog

Wednesday, 14 May 2025

शर्म तुमको मगर नहीं आती

  डोरीलाल तुमको शर्म नहीं आती। देश की कुश्ती की महान खिलाड़ी दिल्ली में जंतर मंतर पर धरने पर बैठी हैं। उनने जनवरी माह में आवाज उठाई थी कि उनके साथ शारीरिक दुर्व्यवहार हो रहा है। और ये सिलसिला कई सालों से जारी है। ये कोई छोटे दर्जे की खिलाड़ी नहीं हैं। ये आलंपिक पदक विजेता हैं। जब ये पदक जीतती हैं और तिरंगा लेकर चलती हैं और मंच पर खड़े होकर जन गण मन गाती हैं तो पूरा देश का सीना गर्व से फूल जाता है। अब ये लड़कियां यदि अपने पर हो रहे अत्याचारों की कहानी बता रही हैं तो ये देश उनके साथ नहीं खड़ा है। डोरीलाल तुमको शर्म नहीं आती।

                 इन महिला पहलवानों ने जब शिकायत की तो पहले तो कोई सुनने को तैयार नहीं हुआ। फिर सुनके कहा झूठी है। मगर फिर लगा कि ऐसे में मामला बिगड़ जाएगा तो दफ्तर बुलाकर समझाया और कहा कि एक कमेटी बना देते हैं। फिर जो दोषी होगा उसके खिलाफ कार्यवाही हो जाएगी। भारत में कमेटी बनाने का मतलब होता है मामले को ठंडे बस्ते में डाल देना। महिला पहलवानों ने तीन महीने इंतजार किया कि कमेटी कुछ करेगी। मगर कमेटी नहीं बोली। शर्म तुमको मगर नहीं आती। 

                  फिर कुछ दमदार लोग सामने आए। उन्हें मालूम था कि औरत जात आखिर कहां तक लड़ेगी। तो उनने कहा कि यदि तुम्हें इतना ही दर्द है तो एफ आई आर क्यों नहीं करातीं ? एफ आई आर कराना मतलब सबकुछ पूरी जिम्मेदारी से बयान करना, सप्रमाण बयान करना और अपनी गोपनीयता उजागर करना। मगर लड़कियां इसके लिए भी राजी हो गईं। हुक्मरानों को ये उम्मीद न थी। तो पुलिस ने एफ आई आर दर्ज करने से इंकार कर दिया। एफ आई आर दर्ज होगी तो जिस पर आरोप है उस पर कार्यवाही करना होगी। गिरफ्तारी करना होगी। तो एफ आई आर नहीं होगी। शर्म तुमको मगर नहीं आती।

                    कपिल सिब्बल सीधे सुप्रीम कोर्ट पंहुच गये। एफ आई आर दर्ज कराने की मांग को लेकर। अमूमन ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट याचकों को निचली अदालतों में जाने के लिए कहता है। सुप्रीम कोर्ट ने यही कहा पर पुनर्विचार कर उन्होंने एफ आई आर के लिए दिए गए लिफाफों को देखा। उसमें जो कुछ देखा उसे देखकर पुलिस से पूछा  कि आप एफ आई आर क्यों नहीं कर रहे ? पुलिस ने कहा कि हम सोच कर बताएंगे। दो दिन बाद पुलिए ने सोचकर बताया कि ठीक है आप कहते हैं तो हम एफ आई आर कर लेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आज ही करो। तो देर रात एफ आई आर हुई। शर्म तुमको मगर नहीं आती। 

पुलिस का मन आहत हो गया है। पुलिस पुलिस है। सुप्रीम कोर्ट के सामने हेठी हो गई। तो देश के सम्मान की रक्षा के लिए पुलिस ने धरने पर बैठे पहलवानों की बिजली काट दी। उनका खाना नाश्ता चाय और पीने का पानी लाना रोक दिया। उनके गद््दे छीन लिए। पुलिस के बड़े साहब ने कहा है एफ आई आर हो गई अब धरना बंद करो वरना ऐसे ही राइट कर देंगे। ये पुलिस पीड़ितों के साथ है या पीड़कों के साथ ? शर्म तुमको मगर नहीं आती। 

                      सीधे सादे पहलवानों को पिछले बार समझाया गया कि राजनीतिक लोग यदि तुम्हारे आंदोलन को समर्थन देंगे तो तुम लोग राजनीति के चक्कर में पड़ जाओगे। बेचारों ने किसी राजनीतिज्ञ को आने न दिया। मंच पर बैठने न दिया। मगर सत्ताधारी बहुत कठोर हैं। इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा। इस बार जब खिलाड़ियों ने सबसे समर्थन की अपील की तो सब पहुंचे। खिलाड़ियों को अपने खिलाड़ी समुदाय से अपील करना पड़ी। भाईयो आप तो हमारे साथ आओ। हम और आप तो खिलाड़ी हैं। हम एक दूसरे का दर्द तो समझें। कपिलदेव, वीरेन्द्र सहवाग, नीरज चोपड़ा, अभिनव बिन्द्रा परगट सिंह  जैसे खिलाड़ियों ने दमदारी के साथ कहा कि हम पहलवान खिलाड़ियों के संघर्ष के साथ हैं मगर न जाने कितने हजारों खिलाड़ी, और विशेषकर महिला खिलाड़ी चुप हैं। चुप हैं मतलब या तो साथ नहीं हैं या फिर हिम्मत नहीं है समर्थन करने की। उल्टे अब महिला पहलवानों पर घटिया आरोप लगाने का सिलसिला शुरू हो गया है। शर्म तुमको मगर नहीं आती। 

                    डोरीलाल अपने प्यारे देशवासियों से एक बात पूछना चाहता है। आखिर कब तक ? कब तक चुप रहोगे। तुम चुप हो इसका यह मतलब नहीं कि तुम पीड़ित के साथ हो। इसका मतलब तुम पीड़क के साथ हो, अत्याचारी के साथ हो। इस चुप्पी के साथ क्या तुम अपनी बच्ची को खिलाड़ी बनाओगे ? क्या कोई बच्ची अब खेलों में नाम और मेडल कमाना चाहेगी ? कौन मां बाप सबकुछ जानते समझते अपनी बच्चियों को खेलने भेजेंगे ?  शर्म तुमको मगर नहीं आती। चुप्पी तोड़ो भारत देश चुप्पी तोड़ो।


डोरीलाल भारतप्रेमी

30 04 2023

No comments:

Post a Comment

न्याय का बैडमिन्टन

डोरीलाल जी, बैडमिन्टन के खेल के बारे में कुछ प्रकाश डालिये।             बैडमिन्टन एक खेल है जिसमें एक कोर्ट होता है। एक या दो खिलाड़ी आमने स...